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Exit Poll: तमिलनाडु और केरल के एक्जिट पोल से समझिए साउथ में किसके साथ है दलित

एग्जिट पोल ने तमिलनाडु और केरल में दलित वोट के रुझानों को लेकर अहम संकेत दिए हैं. सर्वे के बाद सामने आए इन अनुमानों से यह समझने की कोशिश की जा रही है कि दक्षिण भारत में दलित मतदाता किस सियासी धारा के साथ खड़े नजर आ रहे हैं.

Exit Poll: तमिलनाडु और केरल के एक्जिट पोल से समझिए साउथ में किसके साथ है दलित
  • एग्जिट पोल तमिलनाडु, केरल में दलित वोटरों के रुझान राजनीतिक प्रदर्शन के साथ महत्वपूर्ण संकेत दे रहे हैं
  • केरल विधानसभा चुनाव 2026 के एग्जिट पोल में दलित वर्ग का अधिकतर समर्थन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट को मिला
  • सर्वे में दलित वोटरों का 57 प्रतिशत LDF को मिला जबकि कांग्रेस गठबंधन को 33 प्रतिशत समर्थन मिला है
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साउथ की राजनीति को लेकर सबसे बड़ा सवाल दलित वोट के रुझान को लेकर खड़ा हो गया है. NDTV के एग्जिट पोल ने तमिलनाडु और केरल में राजनीतिक दलों के प्रदर्शन के साथ‑साथ यह संकेत भी दिए हैं कि दलित मतदाता इस बार किस दिशा में खड़े नजर आ रहे हैं. दोनों राज्यों में अलग‑अलग सियासी समीकरणों के बीच यह समझना अहम हो गया है कि दलित समाज ने सत्ता पक्ष को समर्थन दिया, विपक्ष पर भरोसा जताया या किसी नए विकल्प की ओर रुख किया. वोटिंग के बाद सामने आए ये अनुमान साउथ के सियासी मूड की पहली झलक पेश करते हैं.

तमिलनाडु के एग्जिट पोल में दलित किसके साथ

Axis My India के Exit Poll 2026 के मुताबिक इस बार दलित वोटर (SC वर्ग) का रुझान दो हिस्सों में बंटता साफ नजर आ रहा है. Exit Poll के आंकड़ों के अनुसार TVK को दलित वोटों में सबसे ज्यादा करीब 42% समर्थन मिलता दिख रहा है, जबकि DMK+ को 40% दलित वोट मिलने का अनुमान है. इसके मुकाबले AIADMK+ को सिर्फ 10%, NTK को 3% और अन्य दलों को लगभग 5% दलित वोट मिलने की बात सामने आई है. यह पहली बार है जब Exit Poll में दलित वोट बैंक में TVK और DMK+ के बीच सीधी टक्कर दिख रही है, जो तमिलनाडु की पारंपरिक दलित राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत मानी जा रही है.

केरल में दलित किसके साथ

Axis My India के केरल विधानसभा चुनाव 2026 के Exit Poll के मुताबिक दलित वोटर (SC वर्ग) इस बार साफ तौर पर LDF (लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट) के साथ जाता नजर आ रहा है. सर्वे में SC वोटरों का 57 प्रतिशत समर्थन LDF को मिलता दिखाया गया है. वहीं UDF (कांग्रेस गठबंधन) को 33 प्रतिशत, NDA को सिर्फ 9 प्रतिशत और अन्य दलों को 1 प्रतिशत दलित वोट मिलने का अनुमान है. आंकड़े यह संकेत देते हैं कि 2021 के मुकाबले दलित वर्ग में LDF की पकड़ और मजबूत हुई है, जबकि UDF और NDA दोनों इस वर्ग में पीछे दिखते हैं. यानी सामाजिक आधार के लिहाज से केरल की राजनीति में दलित वोट इस बार भी निर्णायक रूप से लेफ्ट के पाले में नजर आ रहा है.

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