महाराष्ट्र के जालना की रहने वाली रोहिणी पास्ते लैटिन अमेरिकी देश चिली जा रही हैं फुटबॉल खेलने। यह खबर आपको बहुत अलग नहीं लगेगी, लेकिन जब आपको पता लगेगा कि रोहिणी, गरीब पिता की बचपन में मौत जैसी बातों पर किक लगाकर चिली का सफर तय कर रही हैं, वह भी होमलेस फुटबॉल वर्ल्डकप के लिए, तो रोहिणी के खेल में दिलचस्पी खुद ब खुद जाग जाएगी।
रोहिणी छह साल की थी जब पिता चल बसे। मां के साथ वह भी खेतों में काम करती थी। चौथी के बाद पढ़ाई छूट गई, लेकिन फुटबॉल से नाता नहीं।
तभी कोच की नजरें उस पर पड़ी, उनकी मेहनत ने रोहिणी के खेल को तराशा, स्थानीय स्तर पर लड़कियों के लिए बनाए कस्तूरबा गांधी विद्यालय में उसे दाखिला भी मिल गया। अब रोहिणी दसवीं में पहुंच गई हैं, अपने चयन पर खुशी जाहिर करते हुए रोहिणी ने कहा, 'मैं बहुत छोटी थी, जब मेरे पिता की मृत्यु हो गई। मां ने ही मुझे पाला पोसा। पहले हमारे पास पैसे कम थे तो मैं भी उनकी मदद करती थी। मेरे चयन से हम सब बहुत खुश हैं।'
रोहिणी के कोच रफीक शेख भी राष्ट्रीय स्तर पर महाराष्ट्र की ओर से खेल चुके हैं कोच अपने स्टूडेंट के प्रदर्शन पर बेहद खुश हैं। रफीक ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, स्टेट लेवल पर फुटबॉल में हमारे स्कूल से सात लड़कियों का चयन हुआ था, जिसमें तीन अंडर 17 में खेल कर आई ठाणे में स्लम सॉकर के प्रतिनिधियों ने रोहिणी का खेल देखा जो उन्हें बहुत अच्छा लगा।
ट्रायल के लिए उसे नागपुर बुलाया गया। वहां भी उसने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया जिसके बाद चिली के लिए उसका सिलेक्शन हो गया।
चयन के बाद भी रोहिणी के सामने बड़ी दिक्कत थी। 65,000 रुपयों का इंतज़ाम, लेकिन स्थानीय स्तर पर मदद के लिए कई हाथ आगे आए और रोहिणी के सपनों को पंख मिल गए। रोहिणी होमलेस वर्ल्ड कप में टीम इंडिया का प्रतिनिधत्व करेंगी उनके साथ नागपुर और पुणे से भी एक−एक लड़की का चयन हुआ है।
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं