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This Article is From Mar 30, 2011

पाक को पटखनी, अब श्रीलंका से आखिरी भिड़ंत

मोहाली में विश्व कप क्रिकेट के रोमांचक सेमीफाइनल मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान को 29 रन से पराजित कर फाइनल में जगह पक्की कर ली।
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मोहाली: बल्लेबाजी में भाग्य और गेंदबाजी में अनुशासन के अनोखे मिश्रण से भारत ने बुधवार को चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को विश्व कप 2011 के महामुकाबले में 29 रन से चित करके सह मेजबान श्रीलंका से खिताबी मुकाबले में भिड़ने का हक पाया। क्रिकेट कूटनीति का गवाह बना यह मैच दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों और कई दिग्गज हस्तियों ने भी देखा। महेंद्र सिंह धोनी के रणबांकुरों ने मनमोहन सिंह और उनकी टीम में खूब जोश भरा और पाकिस्तान पर विश्व कप में अपना शत-प्रतिशत रिकॉर्ड बरकरार रखा। भारत तीसरी बार फाइनल में पहुंचा है। 1983 के चैंपियन को दूसरी बार खिताब जीतने के लिए अब 2 अप्रैल को मुंबई में श्रीलंकाई चुनौती तोड़नी होगी। पीसीए स्टेडियम में भाग्य भारत के साथ था। सचिन तेंदुलकर ने चार जीवनदान और रेफरल का फायदा उठाकर 115 गेंद पर 85 रन बनाए। वीरेंद्र सहवाग (38) ने टीम को तूफानी शुरुआत दिलाई, लेकिन वहाब रियाज (46 रन देकर पांच विकेट) के झटकों से रन गति धीमी पड़ गई। सुरेश रैना ने आखिर में 36 रन की अच्छी पारी खेली, जिससे भारत ने नौ विकेट पर 260 रन का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया। मैच में गेंदबाजों ने अंतर पैदा किया। भारतीय गेंदबाजों ने बेहद अनुशासित खेल दिखाया और नियमित अंतराल में विकेट लेकर पाकिस्तान को बड़ी साझेदारी नहीं निभाने दी। मिस्बाह उल हक ने 76 गेंद पर 56 रन बनाए पर पाकिस्तान 49.5 ओवर में 231 रन ही बना पाया। भारत की तरफ से पांचों गेंदबाजों-  जहीर खान, आशीष नेहरा, मुनाफ पटेल, हरभजन सिंह और युवराज सिंह ने दो-दो विकेट लिए। भारत को सहवाग ने तूफानी शुरुआत दिलाई और तब लग रहा था कि टीम 300 रन के पार पहुंचेगी, लेकिन बीच में नियमित अंतराल में विकेट गंवाने से रन गति धीमी पड़ी। आलम यह था कि एक समय 15 ओवर तक गेंद सीमा रेखा के पार ही नहीं गई। सहवाग ने फिर से चौका जड़कर खाता खोला। उनके निशाने पर उमर गुल थे, जिनके खिलाफ उन्होंने 19 गेंद पर आठ चौके जमाकर पाकिस्तानी आक्रमण को थर्रा दिया। उन्होंने गुल के दूसरे ओवर में पांच चौके जड़कर स्ट्रोक प्ले का बेमिसाल नजारा पेश किया, लेकिन जैसे ही वह चूके, आउट हो गए। रियाज की पहले ओवर में ही मिडिल और लेग स्टंप पर पिच की गई गेंद उन्हें पगबाधा कर गई और रेफरल भी उनके खिलाफ गया। तेंदुलकर का भाग्य ने पूरा साथ दिया। उन्होंने अपनी कलात्मकता और प्लेसमेंट का अच्छा नजारा पेश किया, लेकिन इस बीच छह बार वह पैवेलियन जाने से बचे। तेंदुलकर जब 23 रन पर थे तो अंपायर इयान गोल्ड ने अजमल की अपील पर उन्हें पगबाधा दे दिया था। गेंद लाइन में थी, लेकिन रीप्ले से लग रहा था कि वह लेग स्टंप छोड़ रही थी। गोल्ड को फैसला बदलना पड़ा। अगली गेंद पर स्टम्पिंग की अपील पर तेंदुलकर को संदेह का फायदा मिला। मास्टर