पूर्व मुख्य चयनकर्ता दिलीप वेंगसरकर का मानना है कि हाल में अच्छे प्रदर्शन के बाद भारतीय क्रिकेटर आत्ममुग्धता का शिकार हो गए।
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मुंबई:
पूर्व भारतीय कप्तान और पूर्व मुख्य चयनकर्ता दिलीप वेंगसरकर का मानना है कि हाल में अच्छे प्रदर्शन के बाद भारतीय क्रिकेटर आत्ममुग्धता का शिकार हो गए और इंग्लैंड के खिलाफ मौजूदा टेस्ट श्रृंखला में यही टीम के खराब प्रदर्शन का अहम कारण है। वेंगसरकर का साथ ही मानना है कि टीम को इंग्लैंड की मजबूत टीम के खिलाफ तैयारी करने का बेहद कम समय मिला। श्रृंखला के पहले दो टेस्ट देखने इंग्लैंड गए वेंगसरकर के साक्षात्कर के अहम अंश। प्रश्न: क्या आपने भारतीय टीम के इतने खराब प्रदर्शन की उम्मीद की थी। टीम के खराब प्रदर्शन का क्या कारण है जिसने सिर्फ चार महीने पहले विश्व कप खिताब जीता था। वेंगसरकर: ईमानदारी से कहूं तो मुझे पता था कि यह भारत के लिए मुश्किल श्रृंखला होने वाली है क्योंकि उन्हें एक मजबूत टीम का सामना करना था जो लय में है और हाल के समय में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही थी। इसके अलावा उनका गेंदबाजी आक्रमण बेहतर था और एक टीम के रूप में उन्हें श्रृंखला की तैयारी का काफी समय मिला। दूसरी तरफ भारत वेस्टइंडीज में व्यस्त श्रृंखला खेलने के बाद पहुंचा और उन्हें इंग्लैंड की परिस्थितियों के मुताबिक तैयारी करने और लय में आने का काफी कम समय मिला। मुझे लगता है कि भारत पिछले कुछ सत्र में अच्छे प्रदर्शन के बाद आत्ममुग्धता का शिकार हो गया। प्रश्न: क्या आपको लगता है कि एक गेंदबाज जहीर खान पर अधिक निर्भरता टीम के लिए अच्छी नहीं है। उत्तर: क्या और कोई विकल्प मौजूद है? हमें स्वीकार करना होगा कि हमारे पास बल्लेबाजी या गेंदबाजी में अधिक विकल्प नहीं हैं विशेषकर जब हम मजबूत विरोधी का सामना करते हैं। हम परखे हुए खिलाड़ियों पर निर्भर हैं फिर भले ही वे चोट के बाद वापसी कर रहे हों और उन्हें अधिक मैच अभ्यास नहीं हो। आप इस तरह प्रतिस्पर्धा पेश नहीं कर सकते। अधिक खिलाड़ी सहज स्थिति में हैं और उन्हें अच्छी तरह पता है कि शीर्ष स्तर पर उनके लिए प्रतिस्पर्धा नहीं है। प्रश्न: टीम को इंग्लैंड में कहां परेशानी हुई। क्या लार्डस टेस्ट से पहले उसे और अ5यास मैच खेलने चाहिए थे। उत्तर: जब टीम एशिया से बाहर जा रही हो तो यह काफी अहम है कि पहले टेस्ट मैच से पूर्व परिस्थितियों से सामंजस्य बैठाने के लिए उसे पर्याप्त मैच अभ्यास मिले। वेस्टइंडीज से लेकर इंग्लैंड तक हालात काफी अलग हैं। श्रृंखला का पहला टेस्ट अधिकांश समय हारने वाली टीम का श्रृंखला में भाग्य तय कर देता है। इससे टीम का मनोबल गिरता है और असाधारण प्रदर्शन किये बिना इससे नहीं उबरा जा सकता। प्रश्न: जब आप वहां थे तो क्या धोनी की कप्तानी से खुश थे। या आपको लगा कि क्षेत्ररक्षकों को लेकर वह बेहतर कर सकता था। उत्तर: कप्तान क्या कर सकता है जब मुख्य गेंदबाज चोटों से जूझ रहे हों और अहम कैच टपकाए जा रहे हों। उसने लार्डस में अपने विकेटकीपिंग ग्लव्स छोड़कर गेंदबाजी करके यह स्पष्ट कर दिया था। प्रश्न: राहुल द्रविड़ ने पहले दो टेस्ट में बेहतरीन बल्लेबाजी की और शुरूआत में वीवीएस लक्ष्मण ने भी। सचिन तेंदुलकर ने भी अपने स्तर की झलक दिखाई। क्या आपको लगता है कि समय आ गया है कि इन दिग्गजों के जाने के बाद टीम के भविष्य के बारे में विचार किया जाये और रोहित शर्मा तथा विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों को तैयार किया जाये। उत्तर: बेशक। चयनकर्ताओं का काम ही प्रतिभा की पहचान करके उसे निखारना है। उन्हें भविष्य की योजना दिखानी चाहिए। अंतिम एकादश कोई भी चुन सकता है लेकिन विकल्पों का क्या होगा। समस्या यहीं पर है। रोहित और विराट से आगे भी खिलाड़ियों को ढूंढने की जरूरत है। जब तक आप जीत रहे हों तब तक सब कुछ ठीक है लेकिन किसी भी नतीजे के लिए तैयार रहना चाहिए।
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