कार्तिकेयन ने हिस्पेनिया टीम की कार चलाते हुए दूसरे दिन एक लैप पूरा करने के लिए एक मिनट 17.769 सेकेंड का समय लिया।
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वेलेंसिया (स्पेन):
वर्ष 2005 के बाद फार्मूला वन सर्किट में वापसी कर रहे भारतीय कार चालक नारायण कार्तिकेयन ने नए सत्र से पूर्व आयोजित परीक्षण सत्र के दूसरे दिन बेहतर प्रदर्शन किया है। इस सत्र के पहले दिन कार्तिकेयन ने 12वां स्थान हासिल किया था। कार्तिकेयन ने हिस्पेनिया टीम की कार चलाते हुए दूसरे दिन एक लैप पूरा करने के लिए एक मिनट 17.769 सेकेंड का समय लिया जबकि पहले दिन 13 चालकों के परीक्षण सत्र में एक लैप पूरा करने के लिए उन्होंने एक मिनट 18.020 सेकेंड समय लिया था। भारत के पहले फार्मूला वन चालक बनने का गौरव हासिल करने वाले चेन्नई में जन्मे 34 वर्षीय कार्तिकेयन ने अपनी टीम की 2010 मॉडल कार में 4.0005 किलोमीटर के रिकाडरे टोरमो सर्किट के 80 चक्कर लगाए। इस तरह कार्तिकेयन ने कार के साथ तालमेल बनाते हुए 320 किलोमीटर की दूरी तय की। स्पेन की हिस्पेनिया टीम बीते सत्र में परीक्षण नहीं कर सकी थी। इस टीम ने 2010 में पहली बार एफ-1 सर्किट में हिस्सा लिया था। इस टीम ने नए सत्र के लिए ब्रिजस्टोन टायरों का उपयोग करने का फैसला किया है जबकि बीते सत्र में इसने पिरेल्ली टायरों की मदद से अपने लिए महत्वपूर्ण आंकड़े जमा किए थे। एफ-1 सर्किट में अपनी वापसी और पहले परीक्षण सत्र को लेकर कार्तिकेयन ने कहा, "मेरे लिए नई कार चलाना आसान नहीं था लेकिन यह काम इतना कठिन भी नहीं लगा। पहले दिन थोड़ी दिक्कत हुई लेकिन दूसरे दिन मैं कार के प्रदर्शन से संतुष्ट हूं।" कार्तिकेयन ने वर्ष 2005 में अंतिम बार फार्मूला वन सर्किट में हिस्सा लिया था। इसके पांच वर्ष बाद हिस्पेनिया फार्मूला वन टीम ने उन्हें अपने साथ जोड़ने की घोषणा की थी। एफ-1 सर्किट में वापसी को देखते हुए कार्तिकेयन ने खुद को मानसिक और शारीरिक तौर पर पूरी तरह फिट रखा है। नई टीम के साथ उनका तालमेल भी बढ़िया दिख रहा है। टीम के प्रमुख कोलिन कोल्स ने कहा, "कार्तिकेयन दूसरे दिन के परीक्षण में प्रभावित करने में सफल रहे। हमारे लिए समय महत्वपूर्ण नहीं है। हम रेस के लिए जरूरी आंकड़े जमा कर रहे हैं। कार्तिकेयन ने 80 लैप पूरे किए। यह दूरी पहले दिन की तुलना में दोगुनी है। मैं इस विकास से काफी खुश हूं। मुझे यकीन है कि हम लगातार सुधार करेंगे।"