खेल मंत्री अजय माकन ने निशा रानी दत्ता का मिट्टी से बने अपने घर की मरम्मत करने के लिए अपना विश्वस्तरीय धनुष बेचने की घटना को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार देते हुए कहा कि इस स्वर्ण पदक विजेता तीरंदाज की हर तरह से मदद की जाएगी।
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नई दिल्ली:
खेल मंत्री अजय माकन ने निशा रानी दत्ता का मिट्टी से बने अपने घर की मरम्मत करने के लिए अपना विश्वस्तरीय धनुष बेचने की घटना को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार देते हुए कहा कि इस स्वर्ण पदक विजेता तीरंदाज की हर तरह से मदद की जाएगी।
बेहद गरीबी के कारण बैकाक ग्रां प्री की पदक विजेता दत्ता ने तीरंदाजी के अपने उपकरण चार लाख रुपये में बेच दिये। माकन ने यहां 60वें अखिल भारतीय पुलिस खेलों (कुश्ती) के समापन समारोह के अवसर पर पत्रकारों से कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। भारतीय खेल प्राधिकरण के जरिये मुझे इस घटना का पता चला। हम इस खिलाड़ी की हर संभव मदद करेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘राज्य सरकार को इस तरह की वित्तीय मदद चाहने वाली खिलाड़ियों को नौकरी देने के पूरे प्रयास करने चाहिए। कोई भी खिलाड़ी जो किन्हीं कारणों से राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नहीं खेल पाते हैं, उनके लिए राज्य सरकारों को रोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि वे खुद को नजरअंदाज नहीं समझें।’
विश्वस्तरीय धनुष एक लाख से अधिक रुपये का आता है जबकि 20 तीरों वाले तरकश की कीमत 20 हजार रुपये होती है। झारखंड के जमशेदपुर जिले के पदमादा गांव की रहने वाली 21 वर्षीय रानी ने टाटा तीरंदाजी अकादमी में प्रशिक्षण लिया और अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिपों में स्वर्ण पदक जीते लेकिन गरीबी के कारण वह इस खेल से अलग हो गई।
बेहद गरीबी के कारण बैकाक ग्रां प्री की पदक विजेता दत्ता ने तीरंदाजी के अपने उपकरण चार लाख रुपये में बेच दिये। माकन ने यहां 60वें अखिल भारतीय पुलिस खेलों (कुश्ती) के समापन समारोह के अवसर पर पत्रकारों से कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। भारतीय खेल प्राधिकरण के जरिये मुझे इस घटना का पता चला। हम इस खिलाड़ी की हर संभव मदद करेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘राज्य सरकार को इस तरह की वित्तीय मदद चाहने वाली खिलाड़ियों को नौकरी देने के पूरे प्रयास करने चाहिए। कोई भी खिलाड़ी जो किन्हीं कारणों से राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नहीं खेल पाते हैं, उनके लिए राज्य सरकारों को रोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि वे खुद को नजरअंदाज नहीं समझें।’
विश्वस्तरीय धनुष एक लाख से अधिक रुपये का आता है जबकि 20 तीरों वाले तरकश की कीमत 20 हजार रुपये होती है। झारखंड के जमशेदपुर जिले के पदमादा गांव की रहने वाली 21 वर्षीय रानी ने टाटा तीरंदाजी अकादमी में प्रशिक्षण लिया और अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिपों में स्वर्ण पदक जीते लेकिन गरीबी के कारण वह इस खेल से अलग हो गई।
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