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This Article is From Dec 14, 2015

पटना पुस्तक मेला: मधुशाला हो या गोदान, कायम है पुरानी कृतियों का आकर्षण

पटना पुस्तक मेला: मधुशाला हो या गोदान, कायम है पुरानी कृतियों का आकर्षण
प्रतीकात्‍मक फोटो
पटना: 'कृतियां कभी नहीं मरतीं, उसके शब्द अमर होते हैं'। रचनाकार भले ही गुजर गए हों, लेकिन उसकी रचनाएं अमर रहती हैं। ऐसा ही कुछ पटना पुस्तक मेले में देखने को मिल रहा है।

पटना के गांधी मैदान लगे 22वें पुस्तक मेले में यूं तो प्रतिदिन नए रचनाकारों की पुस्तकों का विमोचन हो रहा है, लेकिन पहले से प्रसिद्ध और कालजयी रचनाओं का आकर्षण आज भी कायम है। पुस्तक मेले में महान रचनाकारों की कृतियां खूब बिक रही हैं और लोग इसे पसंद कर रहे हैं। लोग कई किताबों की सूची लेकर पहुंच रहे हैं।

दिनकर की कृतियों की भी हो रही खरीद
हरिवंश राय बच्चन की 'मधुशाला' हो या प्रेमचंद की 'गोदान' व 'प्रतिज्ञा' हो और धर्मवीर भारती की 'गुनाहों का देवता' अभी भी पटना पुस्तक मेले में पाठकों की पहली पसंद बनी हुई है। लोग राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कृति 'कुरुक्षेत्र' व 'रश्मिरथी' भी खूब खरीद रहे हैं। इन सबसे ऊपर डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की 'अग्नि की उड़ान' और 'मेरी जीवन यात्रा' है जिसे लोग आज भी पढ़ना पसंद कर रहे हैं। प्रकाशकों का मानना है कि नई पीढ़ियों के लिए इन कालजयी पुस्तकों का आकर्षण कभी कम नहीं होगी। युवा पुस्तक प्रेमी शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास 'गृहदाह', 'बड़ी दीदी', 'ब्राह्मण की बेटी', 'देवदास' और 'चरित्रहीन' बहुत पसंद कर रहे हैं।

डॉ.कलाम की रचनाओं की मांग इस साल सबसे ज्‍यादा
प्रभात प्रकाशन के राजेश शर्मा ने बताया कि डॉ. कलाम की रचनाओं की मांग तो इस वर्ष सबसे ज्यादा है ही, उनके साथ अंतिम समय में रहे सर्जन पाल सिंह की रचना 'आओ बच्चे आविष्कारक बनें' भी खूब बिक रही है। राजपाल एंड संस प्रकाशन के अशोक शर्मा ने कहा कि इस मेले में पुस्तक प्रेमियों की संख्या सबसे अधिक होती है। यहां के पाठक न केवल नई किताबों की मांग करते हैं, बल्कि पुरानी कृतियां भी मांगते हैं। मेले में प्रतिदिन पुस्तक प्रेमियों की भीड़ जुट रही है।

प्रकाशक कहते हैं कि रविवार समेत छुट्टी के दिनों में गुलाबी धूप के बीच पुस्तक प्रेमियों से मेला परिसर भरा रहा है।सेंटर फॉर रीडरशिप डेवलपमेंट (सीआरडी) के बैनर तले लगे 'पढ़ेगा बिहार, बढ़ेगा बिहार' थीम पर आधारित यह पुस्तक मेला चार दिसंबर को शुरू हुआ था। 15 दिसंबर मेले के समापन का दिन है।

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