- जूती बनाकर परिवार पालने वाले 07 करोड़ रुपये के GST बकाया का नोटिस मिला है.
- बैंक खाता GST बकाया नोटिस के कारण फ्रीज कर दिया गया है.
- जितेंद्र के पास रहने के लिए घर भी नहीं है, पीएम आवास से मिला घर अभी बनवा रहे हैं.
रहने के लिए घर नहीं, महीनेभर में कमाई भी सिर्फ उतनी होती, जिससे किसी तरह परिवार चल सके. पत्नी, बेटा-बेटी और मां रात को भूखे न सोएं. पर जब बैंक से करोड़ों रुपये के जीएसटी बकाया का नोटिस मिला तो जैसे पैरों के नीचे जमीन खिसक गई हो. यह कहानी है राजस्थान के बालोतरा जिले में पारंपरिक जूतियां बनाकर परिवार पालने वाले एक युवक की. उसे करीब 7 करोड़ रुपये के जीएसटी बकाया नोटिस मिला है. अब वह नोटिस मिलने के बाद से इधर से उधर ठोकरे खा रहा है.
GST नोटिस की वजह से खाता फ्रीज
दरअसल, बालोतरा जिले में गुड़ामालानी कस्बे के जीनगर निवासी जितेंद्र कुमार 25 जुलाई को एसबीआई में बंद बैंक खाता चालू करवाने के लिए बैंक ब्रांच गए थे. इस पर बैंक कर्मचारियों ने 28 जुलाई को दोबारा आने के लिए कह दिया, जब वह दोबारा 28 जुलाई को पहुंचे तो उनका बैंक खाता तो चालू नहीं हुआ. पर उनके सामने नई मुसीबत जरूर खड़ी हो गई. बैंक अधिकारियों ने उन्हें बताया कि GST नोटिस की वजह से उनका खाता फ्रीज कर दिया गया है.
बैंक अधिकारियों ने जिंतेंद्र कुमार को जीएसटी का भारी भरकम बकाया का नोटिस थमा दिया. जिसके बाद जितेंद्र के होश उड़ गए. तमिलनाडु वाणिज्यिक कर विभाग के कृष्णगिरी-2 असेसमेंट सर्किल की ओर से 5 मई 2026 को जारी नोटिस में 'श्री शिवम एक्सपोर्ट्स' नामक फर्म पर वर्ष 2017-18 से 2019-20 के बीच 6 करोड़ 78 लाख 97 हजार 357 रुपये का जीएसटी बकाया बताया गया है.
पीएम आवास से बनवा रहा घर
इसी नोटिस के आधार पर संबंधित पैन और जीएसटी विवरण से जुड़े बैंक खातों, एफडी और अन्य बैंकिंग सुविधाओं को फ्रीज करने के निर्देश जारी किए गए. महज 10 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह कमाने वाले जितेंद्र कुमार जीनगर का कहना है कि उनका तमिलनाडु की किसी कंपनी या व्यापार से कभी कोई संबंध नहीं रहा. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि साइबर ठगों ने उनके पैन कार्ड और अन्य दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी फर्म खड़ी कर दी.
गुड़ामालानी के जीनगर मोहल्ला निवासी जितेंद्र कुमार पुत्र महादेवराम जीनगर चमड़े की पारंपरिक जूतियां बनाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं. आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण हाल ही में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिले लाभ से वह अपना एक कमरा बनवा रहे हैं. मकान निर्माण के चलते परिवार फिलहाल उनके छोटे भाई के घर रह रहा है. पीड़ित ने मामले की लिखित शिकायत गुड़ामालानी थाने में दी, जहां से उन्हें साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने की सलाह दी गई.

पैन कार्ड और पहचान का फर्जी इस्तेमाल की आशंका
प्रारंभिक तौर पर आशंका है कि किसी अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह ने जितेंद्र कुमार के पैन कार्ड और पहचान संबंधी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर तमिलनाडु के कृष्णगिरी पते पर फर्जी फर्म का पंजीकरण कराया. जितेंद्र का कहना है कि उन्होंने कभी किसी कंपनी के गठन के लिए अपने दस्तावेज नहीं दिए. उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में पिता के निधन के बाद उन्होंने ऋण लेने के लिए बाड़मेर की एक फाइनेंस कंपनी को दस्तावेज उपलब्ध कराए थे. उस दौरान सिबिल जांच के नाम पर उनसे ओटीपी भी लिया गया था. उन्हें आशंका है कि उसी समय उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग किया गया.
इस मामले में सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी (ACTO) बिहारीलाल ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह किसी दूसरे राज्य में पैन कार्ड के दुरुपयोग से फर्जी फर्म बनाए जाने का मामला प्रतीत होता है. उन्होंने कहा कि यदि पीड़ित नोटिस उपलब्ध कराता है तो स्थानीय कर विभाग यह जांच कराने में सहयोग करेगा कि फर्म के पंजीकरण के समय कौन-कौन से दस्तावेज, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी का इस्तेमाल किया गया था. उन्होंने पीड़ित को तत्काल साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज कराने की सलाह देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में घबराने की जरूरत नहीं है. कई बार जालसाज लोन या सरकारी योजनाओं के नाम पर लोगों के दस्तावेज हासिल कर उनके नाम से फर्जी फर्म और बैंक खाते संचालित कर लेते हैं.
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