अगर आप Android फोन चलाते हैं तो खुश हो जाइए, क्योंकि अब आपका फोन पहले से और तेज होने वाला है. इसकी शुरुआत की है Google ने, जो एक नई तकनीक ला रहा है. इसकी मदद से Android स्मार्टफोनों को और तेज, ज्यादा स्मूथ और ज्यादा बैटरी-एफिशिएंट बनाया जाएगा.
इस नई तकनीक को Automatic Feedback-Directed Optimisation (AutoFDO) कहा जाता है. इसके जरिए Google Android सिस्टम को उसके सबसे महत्वपूर्ण हिस्से यानी कर्नेल (Kernel) के स्तर पर बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है. कंपनी का मानना है कि इस बदलाव से फोन में ऐप जल्दी खुलेंगे, फोन ज्यादा स्मूथ लगेगा और बैटरी का इस्तेमाल भी पहले से ज्यादा बेहतर तरीके से होगा.

AutoFDO तकनीक कैसे काम करती है?
नई AutoFDO तकनीक एक खास तरीके से Android सिस्टम को बेहतर बनाती है. इसके लिए Google पहले लैब में कई तरह के टेस्ट करता है. टेस्ट के दौरान यह देखा जाता है कि लोग फोन में कौन-सी ऐप्स सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं और सिस्टम का कौन-सा हिस्सा सबसे ज्यादा काम करता है. इन हिस्सों को तकनीकी भाषा में 'Hot Code Paths' कहा जाता है.
जब यह जानकारी मिल जाती है कि सिस्टम के कौन-से हिस्से सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहे हैं, तब AutoFDO उसी हिसाब से सिस्टम को दोबारा मैनेज करता है. इससे जो कोड सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है, उसे पहले और बेहतर तरीके से चलाया जाता है. इससे फोन की स्पीड बढ़ जाती है.
Android Kernel क्या होता है और क्यों जरूरी है
Android सिस्टम में Kernel एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. यह फोन के हार्डवेयर, प्रोसेसर और ऐप्स के बीच एक पुल की तरह काम करता है यानी जब भी आप किसी ऐप को खोलते हैं, गेम खेलते हैं या इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं, तो Kernel ही इन सभी चीजों को आपस में जोड़कर काम करवाता है.
Google के अनुसार Android फोन में लगभग 40 प्रतिशत CPU समय Kernel द्वारा उपयोग किया जाता है. इसका मतलब यह है कि अगर Kernel की परफॉर्मेंस में थोड़ा सा भी सुधार किया जाए तो पूरे फोन की स्पीड बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है. AutoFDO तकनीक को धीरे-धीरे Android के नए Kernel वर्ज़न में शामिल किया जा रहा है. इसमें android16-6.12 और android15-6.6 जैसे नए वर्ज़न शामिल हैं.
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