भारत-पाक की टीमें जब विश्व कप के हाईवोल्टेज सेमीफाइनल के लिए उतरेंगी, तो करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों को कौशल और जज्बे की जंग देखने को मिलेगी।
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मोहाली:
इतिहास में दूसरी बार खिताब हासिल करने का इरादा रखने वाली भारत और पाकिस्तान की टीमें बुधवार को जब विश्व कप के हाईवोल्टेज सेमीफाइनल मुकाबले के लिए पीसीए स्टेडियम में उतरेंगी, तो दोनों देशों के करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों को कौशल और जज्बे की जंग देखने को मिलेगी। दोनों चिर प्रतिद्वंद्वी टीमों के कप्तान जब टॉस के लिए मैदान पर उतरेंगे, तो इनके साथ स्टेडियम की दर्शकदीर्घाओं में मौजूद हजारों प्रशंसकों के अलावा दुनिया भर में टेलीविजन के जरिए मैच देखने के लिए लालायित करोड़ों लोगों की भावनाएं भी जुड़ी होंगी। जंग के मैदान में भी एक-दूसरे का सामना कर चुके भारत और पाकिस्तान में क्रिकेट की लोकप्रियता जगजाहिर है। ऐसे में बुधवार के मैच का नतीजा केवल विश्व कप के खिताबी मुकाबले का टिकट पाने के लिए ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गर्व की भी बात है। भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनके पाकिस्तानी समकक्ष यूसुफ रजा गिलानी सहित कई अन्य अति विशिष्ठ लोगों की उपस्थिति में होने वाले इस मैच को विश्व कप 2011 का महामुकाबला कहा जा रहा है। भारत-पाक क्रिकेट मैच को वैसे भी विश्व के सबसे कड़े प्रतिस्पर्धी मुकाबलों में गिना जाता है, जिसमें जो टीम दबाव वाली स्थितियों से बेहतर तरीके से निपटती है, जीत उसी की होती है। दोनों टीमों का सबकुछ दांव पर लगा है, क्योंकि इस मैच में जीत से 2 अप्रैल को मुंबई में होने वाले विश्व कप फाइनल का रास्ता खुलेगा।नवंबर, 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान की टीमें पहली बार भारतीय सरजमीं पर भिड़ेंगी। इस आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के द्विपक्षीय क्रिकेट संबंध टूट गए थे। भारत और पाकिस्तान के बीच जहां तक विश्व कप में मुकाबलों की बात है, तो इस मामले में रिकॉर्ड टीम इंडिया के साथ है। ये दोनों पड़ोसी देश क्रिकेट महाकुंभ में चार बार भिड़ चुके हैं, जिसमें हर बार पाकिस्तान टीम ने मुंह की खाई है। हालांकि कुल मिलाकर रिकॉर्ड देखा जाए, तो पाक टीम ने 119 में से 69 मैच जीतकर बढ़त बना रखी है। भारतीय सरजमीं पर भी पाकिस्तान का रिकॉर्ड अच्छा है, उसने यहां खेले 26 में से 17 मैचों में जीत दर्ज की है। हालांकि जब ये टीमें मैदान पर उतरती हैं तो आंकड़े और प्रतिष्ठा को कोई मतलब नहीं रह जाता और उस मैच वाले दिन जो टीम अच्छा खेलती है, वह जीतती है। गत विजेता ऑस्ट्रेलिया और प्रबल दावेदार दक्षिण अफ्रीका क्वार्टर फाइनल में अपने-अपने मुकाबले हारकर पहले ही खिताबी दौड़ से बाहर हो चुके हैं। कहा जा रहा है कि भारत अपने पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी के बजाए मजबूत नजर आ रहा है और वह दबाव वाली स्थितियों से निपटने के लिए घरेलू माहौल और दर्शकों के समर्थन का फायदा उठाना चाहेगा। भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने बहादुरी से अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि भारतीय खिलाड़ी किसी भी तरह के दबाव में नहीं आएंगे।
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