स्कॉटलैंड की राजधानी ग्लास्गो में बुधवार से शुरू हो रहे राष्ट्रमंडल खेलों के 20वें संस्करण में भारत अपने निशानेबाजों, मुक्केबाजों, पहलवानों एवं बैडमिंटन खिलाड़ियों के बल पर पदक के बड़े हिस्से पर कब्जा जमाना चाहेगा।
भारतीय दल के सामने लेकिन सबसे बड़ी चुनौती पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में हासिल 101 पदकों के अपने ही रिकॉर्ड को दोहराने की रहेगी।
नई दिल्ली में 2010 में हुए पिछले संस्करण में तो भारतीय दल को अपनी धरती, घरेलू माहौल और दर्शकों का समर्थन प्राप्त था, लेकिन इस बार उनके लिए विदेशी धरती पर वही कारनामा दोहराने का दबाव जरूर रहेगा।
पिछले राष्ट्रमंडल खेलों की भ्रष्टाचार के आरोपों और तैयारी में हुई देरी के लिए काफी आलोचना हुई, लेकिन प्रतियोगिता में भारतीय दल के शानदार प्रदर्शन ने सभी आलोचनाओं को धूमिल कर दिया।
इस बार हालांकि भारतीय दल लंदन ओलिंपिक-2012 में मिली अभूतपूर्व सफलता से भी उत्साहित है। लंदन ओलिंपिक में भारतीय दल ने रिकॉर्ड छह पदक प्राप्त किए, जिसमें दो रजत पदक शामिल हैं।
इस बार भारत राष्ट्रमंडल खेलों में लगभग 224 खिलाड़ियों का दल उतार रहा है, तथा भारत को पदक की सर्वाधिक उम्मीदें निशानेबाजी, मुक्केबाजी, कुश्ती, बैडमिंटन और हॉकी प्रतिस्पर्धाओं से है।
पिछले दो संस्करणों से निशानेबाजी में भारत को सर्वाधिक पदक मिले हैं। निशानेबाजों ने भारत के लिए मेलबर्न में 27 पदक जीते, जिसमें 16 स्वर्ण पदक शामिल थे। नई दिल्ली में भारतीय निशानेबाजों ने 30 पदक हासिल किए, जिसमें 14 स्वर्ण पदक शामिल थे।
राष्ट्रमंडल खेलों के लिए ग्लास्गो पहुंची भारतीय टीम में ओलम्पिक चैम्पियन अभिनव बिंद्रा के अलावा दो ओलिंपिक पदक विजेता खिलाड़ी गगन नारंग और विजय कुमार शामिल हैं। विजय कुमार राष्ट्रमंडल खेलों-2014 के उद्घाटन समारोह में भारतीय टीम के ध्वजवाहक भी रहेंगे।
बैडमिंटन टीम की कमान इस बार गत चैम्पियन सायना नेहवाल के बाहर होने से विश्व चैम्पियनशिप कांस्य पदक विजेता पीवी सिंधु के हाथों में आ गई है। ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की मौजूदा चैम्पियन जोड़ी से भी काफी उम्मीदें हैं। सिंधु के स्पर्धा में शीर्ष वरीयता दी गई है।
कांस्य पदक विजेता पारुपल्ली कश्यप भी इस बार सर्वोच्च विश्व वरीय मलेशियाई ली चोंग वेई की अनुपस्थिति का लाभ उठाना चाहेंगे।
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय पहलवानों ने जैसा प्रदर्शन किया है, उससे उनसे भी पदकों की उम्मीद करना लाजिमी है। सुशील कुमार पिछले दो ओलिंपिक में लगातार पदक जीत चुके हैं, जबकि लंदन ओलिंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले योगेश्वर दत्त का हौसला भी बुलंद है।
राष्ट्रमंडल खेलों के जरिये सुशील कुमार और योगेश्वर नए भारवर्ग के तहत किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में पहली बार हिस्सा लेंगे।
मुक्केबाज विजेंदर, चक्का फेंक एथलीट कृष्णा पूनिया और विकास गौड़ा से भी पदक की उम्मीदें रहेंगी।
पिछली बार फाइनल में आस्ट्रेलिया के हाथों हारने वाली पुरुष हॉकी टीम हाल ही में संपन्न हुए हॉकी विश्व कप में तो अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। अब उनसे राष्ट्रमंडल खेलों में अपनी गरिमा बचाने की उम्मीद की जा रही है।
पुरुष हॉकी टीम के अलावा महिला हॉकी टीम ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर पिछले कुछ महीनों में जैसा प्रदर्शन किया है, उसने उनसे भी पदक की आस जगा दी है।
भारतवासियों के पदकों की आस भारतीय दल कितना पूरा कर पाते हैं, वह इस बात पर निर्भर करेगा कि वे ग्लास्गो के वातावरण से कितना हद तक तालमेल बिठा पाते हैं।
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