AI को लेकर अभी काफी बातें चल रही हैं. इससे नौकरियों के जाने के खतरे भी आने वाले हैं. इसके बारे में Incedo के CEO नितिन सेठ ने भी खुलकर अपनी बात रखी. मौका था उनकी बेस्टसेलर किताब "Human Edge in the AI Age" के हिंदी वर्जन AI युग में मानवीय श्रेष्ठता लॉन्च का. साथ उन्होंने इस कार्यक्रम में NitinSeth.AI नामक एक नए जेन-AI(GenAI) कन्वर्सेशनल असिस्टेंट चैटबॉट की भी शुरुआत की.
आपको बता दें कि उनकी बुक Mastering the Data Paradox इस बात पर आधारित है कि कंपनियां डेटा के विस्फोट की चुनौतियों का सामना करते हुए डेटा और AI की परिवर्तनकारी वैल्यू का उपयोग कैसे कर सकती हैं. उनकी ये तीसरी और नई बुक एक अधिक बुनियादी सवाल उठाती है- जैसे-जैसे AI अधिक सक्षम हो रहा है और तेजी से इंसानी क्षमताओं की नकल कर रहा है, वैसे में मनुष्य के पास ऐसा क्या बचता है जो खासतौर से केवल मानवीय है?
क्या AI आपकी नौकरी छीन लेगा?
पत्रकारों से बातचीत करते हुए सेठ ने एक रिसर्च का हवाला दिया. जिसमें अनुमान लगाया गया है कि अगले 15 वर्षों में AIके कारण लगभग 35 प्रतिशत नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं. जिसमें व्हाइट-कॉलर नौकरियां सबसे अधिक प्रभावित होंगी. उन्होंने सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट को आज सबसे ज्यादा असुरक्षित और प्रभावित होने वाले पेशे के रूप में बताया. यह केवल दो साल पहले की स्थिति से बिल्कुल विपरीत है, जब कंप्यूटर साइंस को ग्रेजुएट्स के लिए सबसे सुरक्षित ऑप्शन माना जाता था.
उन्होंने कहा, "आज दुनिया का अधिकांश कोड साधारण अंग्रेजी भाषा के प्रॉम्प्ट्स के माध्यम से खुद जेनरेट किया जा रहा है." उनके अनुसार, इसके बाद ऑपरेशन्स और ग्राहक सहायता की नौकरियां सबसे अधिक प्रभावित होंगी. इसके बाद कानून, निवेश बैंकिंग और कंसल्टिंग जैसे रिसर्च जैसे काम प्रभावित होंगे.
बदलाव एक अवसर
नितिन सेठ ने इस बड़े बदलाव को केवल एक खतरे के बजाय एक बेहतरीन अवसर के रूप में पेश किया. उन्होंने तर्क दिया कि जब बदलाव धीरे-धीरे होता है, तो स्थापित और पुरानी कंपनियां जीतती हैं. लेकिन जब बदलाव बहुत बड़ा और विनाशकारी होता है, तो बाहरी लोग आगे आते हैं. यही वह बदलाव है जो नए स्टार्टअप्स और एंटरप्रेनेयोरशिप के लिए सबसे फ्रेंडली माहौल तैयार करता है.
उनके शब्दों में, AI युग नौकरियों के युग के अंत को दर्शाता है, लेकिन इससे भी जरूरी बात यह है कि ये एंटरप्रोन्योरशिप के युग की शुरुआत है. खासतौर पर भारत पर बात करते हुए, सेठ ने कहा कि देश का Sovereign AI पर भारी निवेश करना बेहद जरूरी तो है, लेकिन यह वास्तविक चुनौती के केवल एक छोटे से हिस्से को हल करता है.

उन्होंने कहा, "सॉवरेन AI नौकरियां पैदा करने वाला नहीं है." उन्होंने इसके प्रमाण के रूप में Anthropic का उदाहरण दिया, जो लगभग 4000 कर्मचारियों के साथ करीब 70 अरब डॉलर का रेवन्यू जनरेट कर रही है. उन्होंने नोट किया कि इतने कम कर्मचारी उनकी खुद की कंपनी Incedo के हेडकाउंट के काफी करीब हैं, जो ये दिखाता है कि मुख्य AI कंपनियों को इतनी भारी वैल्यू बनाने के लिए कितने कम लोगों की आवश्यकता होती है.
सेठ ने कहा कि भारतीय स्टार्टअप्स के लिए अब पूंजी कोई बाधा नहीं रह गई है, क्योंकि निवेशकों के पास इस समय जरूरत से ज्यादा फंडिंग मौजूद है. उनके मूल्यांकन के अनुसार, भारत में स्टार्टअप्स के पास पैसे की कमी नहीं है, बल्कि 'गहराई' की कमी है. कई युवा संस्थापकों के पास एंटरप्रोन्योरशिप की एनर्जी तो है, लेकिन उनके विचार काफी सतही हैं.
आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) ने हाल ही में OpenAI के सैम ऑल्टमैन और एंथ्रोपिक के डारियो अमोदेई द्वारा AI के स्वतंत्र एजेंट बनने के खतरे पर जताई गई चिंताओं का समर्थन करते हुए सेठ ने कहा, "अगर AI खुद स्वतंत्र रूप से काम करने लगा, तो इसका सीधा मतलब होगा कि AI बिना किसी इंसानी कंट्रोल के खुद नया AI डेवलप करेगा. वह मंजर सचमुच देखने लायक होगा."
उन्होंने AI को अपनाने की जल्दबाजी और बाजार के धैर्य के बीच बढ़ते अंतर की ओर भी इशारा किया. उन्होंने नोट किया कि इस साल की शुरुआत में सॉफ्टवेयर और तकनीकी शेयरों में भारी गिरावट के बाद, जिसमें 'S&P 500 सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज इंडेक्स' ने लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर की मार्केट वैल्यू खो दी थी, कंपनियों पर अब यह साबित करने का भारी दबाव है कि AI में किया जाने वाला भारी निवेश केवल इस्तेमाल तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे लाभ भी मिल रहा है.
ये भी पढ़ें- इंसानों के काबू से बाहर भागा Google Gemini, 3 कंपनियों को कर लिया हैक, दुनियाभर में हड़कंप
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं