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New Labor Codes: देशभर में लागू हुए चारों नए लेबर कोड्स, जानें आपकी सैलरी पर क्या होगा असर
- Saturday May 9, 2026
- Edited by: शुभम उपाध्याय
New Labor Codes:भारत में अब नए लेबर कानून लागू हो गए हैं. इसका मतलब कर्मचारियों के लिए काम से जुड़े नियम अब आसान हो गए हैं.
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दिल्ली, यूपी से लेकर बिहार तक... जानें श्रमिकों को कहां कितना मिलता है पैसा, क्या है न्यूनतम मजदूरी
- Monday April 13, 2026
- Written by: सुभाषिनी त्रिपाठी
जानें 1 अप्रैल 2026 से दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार में कितनी बढ़ी है न्यूनतम मजदूरी. अकुशल से लेकर कुशल मजदूरों के नए रेट्स की पूरी जानकारी यहां पढ़ें.
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New Labour Code लागू होता तो नोएडा में नहीं होता मजदूरों का बवाल, समझिए कैसे ये कानून है 'रामबाण' इलाज
- Monday April 13, 2026
- Written by: निलेश कुमार
New Labor Code लागू होने की प्रक्रिया अभी ट्रांजिशन फेज में है और ये कंपनियां पुराने ढर्रे पर काम कर रही हैं. दो पॉलिसी एक्सपर्ट ने बताया कि यदि कंपनियां 'न्यू लेबर कोड' के प्रावधानों को पूरी ईमानदारी से अपना लें, तो बवाल की नौबत नहीं आएगी.
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लोको पायलट से लेकर डॉक्टर तक, भारत में इन नौकरियों में करना पड़ता है 9 घंटे से ज्यादा काम!
- Saturday March 7, 2026
- Edited by: रितु शर्मा
भारतीय श्रम कानून (Labor Laws) में साफ तौर पर वर्किंग आवर्स का जिक्र है. काननू के अनुसार, साप्ताहिक कार्य सीमा अधिकतम 48 घंटे से अधिक नहीं हो सकती है. प्रतिदिन 8-12 घंटे या प्रति सप्ताह 48 घंटे से अधिक काम करने पर कर्मचारी को ओवरटाइम देने का प्रावधान है.
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छुट्टी मांगना मैनेजर से उसकी किडनी मांगने जैसा...जर्मनी पहुंचे भारतीय इंजीनियर ने क्या देखा कि मुंह खुला रह गया
- Thursday December 4, 2025
- Written by: शालिनी सेंगर
Indian work culture debate: एक इंजीनियर की पोस्ट ने भारत बनाम यूरोप वर्क कल्चर की सच्चाई को दुनिया के सामने खोलकर रख दिया. कभी-कभी एक सोशल मीडिया पोस्ट...लाखों लोगों की अनकही थकान को आवाज दे देती है.
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New Labour Code: वर्क-लाइफ बैलेंस, सोशल सिक्योरिटी और छुट्टियां... आपके जीवन में कितना कुछ बदल जाएगा?
- Wednesday November 26, 2025
- Reported by: NDTV News Desk, Edited by: निलेश कुमार
New Labour Code: सरकार ने नए लेबर कोड के जरिए ऐसा बड़ा बदलाव लाने की कोशिश की है, जिससे कर्मचारियों की दुनिया पूरी तरह बदल सकती है.
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RSS से जुड़े मजदूर संगठन का श्रम मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन, 3 लेबर कोड बिल के खिलाफ जताया विरोध
- Wednesday October 28, 2020
- Reported by: हिमांशु शेखर मिश्र, Edited by: नवीन कुमार
भारतीय मजदूर संघ का आरोप है की सभी लेबर कोड बिल में बदलाव की जो मांग उन्होंने संसद की स्थाई समिति के सामने रखी थी, उसे सरकार ने नजरअंदाज कर दिया.
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श्रम कानूनों पर 3 साल की रोक का मामला हुआ इंटरनेशनल, ILO ने PM मोदी से मामले में दखल की मांग की
- Wednesday May 27, 2020
- Reported by: हिमांशु शेखर मिश्र, Edited by: तूलिका कुशवाहा
लॉकडाउन के दौरान श्रम सुधार और श्रम कानूनों (Labor Laws) को कुछ राज्यों में स्थगित करने पर विवाद उठ रहा है. अब ये मामला संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की एजेंसी इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाइजेशन यानी ILO (International Labor Organization) के कोर्ट में पहुंच गया है.
