Commonwealth Games 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की शुरुआत 23 जुलाई से हो चुकी है, जिसमें 74 देशों के करीब 3 हजार एथलीट्स 10 खेलों में हिस्सा लेंगे. इनमें 215 गोल्ड मेडल दांव पर होंगे. गेम्स के दूसरे दिन यानी 24 जुलाई को बॉक्सिंग का मुकाबला दोपहर 3:30 बजे से शुरू होगा. इस दौरान भारत की युवा मुक्केबाज प्रीति पवार पर नजरें रहेगी.
मैच से पहले प्रीति किसी भी चीज को हल्के में नहीं ले रही हैं. 22 साल की बैंथमवेट (54 किग्रा) मुक्केबाज प्रीति पिछले तीन साल में भारत की सबसे होनहार मुक्केबाजों में से एक बनकर उभरी हैं. उन्होंने मुश्किलों का सामना करते हुए लगातार पदक जीते हैं. प्रीति ने 2023 में सीनियर विश्व चैंपियनशिप में डेब्यू करते हुए प्री-क्वार्टर फाइनल से बाहर होने के बावजूद प्रभावित किया. उसी साल बाद में उन्होंने हांग्झोउ एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतकर पेरिस ओलंपिक के लिए कोटा हासिल करके वापसी की.
‘हेपेटाइटिस ए' ने तोड़ा ओलंपिक में मेडल का सपना
हालांकि ‘हेपेटाइटिस ए' होने के कारण उनका ओलंपिक अभियान बाधित हो गया. बीमारी से तैयारी पर असर पड़ने के बावजूद वह राउंड 16 तक पहुंचीं. इस अनुभव ने उनके नजरिए को और अधिक संतुलित बना दिया है. प्रीति ने पीटीआई से बातचीत में कहा, 'मैं राष्ट्रमंडल खेलों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहती हूं और भारत के लिए पदक पदक जीतना चाहती हूं. देखते हैं क्या होता है क्योंकि कभी-कभी हम कुछ योजना बनाते हैं लेकिन चीजें वैसी नहीं होतीं जैसी हम चाहते हैं.'
ब्रेक के बाद प्रीति ने गोल्ड पर किया कब्जा
ओलंपिक के बाद लंबे ब्रेक के बाद प्रीति ने जबरदस्त वापसी की. उन्होंने 2025 विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल में गोल्ड मेडल जीता और फिर स्पेन में बॉक्सम एलीट इंटरनेशनल टूर्नामेंट में रजत पदक हासिल किया. इसके बाद उन्होंने कड़े मुकाबले के बीच एशियाई चैंपियनशिप का खिताब जीता. एशियाई चैंपियनशिप का गोल्ड मेडल भी महत्वपूर्ण हो गया क्योंकि इस साल के आखिर में एशियाई खेलों में भी कई वही प्रतिद्वंद्वी शामिल हो सकते हैं.
2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक पर प्रीति की नजर
उन्होंने कहा, 'यह एक अच्छा मुकाबला था और एशियाई खेलों की तैयारी के लिए बहुत अच्छा था क्योंकि वहां भी मुझे वही प्रतिद्वंद्वी मिलेंगे. इसने मेरे आत्मविश्वास को बढ़ाने का काम किया है. वहां मेरा प्रदर्शन एक अच्छा संकेत था.' हालिया सफलता के बावजूद प्रीति का मानना है कि सुधार की काफी गुंजाइश है क्योंकि वह 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रही हैं.
उन्होंने कहा, 'मैं यह नहीं कहूंगी कि मैं अभी अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में हूं. लेकिन पिछले सेशन के अंत और इस नए सेशन की शुरुआत को देखते हुए, मेरा प्रदर्शन अच्छा रहा है. फिर भी कुछ चीजें हैं जिन पर मुझे काम करना है. मेरा लक्ष्य ओलंपिक है. मैं कोई भी मौका चूकना नहीं चाहती.'
भिवानी के जाट परिवार में हुआ प्रीति का जन्म
प्रीति का जन्म भिवानी (हरियाणा) के एक जाट परिवार में हुआ था, जो बॉक्सिंग के टैलेंट के लिए मशहूर है. उनके माता-पिता खुद भी पहले एथलीट रह चुके थे. उन्होंने बेटी के करियर को संवारने में अहम भूमिका निभाई. उनकी काबिलियत पर माता-पिता के भरोसे से प्रेरित होकर, प्रीति ने कम उम्र में ही बॉक्सिंग शुरू कर दी. पेंटिंग में टैलेंट और पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद, उन्होंने परिवार के सपोर्ट और बॉक्सिंग कोच रहे अपने चाचा से प्रेरित होकर बॉक्सिंग को ही अपना करियर बनाने का फैसला किया.
प्रीति के चाचा ने पहचानी बेटी की काबिलियत
प्रीति एक ऐसे परिवार से आती हैं जो उन्हें बहुत सपोर्ट करता है और खेलों में रुचि रखता है. उनके पिता हरियाणा पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर हैं, और उनकी मां ने हमेशा उन्हें अपने सपने पूरे करने के लिए प्रोत्साहित किया है. उनके चाचा ने बहुत पहले ही उनकी काबिलियत को पहचान लिया था और उन्हें बॉक्सिंग की ओर आगे बढ़ने में मदद की. एक बॉक्सर के तौर पर उनके विकास में परिवार के सामूहिक सहयोग की अहम भूमिका रही है.
प्रीति पवार की पर्सनल लाइफ
बॉक्सिंग करियर के अलावा, प्रीति को कला में भी बहुत रुचि है. उन्हें स्केचिंग करने से सुकून और एकाग्रता मिलती है. वे अक्सर खाली समय में बारीकियों वाली ड्राइंग बनाती हैं. यह शौक तनाव दूर करने और प्रेरित रहने का एक जरिया है. प्रीति के स्केच बहुत निजी होते हैं और वे इन्हें सिर्फ़ अपने करीबी लोगों के साथ ही साझा करती हैं. उनकी कलात्मक प्रतिभा तब सामने आई जब उन्होंने साथी बॉक्सर निखत ज़रीन को एक स्केच तोहफ़े में दिया, जिसमें निखत को मुस्कुराते हुए और 'ईद मुबारक' का पोस्टर लिए हुए दिखाया गया था.
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