केन्या के 30 साल के एथलीट सेबैस्टियन सावे (Sabastian Sawe) ने लंदन मैराथन में वो कर दिखाया जिसे हासिल करना पिछले तकरीबन सवा सौ साल के वक्त में दुनिया भर के एथलीटों के लिए एक मिथक रहा. केन्या के सुपरस्टार एथलीट सेबैस्टियन सावे ने लंदन मैराथन में इतिहास रचते हुए 26 अप्रैल, रविवार को हमेशा के लिए यादगार बना दिया. सावे ने लंदन मैराथन की 42.2 किलोमीटर (26.2 मील) की दूरी 1 घंटे 59 मिनट 30 सेकंड में पूरी कर ली. बड़ी बात ये भी है कि लंदन मैराथन के इस रेस को इथोपियो के योमिफ केजेल्चा ने भी 2 घंटे से कम वक्त में पूरा कर लिया. योमिफ केजेल्चा ने अपने डेब्यू में 1:59:41 का समय निकाला और मैराथन के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि बेहद मुश्किल मानीजाने वाली मैराथन रेस को दो इंसानों ने दो घंटे से भी कम में वक्त में पूरा कर लिया.
खेलों की दुनिया का ये एक ऐसा वर्ल्ड रिकॉर्ड है जिसकी तुलना शायद क्रिकेट में सर डॉन ब्रैडमैन के 99.94 के अविश्सनीय टेस्ट औसत, यूसेन बोल्ट के 9.58 सेकेंड में 100 मीटर का वर्ल्ड रिकॉर्ड, मशहूर तैराक माइकल फेल्प्स के ओलिंपिक्स में सबसे ज़्यादा 23 मेडल का रिकॉर्ड या अमेरिकी टीम के 1904 के सेंट लुइस ओलिंपिक में जीते गए 239 मेडल्स के रिकॉर्ड (85% मेडल) से की जा सकती है.
कौन हैं सेबैस्टियन सावे, क्या खाते हैं और क्या है रुटीन?
केन्या के 30 साल के सेबैस्टियन सावे ने लंदन मैराथन को पूरा करने में 1:59:30 (1 घंटा, 59 मिनट, 30 सेकंड) का समय निकाला और केन्या के ही केल्विन किप्टम के पिछले वर्ल्ड रिकॉर्ड को 65 सेकंड से पीछे छोड़ दिया. केन्या के लॉन्ग डिस्टेंस रनर सावे ने इससे पहले 2023 वर्ल्ड रोड रनिंग चैंपियनशिप्स और 2023 वर्ल्ड क्रॉस कन्ट्री चैंपियनशिप्स में गोल्ड के अलावा 2025 बर्लिन मैराथन और 2025 और 2026 के लंदन मैराथन में गोल्ड मेडल अपने नाम किए हैं.
सावे केन्या के रिफ़्ट वैली वाले ग्रामीण इलाके से आते हैं जहां से ज़्यादातर बड़े रनर्स निकलते हैं. वो शुरुआत में 10,000 मीटर और हाफ़ मैराथन में माहिर माने जाते थे. सावे एक गरीब परिवार से उभरे एथलीट बताये जाते हैं. दूसरे रनर्स की तरह उनके लिए भी दौड़ना ग़रीबी से निकलने का रास्ता रहा है. वो केन्या के हाई अल्टीट्यूड सेंटर कपटागाट या इटेन में ट्रेनिंग करते हैं. वो मशहूर कोच पैट्रिक सैंग की अगुआई में ट्रेनिंग करते हैं जो मशहूर रनर Eliud Kichoge के भी कोच रहे हैं.
सावे हर रोज़ सुबह 5 बजे उठकर 25-30 किमी की ट्रेनिंग करते रहे हैं. हफ़्ते भर में वो 200 किमी से ज़्यादा भागने का टारगेट पूरा करते रहे हैं. उनका खाना उगाली, सब्जी और दूध बताया जाता है. वो शहरों के चकाचौंध से दूर रहनेवाले ऐसे एथलीट हैं जो अपनी कमाई का हिस्सा गांवों में ही लगा देते हैं.
For decades the sub-2 hour marathon felt almost impossible.
— Pvsindhu (@Pvsindhu1) April 26, 2026
Today Sebastian Sawe ran 1:59:30.