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Lockdown: तीन राज्यों में हुए श्रम कानून में बदलाव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल
- Thursday May 14, 2020
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: सूर्यकांत पाठक
Lockdown: विदेशी निवेशकों को भारत लाने के मकसद से श्रम कानून में हुए बदलाव का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई है. झारखंड के सोशल एक्टिविस्ट पंकज कुमार यादव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. याचिका में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश ,मध्य प्रदेश, गुजरात सहित अन्य राज्यों में श्रमिकों के कानून को कमजोर और शिथिल बनाने का अध्यादेश जारी हुआ है. श्रम कानून में संशोधन तीन महीने से लेकर तीन वर्षों तक के लिए अलग अलग राज्यों में किया गया है.
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श्रम कानून में बदलाव श्रमिकों के हित में होना चाहिए, उनके अहित में नहीं : मायावती
- Saturday May 9, 2020
- Reported by: भाषा
उन्होंने कहा, ‘इसे बदलकर देश को उसी शोषणकारी युग में ढकेलना क्या उचित है?' बसपा नेता ने कहा, ‘देश में वर्तमान हालात के मद्देनजर श्रम कानून में ऐसा संशोधन करना चाहिए, जिससे खासकर कारखानों/निजी संस्थानों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए वहीं ठहरने आदि की व्यवस्था हो. किसी भी स्थिति में वे भूखे ना मरे और ना ही उन्हें पलायन की मजबूरी हो. ऐसी कानूनी व्यवस्था होनी चाहिए.’
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'दिल्ली सरकार श्रम कानूनों को लागू करने में पूरी तरह विफल रही'
- Friday January 4, 2019
- Reported by: मोहम्मद अतहरुद्दीन मुन्ने भारती
दिल्ली सरकार न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 कानून और दिल्ली के अन्य सभी श्रम कानूनों को लागू करने में पूरी तरह से विफल है, जो दिल्ली के 65 लाख श्रमिकों को उनके मूल वैधानिक अधिकारों से वंचित करते हैं. श्रमिक दयनीय परिस्थितियों में रह रहे हैं.
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New Labor Codes: देशभर में लागू हुए चारों नए लेबर कोड्स, जानें आपकी सैलरी पर क्या होगा असर
- Saturday May 9, 2026
- Edited by: शुभम उपाध्याय
New Labor Codes:भारत में अब नए लेबर कानून लागू हो गए हैं. इसका मतलब कर्मचारियों के लिए काम से जुड़े नियम अब आसान हो गए हैं.
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दिल्ली, यूपी से लेकर बिहार तक... जानें श्रमिकों को कहां कितना मिलता है पैसा, क्या है न्यूनतम मजदूरी
- Monday April 13, 2026
- Written by: सुभाषिनी त्रिपाठी
जानें 1 अप्रैल 2026 से दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार में कितनी बढ़ी है न्यूनतम मजदूरी. अकुशल से लेकर कुशल मजदूरों के नए रेट्स की पूरी जानकारी यहां पढ़ें.
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New Labour Code लागू होता तो नोएडा में नहीं होता मजदूरों का बवाल, समझिए कैसे ये कानून है 'रामबाण' इलाज
- Monday April 13, 2026
- Written by: निलेश कुमार
New Labor Code लागू होने की प्रक्रिया अभी ट्रांजिशन फेज में है और ये कंपनियां पुराने ढर्रे पर काम कर रही हैं. दो पॉलिसी एक्सपर्ट ने बताया कि यदि कंपनियां 'न्यू लेबर कोड' के प्रावधानों को पूरी ईमानदारी से अपना लें, तो बवाल की नौबत नहीं आएगी.
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लोको पायलट से लेकर डॉक्टर तक, भारत में इन नौकरियों में करना पड़ता है 9 घंटे से ज्यादा काम!
- Saturday March 7, 2026
- Edited by: रितु शर्मा
भारतीय श्रम कानून (Labor Laws) में साफ तौर पर वर्किंग आवर्स का जिक्र है. काननू के अनुसार, साप्ताहिक कार्य सीमा अधिकतम 48 घंटे से अधिक नहीं हो सकती है. प्रतिदिन 8-12 घंटे या प्रति सप्ताह 48 घंटे से अधिक काम करने पर कर्मचारी को ओवरटाइम देने का प्रावधान है.
