अमेरिका की मशहूर Princeton University अब अपनी 133 साल पुरानी परीक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है. यूनिवर्सिटी ने फैसला लिया है कि अब सभी इन-पर्सन एग्जाम्स में इनविजिलेटर यानी निगरानी करने वाले शिक्षक मौजूद रहेंगे. यह फैसला AI टूल्स की मदद से बढ़ती चीटिंग और अकादमिक बेईमानी की चिंताओं के कारण लिया गया है.
प्रिंसटन यूनिवर्सिटी की यह पुरानी व्यवस्था दुनिया भर में काफी प्रसिद्ध थी क्योंकि यहां छात्र बिना किसी निगरानी के परीक्षा देते थे. लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में यूनिवर्सिटी को लगने लगा है कि सिर्फ भरोसे के आधार पर परीक्षा कराना मुश्किल होता जा रहा है.

क्या था प्रिंसटन का Honor Code सिस्टम?
प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में साल 1893 से 'Honor Code' नाम की एक खास परीक्षा व्यवस्था लागू थी. इसके तहत छात्र परीक्षा हॉल में बिना प्रोफेसर या इनविजिलेटर की निगरानी के परीक्षा देते थे. छात्रों से उम्मीद की जाती थी कि वे ईमानदारी से परीक्षा देंगे और किसी तरह की चीटिंग नहीं करेंगे.
हर परीक्षा से पहले छात्रों को एक प्रतिज्ञा भी लिखनी होती थी कि उन्होंने परीक्षा के दौरान Honor Code का उल्लंघन नहीं किया है. अगर किसी छात्र पर चीटिंग का आरोप लगता था, तो उसकी जांच और कार्रवाई छात्रों की ही एक कमेटी करती थी.
इस व्यवस्था के पीछे यूनिवर्सिटी की सोच यह थी कि अगर छात्रों पर भरोसा किया जाए, तो वे जिम्मेदारी और ईमानदारी से व्यवहार करना सीखेंगे. यूनिवर्सिटी का मानना था कि छात्रों को पहले से बेईमान मानना गलत संदेश दे सकता है.
AI टूल्स ने बदल दी पूरी स्थिति
कई दशकों तक यह सिस्टम सफल माना जाता रहा. दो विश्व युद्ध, इंटरनेट का दौर और शिक्षा व्यवस्था में कई बदलाव आने के बाद भी यह परंपरा जारी रही. लेकिन अब AI टूल्स ने स्थिति पूरी तरह बदल दी है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक 2022 के आखिर में जनरेटिव AI टूल्स आने के बाद से यूनिवर्सिटी में चीटिंग के मामले बढ़ने लगे. खासतौर पर ChatGPT जैसे AI टूल्स ने छात्रों के लिए असाइनमेंट और परीक्षा में गलत तरीके से मदद लेना आसान बना दिया.
चीटिंग के मामलों में बढ़ोतरी
यूनिवर्सिटी की अनुशासन समिति के अनुसार 2024-25 शैक्षणिक वर्ष में 82 छात्रों को अकादमिक नियम तोड़ने का दोषी पाया गया. वहीं, 2021-22 में यह संख्या 50 थी. अधिकारियों का मानना है कि असली संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है क्योंकि कई मामलों का पता ही नहीं चल पाता.
यूनिवर्सिटी के छात्र अखबार द्वारा किए गए एक सर्वे में भी चौंकाने वाली बातें सामने आईं. 501 छात्रों में से लगभग 30 प्रतिशत छात्रों ने माना कि उन्होंने कभी न कभी चीटिंग की है. करीब 28 प्रतिशत छात्रों ने स्वीकार किया कि उन्होंने ऐसे असाइनमेंट में ChatGPT का इस्तेमाल किया जहां इसकी अनुमति नहीं थी.
इसके अलावा 45 प्रतिशत छात्रों ने कहा कि उन्हें किसी सहपाठी की चीटिंग के बारे में पता था, लेकिन उन्होंने इसकी शिकायत नहीं की.

अब परीक्षा हॉल में मौजूद रहेंगे शिक्षक
नई नीति के अनुसार अब परीक्षा के दौरान शिक्षक या इनविजिलेटर हॉल में मौजूद रहेंगे. अगर किसी छात्र द्वारा नियम तोड़े जाते हैं, तो उसकी रिपोर्ट सीधे Honor Committee को भेजी जाएगी.
हालांकि यूनिवर्सिटी पूरी तरह अपनी पुरानी परंपरा खत्म नहीं कर रही है. छात्रों को अब भी परीक्षा से पहले वही पुरानी प्रतिज्ञा लिखनी होगी कि उन्होंने परीक्षा के दौरान Honor Code का उल्लंघन नहीं किया है.
भरोसे के साथ अब निगरानी भी जरूरी
प्रिंसटन यूनिवर्सिटी का यह फैसला दिखाता है कि AI तकनीक शिक्षा व्यवस्था को किस तरह बदल रही है. पहले जहां सिर्फ भरोसे के आधार पर परीक्षाएं कराई जाती थीं, अब वहां तकनीक के कारण अतिरिक्त निगरानी जरूरी हो गई है.
यह बदलाव सिर्फ प्रिंसटन तक सीमित नहीं माना जा रहा. दुनियाभर की यूनिवर्सिटीज अब AI की वजह से परीक्षा प्रणाली और अकादमिक ईमानदारी को लेकर नए नियम बनाने पर विचार कर रही हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं