मीराबाई चानू ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय भारोत्तोलन में उनका दबदबा अब भी कायम क्यों है और मणिपुर की इस स्टार भारोत्तोलक ने रविवार को यहां राष्ट्रमंडल खेलों की महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया. मीराबाई की जीत को लेकर किसी तरह का संदेह नहीं था. बस सवाल यह था कि मीराबाई अपनी क्षमता को कितना आगे ले जाएंगी और 31 साल की इस सुपरस्टार ने ताकत और संयम के शानदार प्रदर्शन के साथ रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज कराते हुए जबरदस्त अंदाज में जवाब दिया. मीराबाई को अपना वजन बनाए रखने के लिए दो दिन तक खाना तक छोड़ना पड़ा. उन्होंने स्नैच स्पर्धा में राष्ट्रमंडल और राष्ट्रमंडल खेलों का नया रिकॉर्ड बनाया जबकि क्लीन एंव जर्क और कुल वजन में भी राष्ट्रमंडल खेलों के नए कीर्तिमान स्थापित किए.मीराबाई ने कुल 190 किलोग्राम, स्नैच में 85 किलोग्राम और क्लीन एंव जर्क में 105 किलोग्राम वजन उठाया.
This is the Real Youth... This legend Named Mirabai Chanu represents India not the filth girls of Jantar Mantar! pic.twitter.com/aB4JupHPjO
— Vineeta Singh 🇮🇳 (@biharigurl) July 26, 2026
पदक मंच पर सबसे ऊंचे स्थान पर खड़े होकर राष्ट्रगान गाते समय उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े. उनके बालों में तिरंगे के रंग की रिबन भी सजी हुई थी. मीराबाई ने पत्रकारों से बातचीत में सबसे पहले कहा, ‘जल्दी-जल्दी करो, मैंने दो दिन से कुछ खाया नहीं है.' तोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई के लिए यह दिन बेहद भावुक रहा. अपनी मां और कोच विजय शर्मा के समर्थन का जिक्र करते हुए वह एक बार फिर भावुक हो गईं.
उन्होंने कहा, ‘उन्होंने हर अच्छे-बुरे समय में मेरा साथ दिया है. परिवार और दोस्तों की उम्मीदों का मुझ पर काफी दबाव था. भारत के लिए तीसरा स्वर्ण पदक जीतकर बहुत खुशी हो रही है. मैं इन खेलों में खुद पर ज्यादा जोर नहीं डालना चाहती थी, लेकिन मेरा पहला प्रयास असफल रहा. कोच और मैंने पहले से तय किया था कि मैं दोनों स्पर्धाओं में केवल दो-दो प्रयास ही करूंगी.'
पहली कोशिश में नाकाम रहीं मीरा
मीराबाई का मुकाबला तब शुरू हुआ, जब बाकी सभी प्रतिभागी अपना प्रदर्शन पूरा कर चुकी थीं. हालांकि, इस स्वर्णिम सफर की शुरुआत थोड़ी तनावपूर्ण रही. स्नैच में 82 किलोग्राम के अपने पहले प्रयास में वह सफल नहीं हो सकीं. लेकिन एक सच्ची चैंपियन की तरह उन्होंने तुरंत वापसी की और अपने शानदार जज्बे तथा अनुभव का परिचय देते हुए लय हासिल कर ली. यही गुण उनके पूरे करियर की पहचान रहे हैं. क्लीन एंव जर्क में भी उन्हें शुरुआती झटका लगा और वह अपने पहले प्रयास में 105 किलोग्राम वजन उठाने में सफल नहीं हो सकीं. हालांकि, ओलंपिक रजत पदक विजेता मीराबाई ने दूसरे प्रयास में उसी 105 किलोग्राम वजन को बेहद सहजता से उठाकर स्वर्ण पदक लगभग सुनिश्चित कर दिया. इस सफल प्रयास के साथ उन्होंने क्लीन एंव जर्क और कुल वजन, दोनों में राष्ट्रमंडल खेलों के नए रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिए.
स्वर्ण पदक लगभग तय हो जाने के बाद मीराबाई ने कोई अनावश्यक जोखिम नहीं लिया और दो महीने से भी कम समय बाद होने वाले एशियाई खेलों को ध्यान में रखते हुए अपना तीसरा प्रयास नहीं किया. उन्होंने कहा, ‘अपना वजन नियंत्रित करना बेहद मुश्किल होता है. किसी भी खिलाड़ी के लिए वजन कम रखना बहुत बड़ी चुनौती है. जब मैं 48 किलोग्राम वर्ग में खेलती हूं, तो यह और भी कठिन हो जाता है क्योंकि मेरे पास वजन कम करने की बहुत कम गुंजाइश बचती है.'
इस स्टार भारोत्तोलक ने कहा, ‘इस बार तय वजन तक पहुंचने के लिए मुझे सब कुछ छोड़ना पड़ा, मैंने तीन दिनों तक खाना नहीं खाया और पानी भी नहीं पिया. मेरा सामान्य वजन 50.5 किलोग्राम है. 49 किलोग्राम वर्ग के लिए मुझे लगभग 1.5 किलोग्राम वजन कम करना पड़ता है, लेकिन 48 किलोग्राम वर्ग के लिए इससे भी ज्यादा वजन घटाना पड़ता है, जो वास्तव में बहुत कठिन है.'
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