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This Article is From Apr 22, 2015

'टॉप्स' को लेकर खड़े हो रहे हैं सवाल, रियो ओलिंपिक्स में भारतीय एथलीटों से कैसी उम्मीद?

'टॉप्स' को लेकर खड़े हो रहे हैं सवाल, रियो ओलिंपिक्स में भारतीय एथलीटों से कैसी उम्मीद?
नई दिल्ली: रियो ओलिंपिक्स खेलों के शुरू होने में सिर्फ़ 16 महीने बाक़ी हैं। अगले साल 5 से 21 अगस्त तक रियो में होने वाले 31वें ओलिंपिक खेलों के लिए भारतीय खेल तंत्र में भी आकलन और तैयारी को अंजाम देने की कवायद शुरू हो गई है। खेल मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा है कि टॉप्स यानी टारगेट ओलिंपिक पोडियम स्कीम के तहत 45 खिलाड़ियों को आर्थिक तौर पर मदद दी जाएगी, जिनसे रियो ओलिंपिक में बड़ी उम्मीद भी की जाएगी।

इन 45 खिलाड़ियों के लिए 30 करोड़ रुपये की राशि के सहारे मदद दी जाएगी। खेल मंत्री ने ये भी कहा कि 30 और खिलाड़ियों को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा। ये खिलाड़ी एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बॉक्सिंग, शूटिंग, कुश्ती, सेलिंग और तीरंदाज़ी जैसे खेलों में अपनी किस्मत आज़माएंगे।

खेल मंत्रालय के इस टॉप्स प्रोजेक्ट को लेकर आलोचनाएं भी शुरू हो गई हैं। ख़ासकर खिलाड़ियों के चुनाव के तरीके को लेकर, बैडमिंटन स्टार ज्वाला गुट्टा से लेकर शूटिंग कोच जसपाल राणा तक ने सवाल उठाए हैं। टॉप्स योजना के तहत बीजिंग ओलिंपिक के स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिन्द्रा को क़रीब एक करोड़ दस लाख रुपये मिलेंगे, जबकि लंदन ओलिंपिक्स की कांस्य पदक विजेता मुक्केबाज़ एमसी मैरीकॉम को 75 लाख रुपये मिलेंगे।

कमाल की बात ये है कि अभिनव बिन्द्रा और एमसी मैरीकॉम उस समिति का हिस्सा हैं जिन्हें रियो ओलिंपिक्स के लिए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को चुनना है। इसे कॉन्फ़्लिक्ट ऑफ़ इंटरेस्ट यानी हितों के टकराव के तौर पर भी देखा जा रहा है। इसके अलावा बैडमिंटन कोच पुलेला गोपीचंद, पूर्व लॉन्ग जम्पर ओलिंपियन अंजू बॉबी जॉर्ज और खेल मंत्री भी टॉप्स (TOPS- टारगेट ओलिंपिक पोडियम स्कीम) का हिस्सा हैं। पूर्व चैंपियन पिस्टल शूटर जसपाल राणा कहते हैं कि उन खिलाड़ियों को इस कमेटी का हिस्सा नहीं होना चाहिए, जिन्हें खुद भी इसका फ़ायदा पहुंच सकता है।

यानी ओलिंपिक की तैयारी से पहले ही सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं। जैसे-जैसे ओलिंपिक खेल नज़दीक आएंगे ये सवाल बड़े होते जाएंगे। ज़ाहिर है विवादों को भी हवा ज़रूर मिलेगी। ऐसे में भारत लंदन ओलिंपिक्स (2 रजत और चार कांस्य के साथ कुल 6 पदक) से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद के साथ कैसे रियो के मैदान पर उतरेगा ये सवाल अभी से ही सबके सामने खड़ा हो गया है।

बिन्द्रा का पक्ष
हितों के टकराव को लेकर पूर्व ओलिंपिक चैंपियन अभिनव बिन्द्रा ने अनुराग ठाकुर को ईमेल के ज़रिये पहले ही
सूचित किया और कहा कि वो खुद भी रियो 2016 की तैयारी कर रहे हैं। इसलिए खिलाड़ियों की चुनाव समिति में उनका होना सीधे तौर पर हितों के टकराव का मसला बन सकता है। उन्होंने कहा कि वो चाहते हैं कि इस 'टॉप्स' में सकारात्मक और पारदर्शी तरीके से योगदान दें। लेकिन उन्होंने कहा कि उनकी ईमानदारी को लेकर सवाल नहीं खड़े किये जाएं। ये भी सही है कि बिन्द्रा के नाम के चयन के वक्त वो इस समिति का हिस्सा नहीं थे।

खेल सचिव अजित शरण ने कहा कि अभिनव बिन्द्रा और एमसी मैरीकॉम पर सवाल खड़े करना सही नहीं है। उनका कहना है कि इन खिलाड़ियों का कद बहुत बड़ा है और इनकी ईमानदारी को लेकर सवाल नहीं खड़े किए जा सकते। खेल सचिव ने ये भी बताया कि खिलाड़ियों के चुनने की प्रक्रिया एक रिसर्च के आधार पर की गई है।

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