Priyadarshan Blog
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ईरान Vs अमेरिका-इजरायल युद्ध और वर्ल्ड वॉर 2 काल में क्या समानताएं हैं?
- Thursday March 12, 2026
- Written by: प्रियदर्शन
पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध जारी है. इसमें अरब के कुछ और देश भी पिस रहे हैं. इस युद्ध ने हमें विश्व युद्ध की याद दिला दी है. इस युद्ध और द्वितिय विश्व युद्ध में समानताओं की पड़ताल कर रहे हैं प्रियदर्शन.
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राइटर को गोली मारी, अब उसका स्मारक जलाया- ऐसे महान बनेगा अमेरिका?
- Monday February 23, 2026
- प्रियदर्शन
इस हत्या की पूरे अमेरिका में तीखी प्रतिक्रिया हुई. लेकिन फेडरल एजेंसियों ने गोली चलाए जाने को सही ठहराया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा कि यह आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई थी- यह महिला पुलिसवाले को कुचलने का इरादा रखती थी. ट्रंप के मुताबिक पुलिसवाला अस्पताल पहुंच गया. हालांकि वीडियो बताते हैं कि यह भी ट्रंप का एक और झूठ भर है.
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सौ साल बाद के लिए अभी लिखी जा रही किताबें
- Wednesday February 11, 2026
- Written by: प्रियदर्शन
फ्यूचर लाइब्रेरी ऐसी ही विराट परियोजना है जिसका इरादा हमारे समय की सर्वश्रेष्ठ रचनात्मकता और कल्पनाशीलता को एक सदी के बाद के पाठकों के लिए बचाए रखने का है. वैसे यह सच है कि दुनिया जितनी तेज़ी से बदलती है, उतनी ही ज़िद के साथ पुरानेपन से जकड़ी भी रहती है.
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दुष्यंत की कोशिश थी कि ये सूरत बदलनी चाहिए- उन्होंने ग़ज़लों की बिल्कुल नई लकीर खींची
- Tuesday February 3, 2026
- प्रियदर्शन
अचानक यह बात समझ में आती है कि उर्दू में फ़ैज़ जिस बात के लिए सराहे जाते हैं- रोमानियत और राजनीति को मिलाने के लिए, उसे शायद हिंदी में दुष्यंत कुमार ने कुछ और गाढ़ेपन के साथ साधने में कामयाबी हासिल की है.
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क्या नेताओं का अहंकार इस दुनिया को नष्ट कर देगा?
- Wednesday January 21, 2026
- Written by: प्रियदर्शन
दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जो नई विश्व-व्यवस्था बनी थी, वह दो ध्रुवों में बंटी हुई एक शीतयुद्ध लड़ती रही. लेकिन सोवियत संघ के पतन के बाद अमेरिका के एकाधिकार की छुपी हुई कोशिशें अब बिल्कुल स्पष्ट घोषणाओं में बदल चुकी हैं.
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दिल्ली बुक फेयर में लाखों नई किताबें, AI और इंटरनेट पर दुनिया भर के कंटेंट के बावजूद कैसे टिकी हैं पुस्तकें
- Monday January 12, 2026
- प्रियदर्शन
किताबों ने हमें देखना सिखाया है. किताबें ख़ूब ख़रीदें. यह अनुभव आम है कि हम जितनी किताबें ख़रीदते हैं, उतनी पढ़ नहीं पाते. लेकिन किताबों का घर में होना आश्वस्त करता है कि किसी भी दिन हम चाहें तो उन्हें पलटेंगे. किताबें भी हमें अपनी आलमारियों से देखती रहती हैं.
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ईरानी लड़कियों के सीने में जलती है एक आग
- Wednesday January 21, 2026
- Written by: प्रियदर्शन
ईरान में लड़कियों अपने दमन और उत्पीड़न की परवाह किए बिना, अपने कटे होंठों से बहते लहू के साथ मोर्चे पर हैं, ईरान को बदलने की बात कर रही हैं. वैसे ईरान में लड़कियों की यह जुझारू भूमिका नई नहीं है.
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स्मृतिशेष ज्ञानरंजन: हिंदी की ऊष्मा और ऊर्जा का एक स्रोत चला गया
- Thursday January 8, 2026
- Written by: प्रियदर्शन
वरिष्ठ हिंदी साहित्यकार ज्ञानरंजन का आज 89 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्हें उनकी कहानियों के साथ-साथ 'पहल' नाम की साहित्य पत्रिका के संपादन के लिए भी याद किया जाएगा.
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21वीं सदी के 25 साल, कितने कमाल-कितने मलाल
- Friday January 2, 2026
- Written by: प्रियदर्शन
वैसे इन पच्चीस वर्षों में जितने त्वरित बदलाव दिख रहे हैं, उतने ही ज़िद्दी ठहराव भी नज़र आ रहे हैं. जिन बीमारियों को हम उन्नीसवीं सदी में ख़त्म मान ले रहे थे, वे इक्कीसवीं सदी में प्रगट हो रही हैं. जिन बहसों को बीती सदी में बीत जाना चाहिए था, वे नई धमक के साथ मौजूद हैं.
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ईरान Vs अमेरिका-इजरायल युद्ध और वर्ल्ड वॉर 2 काल में क्या समानताएं हैं?
- Thursday March 12, 2026
- Written by: प्रियदर्शन
पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध जारी है. इसमें अरब के कुछ और देश भी पिस रहे हैं. इस युद्ध ने हमें विश्व युद्ध की याद दिला दी है. इस युद्ध और द्वितिय विश्व युद्ध में समानताओं की पड़ताल कर रहे हैं प्रियदर्शन.
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राइटर को गोली मारी, अब उसका स्मारक जलाया- ऐसे महान बनेगा अमेरिका?
- Monday February 23, 2026
- प्रियदर्शन
इस हत्या की पूरे अमेरिका में तीखी प्रतिक्रिया हुई. लेकिन फेडरल एजेंसियों ने गोली चलाए जाने को सही ठहराया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा कि यह आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई थी- यह महिला पुलिसवाले को कुचलने का इरादा रखती थी. ट्रंप के मुताबिक पुलिसवाला अस्पताल पहुंच गया. हालांकि वीडियो बताते हैं कि यह भी ट्रंप का एक और झूठ भर है.
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सौ साल बाद के लिए अभी लिखी जा रही किताबें
- Wednesday February 11, 2026
- Written by: प्रियदर्शन
फ्यूचर लाइब्रेरी ऐसी ही विराट परियोजना है जिसका इरादा हमारे समय की सर्वश्रेष्ठ रचनात्मकता और कल्पनाशीलता को एक सदी के बाद के पाठकों के लिए बचाए रखने का है. वैसे यह सच है कि दुनिया जितनी तेज़ी से बदलती है, उतनी ही ज़िद के साथ पुरानेपन से जकड़ी भी रहती है.
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दुष्यंत की कोशिश थी कि ये सूरत बदलनी चाहिए- उन्होंने ग़ज़लों की बिल्कुल नई लकीर खींची
- Tuesday February 3, 2026
- प्रियदर्शन
अचानक यह बात समझ में आती है कि उर्दू में फ़ैज़ जिस बात के लिए सराहे जाते हैं- रोमानियत और राजनीति को मिलाने के लिए, उसे शायद हिंदी में दुष्यंत कुमार ने कुछ और गाढ़ेपन के साथ साधने में कामयाबी हासिल की है.
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क्या नेताओं का अहंकार इस दुनिया को नष्ट कर देगा?
- Wednesday January 21, 2026
- Written by: प्रियदर्शन
दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जो नई विश्व-व्यवस्था बनी थी, वह दो ध्रुवों में बंटी हुई एक शीतयुद्ध लड़ती रही. लेकिन सोवियत संघ के पतन के बाद अमेरिका के एकाधिकार की छुपी हुई कोशिशें अब बिल्कुल स्पष्ट घोषणाओं में बदल चुकी हैं.
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दिल्ली बुक फेयर में लाखों नई किताबें, AI और इंटरनेट पर दुनिया भर के कंटेंट के बावजूद कैसे टिकी हैं पुस्तकें
- Monday January 12, 2026
- प्रियदर्शन
किताबों ने हमें देखना सिखाया है. किताबें ख़ूब ख़रीदें. यह अनुभव आम है कि हम जितनी किताबें ख़रीदते हैं, उतनी पढ़ नहीं पाते. लेकिन किताबों का घर में होना आश्वस्त करता है कि किसी भी दिन हम चाहें तो उन्हें पलटेंगे. किताबें भी हमें अपनी आलमारियों से देखती रहती हैं.
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ईरानी लड़कियों के सीने में जलती है एक आग
- Wednesday January 21, 2026
- Written by: प्रियदर्शन
ईरान में लड़कियों अपने दमन और उत्पीड़न की परवाह किए बिना, अपने कटे होंठों से बहते लहू के साथ मोर्चे पर हैं, ईरान को बदलने की बात कर रही हैं. वैसे ईरान में लड़कियों की यह जुझारू भूमिका नई नहीं है.
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स्मृतिशेष ज्ञानरंजन: हिंदी की ऊष्मा और ऊर्जा का एक स्रोत चला गया
- Thursday January 8, 2026
- Written by: प्रियदर्शन
वरिष्ठ हिंदी साहित्यकार ज्ञानरंजन का आज 89 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्हें उनकी कहानियों के साथ-साथ 'पहल' नाम की साहित्य पत्रिका के संपादन के लिए भी याद किया जाएगा.
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21वीं सदी के 25 साल, कितने कमाल-कितने मलाल
- Friday January 2, 2026
- Written by: प्रियदर्शन
वैसे इन पच्चीस वर्षों में जितने त्वरित बदलाव दिख रहे हैं, उतने ही ज़िद्दी ठहराव भी नज़र आ रहे हैं. जिन बीमारियों को हम उन्नीसवीं सदी में ख़त्म मान ले रहे थे, वे इक्कीसवीं सदी में प्रगट हो रही हैं. जिन बहसों को बीती सदी में बीत जाना चाहिए था, वे नई धमक के साथ मौजूद हैं.
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