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वैशाली ने रचा इतिहास, शह-मात के खेल में पहली बार किसी महिला खिलाड़ी ने जीता कैंडिडेट्स का खिताब

आर प्रज्ञानंदा की बहन ग्रैंडमास्टर आर. वैशाली ने ‘कैंडिडेट्स’ का खिताब जीतकर तहलका मचा दिया है. वो पहली भारतीय महिला शतरंज खिलाड़ी हैं जिन्होंने ये ख़िताब जीता है.

वैशाली ने रचा इतिहास, शह-मात के खेल में पहली बार किसी महिला खिलाड़ी ने जीता कैंडिडेट्स का खिताब
Grandmaster R. Vaishali

साइप्रस में चल रही शतरंज की ‘कैंडिडेट्स' प्रतियोगिता में ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानंदा की बहन ग्रैंडमास्टर आर. वैशाली ने ‘कैंडिडेट्स' का खिताब जीतकर तहलका मचा दिया है. वो पहली भारतीय महिला शतरंज खिलाड़ी हैं जिन्होंने ये ख़िताब जीता और वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए क्वालिफ़ाई कर लिया है. पिछली बार भारत के डी. गुकेश ऐसे ही ‘कैंडिडेट्स' का ख़िताब जीतकर 2024 में चीन के डिंग लिरेन को हराकर वर्ल्ड चैंपियन बने थे. 

ग्रैंडमास्टर प्रवीण थिप्से कहते हैं, “वैशाली सॉलिड खिलाड़ी हैं. बेहद टैलेंटेड. उन्होंने भारतीय महिला चेस में इतिहास बनाया है. और, एक और इतिहास दुहराने को है. इसी तरह डी गुकेश ने चीनी खिलाड़ी डिंग लिरेन को हराकर ख़िताब जीता था. वर्ल्ड चैंपियनशिप में वैशाली की टक्कर भी चीन की वर्ल्ड चैंपियन जु वेनजुन से होगी. जु वेनजुन से अबतक लगातार चीनी खिलाड़ियों को हराकर ख़िताब जीतती रही हैं. इस बार उनकी टक्कर एक भारतीय खिलाड़ी से होगी.”

कोनेरू हंपी रही हैं टी-20 जैसी रैपिड वर्ल्ड चेस चैंपियन 

ग्रैंडमास्टर प्रवीण थिप्से बताते हैं कि ग्रैंडमास्टर कोनेरू हंपी भी वर्ल्ड नंबर 2 रहते हुए वर्ल्ड चैंपियनशिप खेल चुकी हैं जहां वो 2010 में चीनी खिलाड़ी हु यिफ़ान से हार गई थीं. वैसे कोनेरू हंपी चेस टी-20 जैसी रैपिड वर्ल्ड चैंपियनशिप का खिताब दो बार जीत चुकी हैं. लेकिन इस तरह के क्लासिकल मैच को वो नहीं जीत सकीं थीं और वर्ल्ड चैंपियनशिप में उपविजेता रहीं थीं. 

1997 के बाद कैंडिडेट्स प्रतियोगिता नहीं आयोजित हो सकी. इस बार कैंडिडेट्स के लिए ग्रैंडमास्टर कोनेरु हंपी ने भी क्वालिफ़ाई किया था. मगर युद्ध की हालात को देखते हुए वो वहां नहीं गईं. सबसे पहला महिला कैंडिडेट्स टूर्नामेंट 1952 में खेला गया और 1997 तक चलता रहा. 2019 में FIDE ने इसे फिर से शुरू किया गया.  

वर्ल्ड चैंपियनशिप में चीन से टक्कर

कैंडिडेट्स टूर्नामेंट क्रिकेट या हॉकी के ‘चैंपियन्स ट्रॉफ़ी' जैसा टूर्नामेंट है. इस टूर्नामेंट के लिए दुनिया के बेहतरीन 8 खिलाड़ी ही क्वालिफ़ाई करते हैं. इस टूर्नामेंट में हर खिलाड़ी एक-दूसरे से दो-दो बार मैच खेलते हैं. चेन्नई की 24 साल की वैशाली ने 14 में से 8.5 अंकों के साथ टॉप करते हुए इस टूर्नामेंट का ख़िताब जीता है. फ़ाइनल राउंड में वैशाली ने यूक्रेन में जन्मीं रूस की ग्रैंडमास्टर कैटेरिना लैग्नो को हराकर ये सम्मानित ख़िताब अपने नाम किया. 

अब भारत की 84वीं ग्रैंडमास्टर वैशाली और ग्रैंडमास्टर जु वेनजुन की टक्कर इसी साल के आख़िर में किसी न्यूट्रल देश में होगी. चेस की दुनिया में फ़ैन्स अभी से ही इस महामुक़ाबले का इंतज़ार करने लगे हैं. अबतक इस टूर्नामेंट को दुनिया के सिर्फ़ 5 देशों की महिला खिलाड़ियों ने जीता है. इस एलीट में शामिल होनेवाला भारत पांचवां देश बन गया है. 

कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतने वाले देश 

रूस-USSR 14 बार
चीन 4 बार
हंगरी 1 बार
जॉर्जिया 1 बार
भारत 1 बार

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