बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
- सपा के कार्यक्रम को गठबंधन के पूर्वाभ्यास के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए
- नीतीश ने उम्मीद जताई कि सपा में सबकुछ जल्द ही ठीक हो जाएगा
- मुलायम सिंह से बात करने के बाद नीतीश ने अपनी असमर्थता जता दी थी
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पटना:
नीतीश कुमार समाजवादी पार्टी के स्थापना दिवस कार्यक्रम में मुलायम सिंह यादव के फ़ोन करने के बावजूद नहीं जाएंगे. नीतीश ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि अगर छठ पर्व नहीं होता तब वो जाने के लिए सोचते भी लेकिन जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) इस कार्यक्रम में शामिल होगा और पार्टी के शीर्ष नेता शरद यादव शनिवार को लखनऊ में इस कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे.
निश्चित रूप से नीतीश की इस घोषणा के बाद समाजवादी पार्टी के एक खेमे में काफी मायूसी छाई होगी क्योंकि ये माना जा रहा था कि निमंत्रण शिवपाल यादव की तरफ से मिलने के कारण नीतीश अपने आने की सहमति नहीं दे रहे हैं लेकिन एक बार मुलायम सिंह के फ़ोन करने के बाद नीतीश शायद ना नहीं कह पाएंगे और उनका लिहाज रखने के लिए शनिवार को लखनऊ आ सकते हैं.
नीतीश ने लेकिन कहा कि शनिवार के कार्यक्रम को गठबंधन के पूर्वाभ्यास के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि ये कार्यक्रम एक औपचारिकता है. लेकिन आने वाले दिनों में ये समाजवादी पार्टी के ऊपर निर्भर करता है कि वो उत्तर प्रदेश में तालमेल के लिए इच्छुक है या नहीं. लेकिन उन्होंने माना कि गठबंधन चाहने से नहीं बल्कि परिस्थितिओं के ऊपर निर्भर करता है. नीतीश पटना के छठ घाटों के निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे.
लेकिन नीतीश निश्चित रूप से समाजवादी पार्टी के अंदर चल रही उठापटक से परेशान दिखे और कहा कि हम लोग नहीं चाहते हैं कि कोई विवाद बढ़े. जो कुछ भी अंदरूनी बात हो रही है, हमलोगों को ख़ुशी होगी जब कोई विवाद न रहे. नीतीश ने उम्मीद जताई कि मुलायम सिंह यादव, जिनका इतना प्रभाव है, वह अपने अनुभव के आधार पर सब कुछ दुरुस्त करने में कामयाब होंगे, जिससे कि सब लोग मिल जुल कर आगे बढ़ेंगे. कहा जा रहा है कि नीतीश ने इस कार्यक्रम से सपा के भीतर विवादों खासकर मुलायम और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच मनमुटाव के कारण अपने को अलग रखा.
लखनऊ के राजनीतिक हलकों में मुलायम सिंह के फ़ोन के बाद गुरुवार शाम ये खबर आधिकारिक रूप से दी गयी थी कि नीतीश ने लखनऊ आने के लिए अपनी सहमति दे दी है. लेकिन मुलायम सिंह से बात करने के बाद उनके भाई और पूर्व मंत्री शिवपाल यादव को नीतीश ने अपनी असमर्थता जता दी थी.
लेकिन नीतीश कुमार के सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव शुक्रवार शाम लखनऊ पहुंच गए. इस साल लालू यादव के घर में उनकी पत्नी राबड़ी देवी छठ नहीं कर रही हैं इसलिए माना जा रहा है कि लालू यादव पर्व त्योहार की चिंता से नीतीश कुमार की तुलना में मुक्त हैं.
निश्चित रूप से नीतीश की इस घोषणा के बाद समाजवादी पार्टी के एक खेमे में काफी मायूसी छाई होगी क्योंकि ये माना जा रहा था कि निमंत्रण शिवपाल यादव की तरफ से मिलने के कारण नीतीश अपने आने की सहमति नहीं दे रहे हैं लेकिन एक बार मुलायम सिंह के फ़ोन करने के बाद नीतीश शायद ना नहीं कह पाएंगे और उनका लिहाज रखने के लिए शनिवार को लखनऊ आ सकते हैं.
नीतीश ने लेकिन कहा कि शनिवार के कार्यक्रम को गठबंधन के पूर्वाभ्यास के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि ये कार्यक्रम एक औपचारिकता है. लेकिन आने वाले दिनों में ये समाजवादी पार्टी के ऊपर निर्भर करता है कि वो उत्तर प्रदेश में तालमेल के लिए इच्छुक है या नहीं. लेकिन उन्होंने माना कि गठबंधन चाहने से नहीं बल्कि परिस्थितिओं के ऊपर निर्भर करता है. नीतीश पटना के छठ घाटों के निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे.
लेकिन नीतीश निश्चित रूप से समाजवादी पार्टी के अंदर चल रही उठापटक से परेशान दिखे और कहा कि हम लोग नहीं चाहते हैं कि कोई विवाद बढ़े. जो कुछ भी अंदरूनी बात हो रही है, हमलोगों को ख़ुशी होगी जब कोई विवाद न रहे. नीतीश ने उम्मीद जताई कि मुलायम सिंह यादव, जिनका इतना प्रभाव है, वह अपने अनुभव के आधार पर सब कुछ दुरुस्त करने में कामयाब होंगे, जिससे कि सब लोग मिल जुल कर आगे बढ़ेंगे. कहा जा रहा है कि नीतीश ने इस कार्यक्रम से सपा के भीतर विवादों खासकर मुलायम और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच मनमुटाव के कारण अपने को अलग रखा.
लखनऊ के राजनीतिक हलकों में मुलायम सिंह के फ़ोन के बाद गुरुवार शाम ये खबर आधिकारिक रूप से दी गयी थी कि नीतीश ने लखनऊ आने के लिए अपनी सहमति दे दी है. लेकिन मुलायम सिंह से बात करने के बाद उनके भाई और पूर्व मंत्री शिवपाल यादव को नीतीश ने अपनी असमर्थता जता दी थी.
लेकिन नीतीश कुमार के सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव शुक्रवार शाम लखनऊ पहुंच गए. इस साल लालू यादव के घर में उनकी पत्नी राबड़ी देवी छठ नहीं कर रही हैं इसलिए माना जा रहा है कि लालू यादव पर्व त्योहार की चिंता से नीतीश कुमार की तुलना में मुक्त हैं.
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