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छुट्टी मांगना मैनेजर से उसकी किडनी मांगने जैसा...जर्मनी पहुंचे भारतीय इंजीनियर ने क्या देखा कि मुंह खुला रह गया
- Thursday December 4, 2025
- Written by: शालिनी सेंगर
Indian work culture debate: एक इंजीनियर की पोस्ट ने भारत बनाम यूरोप वर्क कल्चर की सच्चाई को दुनिया के सामने खोलकर रख दिया. कभी-कभी एक सोशल मीडिया पोस्ट...लाखों लोगों की अनकही थकान को आवाज दे देती है.
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New Labour Code: वर्क-लाइफ बैलेंस, सोशल सिक्योरिटी और छुट्टियां... आपके जीवन में कितना कुछ बदल जाएगा?
- Wednesday November 26, 2025
- Reported by: NDTV News Desk, Edited by: निलेश कुमार
New Labour Code: सरकार ने नए लेबर कोड के जरिए ऐसा बड़ा बदलाव लाने की कोशिश की है, जिससे कर्मचारियों की दुनिया पूरी तरह बदल सकती है.
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RSS से जुड़े मजदूर संगठन का श्रम मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन, 3 लेबर कोड बिल के खिलाफ जताया विरोध
- Wednesday October 28, 2020
- Reported by: हिमांशु शेखर मिश्र, Edited by: नवीन कुमार
भारतीय मजदूर संघ का आरोप है की सभी लेबर कोड बिल में बदलाव की जो मांग उन्होंने संसद की स्थाई समिति के सामने रखी थी, उसे सरकार ने नजरअंदाज कर दिया.
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श्रम कानूनों पर 3 साल की रोक का मामला हुआ इंटरनेशनल, ILO ने PM मोदी से मामले में दखल की मांग की
- Wednesday May 27, 2020
- Reported by: हिमांशु शेखर मिश्र, Edited by: तूलिका कुशवाहा
लॉकडाउन के दौरान श्रम सुधार और श्रम कानूनों (Labor Laws) को कुछ राज्यों में स्थगित करने पर विवाद उठ रहा है. अब ये मामला संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की एजेंसी इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाइजेशन यानी ILO (International Labor Organization) के कोर्ट में पहुंच गया है.
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Lockdown: तीन राज्यों में हुए श्रम कानून में बदलाव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल
- Thursday May 14, 2020
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: सूर्यकांत पाठक
Lockdown: विदेशी निवेशकों को भारत लाने के मकसद से श्रम कानून में हुए बदलाव का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई है. झारखंड के सोशल एक्टिविस्ट पंकज कुमार यादव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. याचिका में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश ,मध्य प्रदेश, गुजरात सहित अन्य राज्यों में श्रमिकों के कानून को कमजोर और शिथिल बनाने का अध्यादेश जारी हुआ है. श्रम कानून में संशोधन तीन महीने से लेकर तीन वर्षों तक के लिए अलग अलग राज्यों में किया गया है.
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श्रम कानून में बदलाव श्रमिकों के हित में होना चाहिए, उनके अहित में नहीं : मायावती
- Saturday May 9, 2020
- Reported by: भाषा
उन्होंने कहा, ‘इसे बदलकर देश को उसी शोषणकारी युग में ढकेलना क्या उचित है?' बसपा नेता ने कहा, ‘देश में वर्तमान हालात के मद्देनजर श्रम कानून में ऐसा संशोधन करना चाहिए, जिससे खासकर कारखानों/निजी संस्थानों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए वहीं ठहरने आदि की व्यवस्था हो. किसी भी स्थिति में वे भूखे ना मरे और ना ही उन्हें पलायन की मजबूरी हो. ऐसी कानूनी व्यवस्था होनी चाहिए.’
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'दिल्ली सरकार श्रम कानूनों को लागू करने में पूरी तरह विफल रही'
- Friday January 4, 2019
- Reported by: मोहम्मद अतहरुद्दीन मुन्ने भारती
दिल्ली सरकार न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 कानून और दिल्ली के अन्य सभी श्रम कानूनों को लागू करने में पूरी तरह से विफल है, जो दिल्ली के 65 लाख श्रमिकों को उनके मूल वैधानिक अधिकारों से वंचित करते हैं. श्रमिक दयनीय परिस्थितियों में रह रहे हैं.
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