जयपुर के विश्व प्रसिद्ध हाथी गांव में हाथियों के चेकअप के लिए दो दिवसीय कैंप लगाया गया. इस दौरान गांव में मौजूद करीब 76 हाथियों के स्वास्थ्य की जांच की गई. पशु चिकित्सकों की टीम ने हाथियों के खून के साथ, मल मूत्र के सैंपल इकट्ठे किए. इन सैंपलों की जांच कर हाथियों का स्वास्थ्य सुनिश्चित किया जाएगा. हाथियों के कान के पास से उनका ब्लड सैंपल लिया गया. इस दौरान हाथियों के महावत अपने हाथियों को शांत करते नजर आए.
सबसे छोटे हाथी वीरू की भी हुई जांच
वहीं, इस परिवार के सबसे छोटे सदस्य हाथी वीरू की जांच भी की गई. सबसे छोटे साथी वीरू ने जांच में पूरा सहयोग भी किया. वीरू की उम्र करीब 8 साल है. वीरू सबसे नटखट तो है लेकिन वह सबसे समझदार भी है. हाथी गांव समिति के अध्यक्ष बल्लू खान ने बताया कि हर 6 महीने में हाथियों की जांच के लिए कैंप लगाया जाता है.

इस दौरान हाथियों के सैंपल लिए जाते हैं. साथ ही, दवाई वितरित की जाती है. हाथी गांव के सभी 76 हाथियों की जांच करवाई गई है. वहीं, डॉक्टर अरविंद माथुर ने बताया कि हाथियों के ब्लड सैंपल और स्वैप सैंपल लिए गए हैं. सभी हाथियों की डिवर्मिंग की जा रही है. ताकि किसी भी तरह के बैक्टीरिया ना पनपे. इसके साथ ही सभी हाथियों को मल्टीविटामिन और मिनरल्स दिए गए हैं. उनके पांव की जांच भी की गई है.
गुलाबी रंग के हाथी से चर्चा में आया था हाथी गांव
सभी सैंपल को आगे जांच के लिए भेजा जाएगा. उन्होंने बताया कि इस कैंप के माध्यम से सभी महावतों को यह भी बताया जा रहा है कि उन्हें हाथियों की देखभाल कैसे करनी है. विशेष कर गर्मियों में हाथियों के देखभाल को लेकर बातें बताई जा रही हैं. हाल ही में हाथी गांव चर्चा का विषय बना था. जब एक अंतरराष्ट्रीय फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा ने गुलाबी रंग में रंगे हुए हाथी के फोटोशूट की वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी.

इसके बाद से सोशल मीडिया पर लोगों ने हाथियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे. बाद में उसे हाथी की मौत की खबर ने लोगों के गुस्से को और बढ़ा दिया था. हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक फोटोशूट में नजर आ रही हथनी चंचल की मौत कार्डियक फेलियर से हुई थी.
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