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EXCLUSIVE: भारतीय एथलेटिक्स के 48 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए लड़ी ज़िन्दगी और मौत की जंग, मेनस्ट्रीम मीडया में नहीं चमका सावन बरवाल का नाम

Sawan Barwal Broke 48 Year Old Record: नीदरलैंड्स के रॉटरडैम मैराथन में हिमाचल प्रदेश के मंडी के रहनेवाले 28 साल सावन बरवाल ने ज़िन्दगी और मौत की जंग लड़ते हुए भारतीय एथलेटिक्स का सबसे पुराना (48 साल पुराना) रिकॉर्ड तोड़ दिया.

EXCLUSIVE: भारतीय एथलेटिक्स के 48 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए लड़ी ज़िन्दगी और मौत की जंग, मेनस्ट्रीम मीडया में नहीं चमका सावन बरवाल का नाम
Sawan Barwal Broke 48 Year Old Record

हफ़्ते भर पहले, 26 अप्रैल को केन्या के सैबैस्टियन सावे ने लंदन मैराथन में 2 घंटे से कम समय में फ़िनिश लाइन को पार कर इतिहास बना दिया. केन्या से लेकर दुनिया भर के देश अब सेबैस्टियन सावे की जीत का जश्न मना रहे हैं. लेकिन उससे सिर्फ़ दो हफ़्ते पहले नीदरलैंड्स के रॉटरडैम मैराथन (45th NN Marathon Rotterdam) में हिमाचल प्रदेश के मंडी के रहनेवाले 28 साल सावन बरवाल ने ज़िन्दगी और मौत की जंग लड़ते हुए भारतीय एथलेटिक्स का सबसे पुराना (48 साल पुराना) रिकॉर्ड तोड़ दिया. मगर कुछ मुख्य अख़ाबरों को छोड़ दें, तो उन्हें वो लाइमलाइट नहीं मिल पाया जिसके वो हक़दार हैं.

हिमाचल के मंडी में सावन बरवाल के घर 3 दिनों बाद 4 मई को शहनाई बजने वाली है. सावन बरवाल खुद अपनी शादी की तैयारी में व्यस्त हैं. लेकिन वक्त निकालकर NDTV से EXCLUSIVE बात करते हुए सावन बरवाल बताते हैं कि अपने जीवन के पहले ही मैराथन में शिवनाथ सिंह का 48 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़कर वो बेहद उत्साहित हैं. 

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सावन बरवाल के साथ उनके कोच यूनुस ख़ान और स्कॉट साइमन को लगता है कि भारत में मैराथन का कल्चर बहुत बढ़िया हुआ है और इस वजह से वो भारतीय मैराथन का भविष्य सुनहरा देखते हैं. सावन बरवाल ने NDTV EXCLUSIVE में अपने संघर्ष, रिकॉर्ड, नए सुपर शूज़ और 2026 के एशियाड से लेकर लॉस एंजेल्स 2028 में अपने टारगेट को लेकर खुलकर बात की:   

सवाल: बीता अप्रैल मैराथन के लिए रिकॉर्ड-ब्रेकिंग महीना साबित हुआ. केन्या के सैबैस्टियन सावे ने 2 घंटे से कम समय में मैराथन पूरा कर सबको हैरान कर दिया है. लेकिन रॉटरडैम में जो आपने भारतीय मैराथन के लिए किया वो भी किसी कारनामे से कम नहीं. उसके फ़िनिश लाइन की कहानी बेहद रोचक है. 

सावन बरवाल: जी बिल्कुल. ये मेरे जीवन का पहला मैराथन कंपीटिशन था. फ़िनिश लाइन के 100-150 मीटर पहले मेरा लय टूट गया. आख़िरी 50 मीटर में तो ब्लैक आउट हो गया. लेकिन मेरे ज़ेहन में इसे फ़िनिश करना और हमारे सीनियर शिवनाथ सिंह का रिकॉर्ड भी चल रहा था. मुझे ये रेस हर हाल में फ़िनिश करनी थी. मैं बेहद खुश हूं कि मैंने 2:11:58 में मैराथन पूरी की और शिवनाथ सर का रिकॉर्ड 2 सेकेंड (2:12:00) से तोड़ दिया.

सवाल: आप शिवनाथ सिंह सर के रिकॉर्ड से पहले वाकिफ़ थे? ये रिकॉर्ड तोड़ना कितना अहम है?

