डबल ओलंपिक पदक विजेता और वर्ल्ड चैंपियन पीवी सिंधु का युद्ध के हालात में मजबूत कैरैक्टर उभर कर सामने आ रहा है. यह भी समझ में आ रहा है की बचपन में चाहे जितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा हो, पीवी सिंधु कैसे ओलंपिक में पहले रजत पदक जीतने वाली महिला खिलाड़ी और फिर डबल ओलंपिक पदक विजेता बनीं.
फाइटर सिंधु टीम को देती हैं श्रेय
सिंधु ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप खेलने बर्मिंघम जा रही थी कि अमेरिका-ईरानयुद्ध की वजह से वह दुबई में फस गईं. लेकिन वहां फंसकर उन्होंने शिकायतें नहीं शुरू की ना ही रोना-धोना शुरू किया. NDTV ने उनसे बात करने की कोशिश की ताकि वह अपने बारे में दुनिया को बताएं और एक अपील भी कर सकें. सिंधु ने तमाम भारतीय और दुनिया की मीडिया के लिए एक वीडियो संदेश भी जारी किया. उससे पहले वह बताती रही कि कैसे दुबई में वह फंसी हैं और कैसे वह अपना ख्याल रख रही हैं और कैसे उनकी टीम उनका ख्याल रख रही है. इस वक्त भी उन्होंने अपनी टीम को पूरा श्रेय दिया.
मदद करनेवालों की ताकत बनकर उनके पीछे खड़ी हो गई सिंधु!
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट आया, '... @emirates और अन्य एयरलाइन्स पर्याप्त काम नहीं कर रही हैं ताकि लोग घर वापस जा सकें. यूरोप में फंसे यात्रियों को दिनों तक इतरने के लिए कहा जा रहा है, जबकि मध्य पूर्व में फंसे लोगों को विश्वसनीय अपडेट नहीं दिए जा रहे हैं। यह सिर्फ ऑनलाइन पीआर है, जमीन पर ग्राहकों को कोई राहत नहीं मिल रही है.'
पीवी सिंधु ने नकारात्मकता को कोई जगह नहीं थी और इसका फौरन जवाब दिया. उन्होंने 'X' लिखा, 'पूरे सम्मान के साथ, मुझे असहमत होना पड़ रहा है.'
सिंधु ने लिखा, 'दुबई के अधिकारी इस कठिन परिस्थिति में अविश्वसनीय रूप से सहायक रहे हैं. जैसे ही स्थिति बिगड़ी, हमें वास्तविक चिंता और दक्षता के साथ संभाला गया. हमें एक होटल रूम दिया गया और स्पष्ट रूप से सूचित किया गया कि जब तक हम सुरक्षित रूप से वापस नहीं जा सकते, तब तक सब कुछ संभाला और कवर किया जाएगा.'
सिंधु ने बनाई मिसाल!
युद्ध के हालात में मदद करने वाले साथियों का सिंधु शुक्रिया अदा करना नहीं भूलतीं. यह आजकल पुरानी नई सभी जनरेशन के लिए सबक सिखाने जैसी बात है. सिंधु कहती हैं,
'यह आश्वासन ही हमारे लिए एक बड़ी राहत थी. हर कदम पर, हमें सुरक्षित और देखभाल महसूस हुई है. यहां दिखाई जा रही सहानुभूति वास्तव में अद्भुत है. @Emirates एमिरेट्स स्टाफ से लेकर इमिग्रेशन अधिकारियों और एयरपोर्ट पर ग्राउंड टीमों तक, हर एक व्यक्ति ने फंसे हुए लोगों की मदद के लिए अपनी क्षमता से अधिक काम किया है. वे प्रभावित हर व्यक्ति की देखभाल के लिए अपनी शक्ति में सब कुछ कर रहे हैं, और यह सम्मान और प्रशंसा का पात्र है.'
सिर्फ जीतना खेल नहीं!
खेल सिर्फ जीतना नहीं सिखाता, हमारा चरित्र भी मजबूत करता है. सिंधु इन सबका बेमिसाल उदाहरण हैं. वाह सिंधु!
यह भी पढ़ें- मेस्सी के आने भर से नहीं बनेगी बात; भारतीय फुटबॉल में जान फूंकने की कोशिश, 14 फरवरी से आखिरकार शुरू होगा ISL
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं