Priyadarshan Blog
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क्या नेताओं का अहंकार इस दुनिया को नष्ट कर देगा?
- Wednesday January 14, 2026
- Written by: प्रियदर्शन
दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जो नई विश्व-व्यवस्था बनी थी, वह दो ध्रुवों में बंटी हुई एक शीतयुद्ध लड़ती रही. लेकिन सोवियत संघ के पतन के बाद अमेरिका के एकाधिकार की छुपी हुई कोशिशें अब बिल्कुल स्पष्ट घोषणाओं में बदल चुकी हैं.
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दिल्ली बुक फेयर में लाखों नई किताबें, AI और इंटरनेट पर दुनिया भर के कंटेंट के बावजूद कैसे टिकी हैं पुस्तकें
- Monday January 12, 2026
- प्रियदर्शन
किताबों ने हमें देखना सिखाया है. किताबें ख़ूब ख़रीदें. यह अनुभव आम है कि हम जितनी किताबें ख़रीदते हैं, उतनी पढ़ नहीं पाते. लेकिन किताबों का घर में होना आश्वस्त करता है कि किसी भी दिन हम चाहें तो उन्हें पलटेंगे. किताबें भी हमें अपनी आलमारियों से देखती रहती हैं.
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ईरानी लड़कियों के सीने में जलती है एक आग
- Monday January 12, 2026
- Written by: प्रियदर्शन
ईरान में लड़कियों अपने दमन और उत्पीड़न की परवाह किए बिना, अपने कटे होंठों से बहते लहू के साथ मोर्चे पर हैं, ईरान को बदलने की बात कर रही हैं. वैसे ईरान में लड़कियों की यह जुझारू भूमिका नई नहीं है.
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स्मृतिशेष ज्ञानरंजन: हिंदी की ऊष्मा और ऊर्जा का एक स्रोत चला गया
- Thursday January 8, 2026
- Written by: प्रियदर्शन
वरिष्ठ हिंदी साहित्यकार ज्ञानरंजन का आज 89 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्हें उनकी कहानियों के साथ-साथ 'पहल' नाम की साहित्य पत्रिका के संपादन के लिए भी याद किया जाएगा.
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21वीं सदी के 25 साल, कितने कमाल-कितने मलाल
- Friday January 2, 2026
- Written by: प्रियदर्शन
वैसे इन पच्चीस वर्षों में जितने त्वरित बदलाव दिख रहे हैं, उतने ही ज़िद्दी ठहराव भी नज़र आ रहे हैं. जिन बीमारियों को हम उन्नीसवीं सदी में ख़त्म मान ले रहे थे, वे इक्कीसवीं सदी में प्रगट हो रही हैं. जिन बहसों को बीती सदी में बीत जाना चाहिए था, वे नई धमक के साथ मौजूद हैं.
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विनोद कुमार शुक्ल नहीं रहे... दीवार से देह निकल गई, शब्दों की खिड़की से रोशनी आती रहेगी
- Wednesday December 24, 2025
- प्रियदर्शन
विनोद कुमार शुक्ल लिख और छप तो सातवें दशक से रहे थे और अपनी सहज प्रयोगशीलता के साथ रचनाकर्म को बरत रहे थे, लेकिन कीर्ति संभवतः उन्हें कुछ देर से मिली. सत्तर और अस्सी के दशक बहुत ऊंची आवाज़ में सुनाई पड़ने वाली जनपक्षधर कविताओं के थे जिनके बड़े नायक नागार्जुन, त्रिलोचन और केदारनाथ अग्रवाल जैसे कवि थे.
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धर्मेंद्र को जीते-जी मार डाला! शर्म मीडिया को मगर नहीं आती
- Wednesday November 12, 2025
- प्रियदर्शन
धर्मेंद्र पर लौटें. यह सच है कि वे अरसे से बीमार हैं. बीच-बीच में अस्पताल भी जाते रहे हैं. लेकिन यह भी सच है कि इस उम्र में वे फिल्में भी करते रहे हैं. इस साल दिसंबर में भी उनकी एक फिल्म आने वाली है.
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आधी रात को जब दुनिया सो रही थी, हिंदुस्तान की लड़कियां जश्न मना रही थीं
- Monday November 3, 2025
- प्रियदर्शन
ये नई लड़कियां अपनी ही नहीं, नए हिंदुस्तान की कहानी भी लिख रही हैं. वे बदल रही हैं और लड़कों को बदलने को मजबूर कर रही हैं. ऐसा नहीं कि ये उपलब्धियां किसी शून्य से अचानक आ गई हैं. अलग-अलग खेलों में ये लड़कियां कमाल कर रही हैं.
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दम मारो दम! गॉडफादर टु ब्राजील, ड्रग्स की काली-अंधेरी दुनिया की कहानी
- Thursday October 30, 2025
- Written by: प्रियदर्शन
ड्रग्स का संसार बड़ा होता जा रहा है. ब्राजील के रियो में ड्रग्स कार्टेल पर कार्रवाई तो बस एक इशारा भर है. नशे के इस कारोबार की कहानी...
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किस बात का नशा? हम एक बीमार समाज तो नहीं बना रहे हैं?
- Wednesday October 29, 2025
- प्रियदर्शन
भारत में भी ड्रग्स का यह संसार और कारोबार बड़ा होता जा रहा है- इसके प्रमाण बहुत सारे हैं. पंजाब में तो इसने एक महामारी जैसा रूप ले लिया था. बीच-बीच में तमाम विश्वविद्यालयों के आसपास ड्रग्स के धंधे की चिंताजनक ख़बरें आती रही हैं.
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अथ श्री जननायक कथा: गांधी इसलिए जननायक नहीं, महात्मा कहलाए
- Wednesday October 29, 2025
- प्रियदर्शन
बिहार में पिछड़ी राजनीति कर्पूरी ठाकुर को जननायक मानती रही. अब तो सब मानने लगे हैं, लेकिन एक दौर में उनकी पिछड़ी जाति को लेकर मज़ाक उड़ाया जाता रहा, तुकबंदियां की जाती रहीं.
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जातिवाद ज्यादा खतरनाक है या सांप्रदायिकता?
- Monday October 27, 2025
- प्रियदर्शन
नीतीश ने भी लालू यादव के मंडल की काट में जो राजनीति विकसित की, वह जातिगत अस्मिताओं को मज़बूत करने वाली ही थी. उन्होंने बस यह किया कि मंडल के कुछ और टुकड़े कर डाले. पिछड़ों में अतिपिछड़े और दलितों में महादलित खोज निकाले. मुसलमानों में भी अशरफ़ और पसमांदा मुसलमान का फ़र्क किया गया.
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विराट की विदाई का गीत गाने वालो, क्या आप यह सब भूल गए!
- Saturday October 25, 2025
- Reported by: प्रियदर्शन
यह 1983 का साल था, जब सुनील गावस्कर को सलाह दी जाने लगी कि वे क्रिकेट से संन्यास ले लें. 1983 के विश्व कप में भारत के हाथों पराजित और घायल क्लाइव लायड की वेस्ट इंडियन टीम बिल्कुल बदला लेने के इरादे से पांच टेस्ट खेलने भारत आई थी.
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पंकज धीर चले गए, सबको महाभारत का कर्ण याद आया
- Wednesday October 15, 2025
- Written by: प्रियदर्शन
पंकज धीर चले गए. महाभारत का रौबीली मूंछों वाला कर्ण का वह किरदार फिर जिंदा हो गया. धीर ने कई रोल किए, लेकिन वह ताउम्र कर्ण ही रहे. पढ़िए कर्ण की कहानी...
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क्या नेताओं का अहंकार इस दुनिया को नष्ट कर देगा?
- Wednesday January 14, 2026
- Written by: प्रियदर्शन
दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जो नई विश्व-व्यवस्था बनी थी, वह दो ध्रुवों में बंटी हुई एक शीतयुद्ध लड़ती रही. लेकिन सोवियत संघ के पतन के बाद अमेरिका के एकाधिकार की छुपी हुई कोशिशें अब बिल्कुल स्पष्ट घोषणाओं में बदल चुकी हैं.
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दिल्ली बुक फेयर में लाखों नई किताबें, AI और इंटरनेट पर दुनिया भर के कंटेंट के बावजूद कैसे टिकी हैं पुस्तकें
- Monday January 12, 2026
- प्रियदर्शन
किताबों ने हमें देखना सिखाया है. किताबें ख़ूब ख़रीदें. यह अनुभव आम है कि हम जितनी किताबें ख़रीदते हैं, उतनी पढ़ नहीं पाते. लेकिन किताबों का घर में होना आश्वस्त करता है कि किसी भी दिन हम चाहें तो उन्हें पलटेंगे. किताबें भी हमें अपनी आलमारियों से देखती रहती हैं.
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ईरानी लड़कियों के सीने में जलती है एक आग
- Monday January 12, 2026
- Written by: प्रियदर्शन
ईरान में लड़कियों अपने दमन और उत्पीड़न की परवाह किए बिना, अपने कटे होंठों से बहते लहू के साथ मोर्चे पर हैं, ईरान को बदलने की बात कर रही हैं. वैसे ईरान में लड़कियों की यह जुझारू भूमिका नई नहीं है.
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स्मृतिशेष ज्ञानरंजन: हिंदी की ऊष्मा और ऊर्जा का एक स्रोत चला गया
- Thursday January 8, 2026
- Written by: प्रियदर्शन
वरिष्ठ हिंदी साहित्यकार ज्ञानरंजन का आज 89 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्हें उनकी कहानियों के साथ-साथ 'पहल' नाम की साहित्य पत्रिका के संपादन के लिए भी याद किया जाएगा.