ब्लास्टर को इसके बाद 27 रन पर मिस्बाह, 45 रन पर यूनुस खान और 70 रन पर कामरान अकमल ने जीवनदान दिया। तीनों अवसरों पर दुर्भाग्यशाली गेंदबाज आफरीदी रहे। तेंदुलकर जब 81 रन पर थे, तब मोहम्मद हफीज की गेंद पर उमर अकमल ने उनका कैच टपकाया। इस बीच दूसरे छोर पर लगातार तीन विकेट गिरने से भी तेंदुलकर पर दबाव बना। गंभीर कुछ आकर्षक शॉट लगाने के बाद हफीज की फ्लाइट लेती गेंद पर चूक गए और बाकी काम विकेटकीपर ने पूरा कर दिया, लेकिन वह रियाज थे, जिन्होंने भारतीयों को हिला कर रखा। मैच के 26वें ओवर में पासा पलटा। रियाज ने तब विराट कोहली :9: और युवराज को लगातार गेंद पर आउट किया। तालियों की गूंज के साथ क्रीज पर कदम रखने वाले युवराज थोड़ी सी स्विंग लेती नीची रहती फुलटास पर बोल्ड हुए। दर्शकों का दिल टूट गया। उनकी धड़कने बढ़ गई थी। धोनी ने रियाज की हैट्रिक नहीं बनने दी, लेकिन भारतीय टीम दबाव में आ चुकी थी और पाकिस्तानी गेंदबाजी हावी हो गये थे। आलम यह था कि 30वें ओवर के बाद गेंद को सीमा रेखा के दर्शन करने के लिए 45वें ओवर तक का इंतजार करना पड़ा और इस बीच टीम ने तेंदुलकर और धोनी के विकेट गंवाए। धोनी को भी जीवनदान मिला लेकिन वह इसका फायदा नहीं उठा पाये। रियाज की गेंद पर कामरान ने उनका कैच छोड़ा लेकिन इसी ओवर में भारतीय कप्तान पगबाधा आउट हो गये। रेफरल भी धोनी को नहीं बचा पाया। गुल ने अपने पहले चार ओवर में 41 रन दिये थे और बाद में भी उनकी नहीं चली। बल्लेबाजी पावरप्ले के पहले ओवर में रैना ने उन पर तीन चौके जड़े । इस बीच दूसरा के धनी हरभजन सिंह (12) को अजमल ने दूसरा पर अपना शिकार बनाया, जबकि रियाज ने जहीर खान (9) के रूप में पांचवां विकेट लिया। पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिये विकेट निकालना जरूरी था और ऐसे में युवराज ने गेंदबाजी में कमाल दिखाया। बायें हाथ की उनकी स्पिन गेंदबाजी इस टूर्नामेंट में विरोधी बल्लेबाजों पर कहर बनकर टूटी है और मोहाली की पिच भी अपवाद नहीं रही। अपने घरेलू दर्शकों के सामने युवराज ने पहले असद शाफिक (30)  का मिडिल स्टंप उखाड़ा जो सीधी गेंद को कट करना चाहते थे। अगले ओवर में उन्होंने अनुभवी यूनुस खान (13) को लाफ्टेड कवर ड्राइव के लिए ललचाकर कैच कराया। उमर अकमल (29) ने युवराज के लगातार ओवरों में एक- एक छक्का जड़कर उनकी लय बिगाड़ने और रन रेट बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन धोनी की चतुराई भरी कप्तानी की तारीफ करनी होगी। उन्होंने तब हरभजन को गेंद सौंपी, जिनकी आर्म बॉल जैसी सीधी गेंद पर उमर बोल्ड हो गए। हरभजन ने यदि उमर को हैरान किया तो मुनाफ ने यही काम अब्दुल रज्जाक (3) के लिए किया। उनकी लेग कटर पर रज्जाक कट करना चाहते थे, लेकिन वह कुछ समझ पाते इससे पहले गेंद ऑफ स्टंप की गिल्ली उड़ा चुकी थी। भारतीयों की अनुशासित गेंदबाजी का आलम यह था कि 37वें ओवर में पहला अतिरिक्त रन गया। पाकिस्तान की उम्मीद कप्तान शाहिद ऑफरीदी पर टिकी थी, लेकिन हरभजन की फुलटॉस को हवा में लहराकर जैसे ही वह पैवेलियन लौटे, भारतीय जीत औपचारिकता मात्र रह गई। मिस्बाह के अंतिम विकेट के रूप में आउट होते ही पीसीए स्टेडियम में दीवाली का माहौल बन गया।

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