R Praggnanandhaa on Vaibhav Sooryavanshi: भारत की गोल्डन जेनेरेशन चेस के चैंपियन ग्रैंडमास्टर प्रज्ञानंद नॉर्वे चेस प्रतियोगिता में अपनी जीत को अपनी सबसे बड़ी जीत में से एक मानते हैं. शतरंज की दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में से एक नॉर्वे चेस प्रतियोगिता में तलिमनाडु के ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानंद (Rameshbabu Praggnanandhaa) ने 18 अंकों के साथ देर रात ख़िताब अपने नाम कर लिया.नॉर्वे चेस टूर्नामेंट के दौरान उन्होंने वर्ल्ड नंबर-1 मैग्नस कार्लसन को दो बार हराकर पूरी दुनिया को दंग कर दिया. नॉर्वे की राजधानी ओस्लो से NDTV से EXCLUSIVE बात करते हुए उन्होंने अपनी जीत, अपनी नींद और अपने सेलेब्रेशन से लेकर अपने सपोर्ट सिस्सटम पर बात की और सबका शुक्रिया भी अदा किया.
Deeply honoured by your wishes, Hon'ble Prime Minister Shri @narendramodi sir.
— Praggnanandhaa (@rpraggnachess) June 6, 2026
It is my absolute honour to represent India and bring the Norway Chess title home.
Your constant encouragement motivates me to work even harder and keep making our nation proud. https://t.co/WbdTNL2yZl
सवाल: प्रग्गा, आपने नॉर्वे चेस जैसी इलीट टूर्नामेंट का ख़िताब तो जीता ही दो बार एक ही टूर्नामेंट में वर्ल्ड नंबर-1 मैग्नस को हरा दिया. ये बेहद शानदार कामयाबी है. बहुत बधाई..
नॉर्वे चेस चैंपियन प्रज्ञानंद: थैंक यू. मेरे लिए मैग्नस कार्लसन को हराना बड़ी बात है. मैं हमेशा वो टूर्नामेंट जीतना चाहता था जिसमें मैग्नस भी खेलें. मैग्नस को टूर्नामेंट में हराने से मेरा कॉन्फ़िडेंस बढ़ा. इससे मुझे टूर्नामेंट में भी बहुत मदद मिली. मैं इस टूर्नामेंट को जीतकर खुश हूं. ये टूर्नामेंट जीतना मेरे लिए बड़ी बात है.
सवाल: पिछला साल आपके लिए कुछ ख़ास अच्छा नहीं रहा था. आपने इस टूर्नामेंट के लिए या मैग्नस के लिए क्या कुछ अलग तैयारी की थी?
प्रज्ञानंद: इस टूर्नामेंट के लिए मैंने कुछ अलग नहीं किया था. मैं बुखारेस्ट में चेस खेलकर यहां पहुंचा था. तो, ज़्यादा तैयारी का वक्त भी नहीं मिला. लेकिन मेरी टीम ने और मेरे कोच ने छोटे-छोटे डिटेल्स पर काम किया था. विपक्षी खिलाड़ियों पर भी काम किया था. मैंने और मेरी टीम ने एक प्रोसेस अपनाया और उसपर टिके रहे.
सवाल: आपने इतने इंटेंस टूर्नामेंट में खुद को दुरुस्त रखने के लिए क्या किया. मैं आपके कोच वैभव सूरी से बात कर रहा था. वो कह रहे थे आप अपने कोच ‘वैभव सूरी' को ‘वैभव सूर्यवंशी' के नाम से छेड़ते भी थे.
प्रज्ञानंद: नहीं, मैं उन्हें छेड़ता नहीं हूं. मैं उनसे कह रहा था कि मैं जब भी गूगल पर वैभव सूरी का नाम डालता हूं तो वैभव सूर्यवंशी का नाम सामने आने लगता है. वैभव सूर्यवंशी कमाल के क्रिकेट खिलाड़ी हैं. पिछले साल मैंने IPL में उनका डेब्यु मैच भी देखा था. उन्होंने पहली ही गेंद पर एक अच्छे गेंदबाज़ (शार्दुल ठाकुर) को छक्का जड़ दिया था. ये अविश्वसनीय है. उनका टीम इंडिया में चयन हो गया है. उनमें बहुत कॉन्फ़िडेंस है. वो बहुत अच्छा खेलते हैं.
सवाल: आप अपने सपोर्ट सिस्टम रके बारे में बतायें. आपकी बहन ग्रैंडमास्टर वैशाली से भी इस टूर्नामेंट में मदद मिली आपको?
प्रज्ञानंद: सबसे पहले तो मैं अपनी फ़ैमिली का बेहद शुक्रिया अदा करता हूं. किसी फ़ैंमिली में एक खिलाड़ी हो तो माता-पिता को बहुत बलिदान, त्याग करना पड़ता है. मेरे परिवार में मैं और बहन वैशाली चेस खेलते हैं. इसके अलावा मेरे कोच रमेशबाबू सर और वैभव सूरी सर, मेरी टीम और मेरे दोस्त सबने मेरी बहुत मदद की.
सवाल: आप, डी गुकेश, वैशाली, दिव्या देशमुख जैसे धुरंधर, चेस की दुनिया में कई भारतीय खिलाड़ी लगातार अच्छा कर रहे हैं. क्या इस ‘गोल्डन जेनेरेशन' की वजह से कह सकते हैं कि चेस की दुनिया में भारत का दबदबा है?
प्रज्ञानंद: बिल्कुल, ये हमारी गोल्डन जेनेरेशन है. हमने ओलिंपियाड में जीत हासिल की है जहां दुनिया की सभी क्वालिफ़ाइड, टॉप टीमें खेलती हैं. कई भारतीय खिलाड़ी एक साथ अच्छा कर रहे हैं. विश्वनाथन आनंद सर के सिखाये कई खिलाड़ी लगातार टॉप लेवल पर अच्छा कर रहे हैं.
सवाल: आपने अपनी जीत को कैसे सेलिब्रेट किया है, आगे अब क्या हासिल करने के सपना है?
प्रज्ञानंद: सच बताऊं तो अभी भी सोने का पूरा मौक़ा नहीं मिल पाया है. कल से ही फ़ैन्स से घिरा रहा. अभी घर जाकर सोना चाहता हूं. तब फिर सेलिब्रेट करुंगा. अभी मैं लगातार अच्छे टूर्नामेंट में जीत हासिल करना चाहता हूं.
सवाल: आपसे बात करना हमेशा सुखद है. NDTV से बात करने का शुक्रिया.
प्रज्ञानंद: थैंक यू सो मच.
ये भी पढ़ें- NDTV EXCLUSIVE: 'अभी ब्रैडमैन और सचिन की पैर के धूल के बराबर, अभी तुलना ना करें', वैभव सूर्यवंशी के पिता संजीव
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं