एशियाई चैम्पियनशिप कांस्य पदक विजेता ज्ञानेश्वरी यादव ने राष्ट्रमंडल खेलों की भारोत्तोलन स्पर्धा में महिलाओं के 53 किलो वर्ग में रिकार्ड की झड़ी के बीच सोमवार को रजत पदक जीता. छत्तीसगढ के भोंडिया गांव की ज्ञानेश्वरी ने स्नैच में 88 किलो और क्लीन एंड जर्क में 111 किलो समेत कुल 199 किलो वजन उठाया. नाइजीरिया की ओनोमे ओमोलोला ने राष्ट्रमंडल और राष्ट्रमंडल खेलों का रिकॉर्ड तोड़कर 206 किलो वजन उठाते हुए स्वर्ण पदक जीता. उन्होंने स्नैच में 93 किलो और क्लीन एंड जर्क में 113 किलो वजन उठाया. कनाडा की रेबेका ग्राउल ने 178 किलो वजन उठाकर कांस्य पदक जीता.
आंकड़े हालांकि पूरी कहानी नहीं बताते. यहां दो युवा भारोत्तोलकों के बीच एक जबरदस्त मुकाबला देखने को मिला, जिसमें कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं था. लगभग हर सफल कोशिश के बाद अधिकारियों को नया खेल रिकॉर्ड दर्ज करने के लिए तेजी दिखानी पड़ी, क्योंकि ज्ञानेश्वरी और ओनोमे के बीच कड़ी टक्कर चल रही थी और इस मुकाबले ने खचाखच भरे स्टेडियम में दर्शकों को अपनी सीटों से उठने पर मजबूर कर दिया.
Gyaneshwari Yadav bags silver in the Women's 53kg weightlifting event at Commonwealth Games 2026 🥈 🏋🏼 🇮🇳
— Sony LIV (@SonyLIV) July 27, 2026
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स्नैच में ज्ञानेश्वरी के तीनों लिफ्ट साफ सुथरे थे. क्लीन एंड जर्क में शानदार मुकाबला रहा. भारतीय खिलाड़ी ने 107 किलो वजन उठाकर खेलों का नया रिकॉर्ड बनाया लेकिन ओनोमे ने तुरंत ही 110 किलो वजन उठाकर यह रिकॉर्ड तोड़ दिया.
ज्ञानेश्वरी भी हार मानने को तैयार नहीं थी जिन्होंने 111 किलो वजन उठाकर फिर रिकॉर्ड अपने नाम किया. यह रिकॉर्ड हालांकि एक मिनट ही उनके नाम रहा और ओनोमे ने 113 किलो वजन उठाकर फिर रिकॉर्ड पर कब्जा कर लिया. भारोत्तोलन में यह भारत का चौथा और कुल पांचवां पदक है.
23 साल की यह खिलाड़ी पहले 49kg कैटेगरी में हिस्सा लेती थीं, लेकिन चूंकि मीराबाई चानू का इस कैटेगरी पर दबदबा है, इसलिए उन्होंने मेडल जीतने के लिए एक वेट कैटेगरी ऊपर जाने का फैसला किया.
मीराबाई की गैर-मौजूदगी में उन्होंने 49kg कैटेगरी में नेशनल चैंपियनशिप तो जीती, लेकिन उन्हें एहसास हुआ कि भारत की अब तक की सबसे बेहतरीन वेटलिफ्टर्स में से एक को उनके ही खेल में हराना फिलहाल मुमकिन नहीं है. इसीलिए उन्होंने कैटेगरी बदली, और सच कहूं तो यह फैसला बहुत कामयाब रहा.
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