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21वीं सदी के 25 साल, कितने कमाल-कितने मलाल
- Friday January 2, 2026
- Written by: प्रियदर्शन
वैसे इन पच्चीस वर्षों में जितने त्वरित बदलाव दिख रहे हैं, उतने ही ज़िद्दी ठहराव भी नज़र आ रहे हैं. जिन बीमारियों को हम उन्नीसवीं सदी में ख़त्म मान ले रहे थे, वे इक्कीसवीं सदी में प्रगट हो रही हैं. जिन बहसों को बीती सदी में बीत जाना चाहिए था, वे नई धमक के साथ मौजूद हैं.
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विनोद कुमार शुक्ल नहीं रहे... दीवार से देह निकल गई, शब्दों की खिड़की से रोशनी आती रहेगी
- Wednesday December 24, 2025
- प्रियदर्शन
विनोद कुमार शुक्ल लिख और छप तो सातवें दशक से रहे थे और अपनी सहज प्रयोगशीलता के साथ रचनाकर्म को बरत रहे थे, लेकिन कीर्ति संभवतः उन्हें कुछ देर से मिली. सत्तर और अस्सी के दशक बहुत ऊंची आवाज़ में सुनाई पड़ने वाली जनपक्षधर कविताओं के थे जिनके बड़े नायक नागार्जुन, त्रिलोचन और केदारनाथ अग्रवाल जैसे कवि थे.
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धर्मेंद्र को जीते-जी मार डाला! शर्म मीडिया को मगर नहीं आती
- Wednesday November 12, 2025
- प्रियदर्शन
धर्मेंद्र पर लौटें. यह सच है कि वे अरसे से बीमार हैं. बीच-बीच में अस्पताल भी जाते रहे हैं. लेकिन यह भी सच है कि इस उम्र में वे फिल्में भी करते रहे हैं. इस साल दिसंबर में भी उनकी एक फिल्म आने वाली है.
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आधी रात को जब दुनिया सो रही थी, हिंदुस्तान की लड़कियां जश्न मना रही थीं
- Monday November 3, 2025
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ये नई लड़कियां अपनी ही नहीं, नए हिंदुस्तान की कहानी भी लिख रही हैं. वे बदल रही हैं और लड़कों को बदलने को मजबूर कर रही हैं. ऐसा नहीं कि ये उपलब्धियां किसी शून्य से अचानक आ गई हैं. अलग-अलग खेलों में ये लड़कियां कमाल कर रही हैं.
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दम मारो दम! गॉडफादर टु ब्राजील, ड्रग्स की काली-अंधेरी दुनिया की कहानी
- Thursday October 30, 2025
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ड्रग्स का संसार बड़ा होता जा रहा है. ब्राजील के रियो में ड्रग्स कार्टेल पर कार्रवाई तो बस एक इशारा भर है. नशे के इस कारोबार की कहानी...
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किस बात का नशा? हम एक बीमार समाज तो नहीं बना रहे हैं?
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भारत में भी ड्रग्स का यह संसार और कारोबार बड़ा होता जा रहा है- इसके प्रमाण बहुत सारे हैं. पंजाब में तो इसने एक महामारी जैसा रूप ले लिया था. बीच-बीच में तमाम विश्वविद्यालयों के आसपास ड्रग्स के धंधे की चिंताजनक ख़बरें आती रही हैं.
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अथ श्री जननायक कथा: गांधी इसलिए जननायक नहीं, महात्मा कहलाए
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बिहार में पिछड़ी राजनीति कर्पूरी ठाकुर को जननायक मानती रही. अब तो सब मानने लगे हैं, लेकिन एक दौर में उनकी पिछड़ी जाति को लेकर मज़ाक उड़ाया जाता रहा, तुकबंदियां की जाती रहीं.
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जातिवाद ज्यादा खतरनाक है या सांप्रदायिकता?
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नीतीश ने भी लालू यादव के मंडल की काट में जो राजनीति विकसित की, वह जातिगत अस्मिताओं को मज़बूत करने वाली ही थी. उन्होंने बस यह किया कि मंडल के कुछ और टुकड़े कर डाले. पिछड़ों में अतिपिछड़े और दलितों में महादलित खोज निकाले. मुसलमानों में भी अशरफ़ और पसमांदा मुसलमान का फ़र्क किया गया.
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विराट की विदाई का गीत गाने वालो, क्या आप यह सब भूल गए!
- Saturday October 25, 2025
- Reported by: प्रियदर्शन
यह 1983 का साल था, जब सुनील गावस्कर को सलाह दी जाने लगी कि वे क्रिकेट से संन्यास ले लें. 1983 के विश्व कप में भारत के हाथों पराजित और घायल क्लाइव लायड की वेस्ट इंडियन टीम बिल्कुल बदला लेने के इरादे से पांच टेस्ट खेलने भारत आई थी.
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पंकज धीर चले गए, सबको महाभारत का कर्ण याद आया
- Wednesday October 15, 2025
- Written by: प्रियदर्शन
पंकज धीर चले गए. महाभारत का रौबीली मूंछों वाला कर्ण का वह किरदार फिर जिंदा हो गया. धीर ने कई रोल किए, लेकिन वह ताउम्र कर्ण ही रहे. पढ़िए कर्ण की कहानी...
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