बिहार सारण छपरा के लाल और भारतीय नौसेना के जवान शैलेश कुमार ने दुनिया की सबसे कठिन अल्ट्रा मैराथन प्रतियोगिताओं में शामिल बैडवाटर-135 को सबसे तेज़ पूरा कर इतिहास रच दिया है. शैलेश ने अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित डेथ वैली में आयोजित 21 7 किलोमीटर लंबी इस चुनौतीपूर्ण दौड़ को 29 घंटे 28 मिनट 37 सेकंड में पूरा किया. इसके साथ ही वह सबसे तेज समय में बैडवाटर-135 पूरी करने वाले पहले भारतीय बन गए.
सबसे मुश्किल मैराथन रेसों में से एक है
शैलेश ने अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित डेथ वैली में आयोजित 217 किलोमीटर लंबी इस चुनौतीपूर्ण दौड़ को 29 घंटे 28 मिनट 37 सेकंड में पूरा किया. इसके साथ ही वह सबसे तेज समय में बैडवाटर-135 पूरी करने वाले पहल भारतीय बन गए हैं. अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित डेथ वैली में आयोजित होने वाली बैडवाटर-135 करीब 135 मील यानी लगभग 217 किलोमीटर लंबी है. भीषण गर्मी, तपते रेगिस्तानी रास्ते और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इसे दुनिया की सबसे कठिन अल्ट्रा मैराथन स्पर्धाओं में गिना जाता है. ऐसे कठिन हालात में शैलेश ने अपनी दृढ़़ इच्छाशक्ति और लंबे प्रशिक्षण के दम पर शानदार प्रदर्शन किया.
सारण के छोटे गांव से अंतरराष्ट्रीय मंच तक
शैलेश कुमार मूल रूप से सारण जिले के गड़खा प्रखंड के कमालपुर गांव के निवासी हैं. किसान परिवार से आने वाले शैलेश का बचपन ग्रामीण परिवेश में बीता. वर्ष 2013 में वह भारतीय नौसेना में शामिल हुए और वर्तमान में केरल के कोच्चि स्थित नेवल एयरक्राफ्ट यार्ड में कार्यरत हैं.
पहली बड़ी अल्ट्रा रेस में हासिल किया था तीसरा स्थान
वर्ष 2018 में शैलेश ने गजरात के धोलावीरा में आयोजित रन द रण 101 किलोमीटर अल्ट्रा मैराथन में हिस्सा लिया. अपने पहले बडे़ अल्टा इवेंट में ही उन्होंने तीसरा स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया. इसके बाद उन्होंने देश और विदेश की कई प्रतिष्ठित और कठिन अल्ट्रा मैराथन प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया. ग्रीस की 246 किलोमीटर लंबी स्पार्टाथलॉन दौड को उन्होंने 33 घंटे 56 मिनट 22 सेकंड में पूरा किया. इसके अलावा फोर्ट अल्ट्रा व्हाइट सड अल्ट्रा, हेनर बबू अल्ट्रा, सोलंग स्काई अल्ट्रा, मलनाड अल्ट्रा और ला अल्ट्र जैसी कठिन प्रतियोगिताओं में भी अपनी क्षमता साबित की
6 महीने की तैयारी, 3000 किलोमीटर से ज्यादा दौड़
बेडवाटर-135 जैसी कठिन प्रतियोगिता के लिए शैलेश ने करीब छह महीने तक कड़ा प्रशिक्षण किया. इस दौरान उन्होंने 3000 किलोमीटर से अधिक दौड़कर खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार किया. छपरा के एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन करने वाले शैलेश कुमार की उपलब्धि बिहार और देश के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है. उन्होंने साबित कर दिया कि मजबूत इरादे, अनुशासन और लगातार मेहनत के बल पर दुनिया की बड़ी से ब़डी चुनौती को भी पार किया जा सकता है.
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