सावन बरवाल: शिवनाथ सर भी आर्मी में थे तो सभी लॉन्ग डिस्टेंस रनर उनका नाम बड़े ही सम्मान से लेते हैं. सभी को उनके रिकॉर्ड के बारे में अच्छी तरह पता है. उन्होंने 1978 में जालंधर मैराथन में ये अनोखा रिकॉर्ड बनाया था. उनकी टाइमिंग को बेहतर करना मेरे लिए गर्व की बात है.

सवाल: आपके लिए 5000 मीटर-10,000 मीटर से मैराथन तक का सफ़र कैसा रहा है?

सावन बरवाल: मैं पहले मंडी के जोगिन्दर नगर की पहाड़ियों और स्कूल टाइम में 5000 मीटर और 10,000 मीटर की रेस ही भागता था. मैंने स्टेट और नेशनल लेवल पर कई मेडल जीते. 2019 में मैने स्पोर्ट्स कोटा से आर्मी ज्वाइन की. 2021 से लेकर 2025 तक मैं फिर से 5000 और 10,000 मीटर भागने लगा. एथलेटिक्स फ़ेडरेशन के कोच स्कॉट साइमन (Scott Simon) ने मुझे कहा कि मैं मैराथन दौड़ूं. पिछले दो-तीन साल से मैंने कोच स्कॉट साइमन और कोच यूनुस ख़ान के साथ कन्नूर, वेलिंगटन और ऊटी में ट्रेनिंग शुरू कर दी. कोच साइमन स्कॉट की ट्रेनिंग में प्रैक्टिस में मैं और बेहतर मैराथन दौड़ रहा हूं.

सवाल: आपको क्या लगता है, आप इस रिकॉर्ड को और कितना बेहतर कर सकते हैं? और भी भारतीय एथलीट हैं जो इस रिकॉर्ड से बेहतर भाग सकते हैं?

सावन बरवाल: जैसा कि मैंने आपको बताया कि ये मैरा पहला मैराथन कंपीटिशन था. ज़ाहिर तौर पर मुझे अब कहीं बेहतर अनुभव है. पहले मैराथन में रॉटरडैम (नीदरलैंड्स में) मुझे बहुत ठंड भी लग गई थी. सही मायने में मैंने इसके लिए तकरीबन 6 महीने ही प्रैक्टिस की थी. मुझे वेलिंगटन-ऊटी में हाई ऑल्टीट्यूड ट्रेनिंग करनी है. मौक़ा मिला तो केन्या भी जाऊंगा. वहां दौड़ने के लिए कई ग्रुप मिल जाते हैं तो आपकी तैयारी अच्छी हो जाती है. मैराथन में पेस सेटर भी होते हैं. आपके लिए अकेले मैराथन भागना आसान नहीं होता. मेरे कोच कहते हैं कि मैं 2 घंटा 8 मिनट का बैरियर भी तोड़ सकता हूं. 

जहां तक दूसरे भारतीय मैराथन एथलीट की बात है तो देश में इसका कल्चर पिछले 7-8 साल में बहुत बेहतर हुआ है. मैं कोई नाम तो नहीं कह सकता, लेकिन ऐसे कई एथलीट हैं जिन्हें आप आनेवाले दिनों में भारत के लिए अच्छी मैराथन रेस दौड़ते देख सकेंगे. 

सवाल: सैबैस्टियन सावे के sub-2 (2 घंटे से कम वक्त में) मैराथन के रिकॉर्ड के बाद Adidas के सुपर-शूज़ Adidas Adizero Adios Pro Evo 3 की बहुत चर्चा है. आप इसे कैसे देखते हैं?

सावन बरवाल: सैबेस्टियन सावे कमाल के एथलीट हैं. उन्होंने भी कुछ ही साल पहले मैराथन भागना शुरू किया और बहुत जल्दी रिकॉर्ड तोड़ दिया. वो पहले पेस-सेटर बनकर दौड़ते थे. मुझे लगता है कि वो कोई भी शूज़ पहनते तो रिकॉर्ड तोड़ सकते थे. रिकॉर्ड की वजह से उनके शूज़ (Adidas Adizero Adios Pro Evo 3, वज़न 97.27 ग्राम, साइज़ 9) की खूब चर्चा हो रही है.  मैं ASICS पहनकर दौड़ता हूं जिसका वज़न 158 ग्राम है. तो ये शूज़ भी बेहतर हैं.

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