The ceiling of human endurance just moved 🤯
Completely mind blowing.
And somehow it gets even crazier.
Yomif Kejelcha ran 1:59:41 in his debut.
Two human beings under two hours in… https://t.co/ovmF7ROlkW
प्रति 400 मीटर 68 सेकेंड से कम, सिंधु भी हुईं हैरान!
सावे ने 42.2 किमी की दूरी के लिए 1 घंटा 59 मिनट 30 सेकेंड का वक्त निकाला. यानी सवा 42 किमी की दूरी के लिए प्रति 400 मीटर की दूरी सावे ने 67.97 सेकेंड मतलब 68 सेकेंड से भी कम टाइम में पूरी कर ली.
भारत की पहली डबल ओलिंपिक महिला पदक विजेता पीवी सिंधु भी सावे के कारनामे से हैरान हुए बिना नही रह सकीं. सिंधु ने सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म ‘X' पर ट्वीट किया, “दशकों तक सब-2 घंटे मैराथन लगभग नामुमकिन लगती थी. आज सेबेस्टियन सावे ने 1:59:30 में दौड़ पूरी कर ली. मानव की सहनशक्ति की हद अब और आगे बढ़ गई है. 🤯 ये पूरी तरह हैरान कर देने वाला है. और ज़रा सोचिए, ये और भी पागलपन भरा हो जाता है. योमिफ केजेल्चा ने अपने डेब्यू में 1:59:41 का समय निकाला. एक ही रेस में दो इंसान दो घंटे से कम में. और मैं केल्विन किपटुम को याद किए बिना नहीं रह पा रही, मेरा प्यारा दोस्त. कहीं ऊपर से उम्मीद है वो आज रात मुस्कुरा रहे होंगे और नाच रहे होंगे 🕊️ये पल उसका पीछा करने के लिए बने थे. आज सेबेस्टियन सावे ने वो सपना पूरा कर दिया.'
ग़ौरतलब है कि सावे ने जिन केल्विन किप्टुम का रिकॉर्ड तोड़ा वो खुद उनके दोस्त रहे. केल्विन किप्टुम का 2024 में सिर्फ़ 24 साल की उम्र में एक रोड एक्सीडेंट में देहांत हो गया.
55 मिनट कम करने में 118 साल का वक्त लगा
1908 के लंदन ओलिंपिक्स में अमेरिका के जॉनी हेज़ ने मैराथन की रेस को पूरा करने के लिए 2:55:18.4 (2 घंटा, 55 मिनट, 18.4 सेकेंड) का वक्त निकाला था. फिर 1929 में हैरी पेन ने 2:30:57.6 सेकेंड में ये रेस पूरी की. इंग्लैंड के ही जिम पीटर्स ने 1952 में 2:20:42.2 के वक्त में ये रेस पूरी की. ऑस्ट्रेलिया के डेरेक क्लेयटन 1967 में पहली बार मैराथन के वक्त को 2 घंटा 10 मिनट से कम की सीमा रेखा यानी 2:09:36.4 में रेस पूरी कर ली.
मोरक्को के खालिद खनौचि जो बाद में अमेरिकी एथलीट बन गए, ने 1999 के शिकागो मैराथन में 2:05:42 का वक्त निकाला. केन्या के केल्विन किप्टम ने शिकागो मैराथन 2:00:35 के वक्त में ये मैराथन पूरी की थी. मगर 2 घंटे से कम का वक्त निकालने वाले पहले दो एथलीट साबित हुए केन्या के 30 साल के एथलीट सेबैस्टियन सावे और इथोपियो के योमिफ केजेल्चा.
मैराथन के बड़े मुक़ाम- 100 साल में 55 मिनट फ़ास्ट हुए रनर्स
| टाइम | एथलीट | साल | देश |
| 2:55:18.4 | जॉनी हेज | 1908 | इंग्लैंड |
| 2:20:42.2 | जिम पीटर्स | 1952 | इंग्लैंड |
| 2:09:36.4 | डेरेक क्लेयटन | 1967 | ऑस्ट्रेलिया |
| 2:05:42 | खालिद खनौचि | 1999 | मोरक्को(बाद में अमेरिका) |
| 2:00:35 | केल्विन किप्टम | 2023 | केन्या |
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