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Anahat Singh: Gen Z सेंनसेशन, 14 साल की उम्र में लिया था कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा, अब स्क्वॉश में इतिहास रचा

दिल्ली की अनाहत एथलीटों के परिवार से आती हैं. उनके माता-पिता हॉकी के खिलाड़ी रहे, जबकि उनके अंकल ने टेनिस खेला है.

Anahat Singh: Gen Z सेंनसेशन, 14 साल की उम्र में लिया था कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा, अब स्क्वॉश में इतिहास रचा
Anahat Singh: Gen Z sensation participated in Commonwealth Games at 14

भारत की बेहतरीन खिलाड़ी अब विश्व चैंपियन बन गई हैं. कनाडा में अनाहत सिंह ने इतिहास रच दिया है. वह वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप का खिताब जीतने वाली देश की पहली एथलीट बन गईं हैं. शनिवार को गर्ल्स सिंगल्स फ़ाइनल में, इस युवा स्टार ने मिस्र की रुकैया सलेम को 3-0 (11-3, 11-7, 11-9) से हराकर शानदार जीत हासिल की. ​इसके साथ ही, अनाहत ने जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप खिताब के लिए भारत के लंबे इंतज़ार को खत्म कर दिया और 2005 में जोशना चिनप्पा के रनर-अप रहने के रिकॉर्ड से बेहतर प्रदर्शन किया. 

'अभिशाप से चैंपियन तक'

विश्व रैंकिंग में 20वें स्थान पर काबिज अनाहत ने पिछले साल भी इस प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया था और सेमीफाइनल तक पहुंचकर कांस्य पदक जीता था. इस बार उन्होंने एक कदम आगे बढ़ते हुए विश्व जूनियर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया. अनाहत ने खिताब जीतने के बाद कहा,"यह मेरे लिए बहुत मायने रखता है. मुझे अब भी ऐसा लग रहा है जैसे मैं सपना देख रही हूं."

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दिल्ली की इस 18 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा,"पिछले चार सालों से मैं सेमीफाइनल और क्वार्टर फाइनल में हार रही थी. अगर कोई मुझसे पूछे तो मैं हमेशा यही कहती हूं,'यह टूर्नामेंट मेरे लिए अभिशाप है' और मैं इस प्रतियोगिता में कभी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई हूं." 

आखिरी मौके पर मारा चौका

अनाहत की यह जीत और भी खास है क्योंकि जूनियर सर्किट में यह उनका आखिरी साल था. उन्होंने कहा,"जूनियर स्तर पर यह मेरा आखिरी साल है और इसे जीतने का यह मेरे पास आखिरी मौका था। इसलिए यह मेरे लिए बहुत मायने रखता है."

पीवी सिंधू से हुईं थीं प्रेरित

2008 में जन्मी अनाहत ऐसे परिवार से हैं जहां खेल उनके खून में है. उनके पिता गुरशरण सिंह और मां तानी वढेरा फील्ड हॉकी खेलते थे, जबकि उनके चाचा टेनिस खेलते थे. अनाहत ने सबसे पहले बैडमिंटन खेलना शुरू किया था, क्योंकि वह कोर्ट पर पीवी सिंधु के शानदार प्रदर्शन से प्रेरित थीं. हालांकि, उन्हें असल में स्क्वॉश में ही अपनी असली जगह मिली.

अनाहत ने शुरुआत में बस ऐसे ही स्क्वॉश खेलना शुरू किया था, लेकिन कुछ टूर्नामेंट के बाद उन्हें यह खेल बहुत पसंद आने लगा और उन्होंने इसे प्रोफेशनल तौर पर खेलने का फैसला किया. सिर्फ़ 14 साल की उम्र में, अनाहत सिंह ने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली सबसे कम उम्र की एथलीट बनकर वैश्वित स्तर पर अपनी पहचान बनाई.

2019 में मिली पहली बड़ी कामयाबी

अनाहत को बड़ी कामयाबी 2019 में मिली थी, तब उन्होंने ब्रिटिश जूनियर ओपन अंडर-11 का खिताब जीता था, साथ ही यूरोपियन, डच और स्कॉटिश जूनियर ओपन के खिताब भी अपने नाम किए थे. 

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2021 में भी उनका शानदार सफ़र जारी रहा और उन्होंने फ़ाइनल में मिस्र की जायदा मारेई को हराकर US जूनियर ओपन का खिताब जीता. 2022 तक, अनाहत ने अपनी तेज़ी से बढ़ती उपलब्धियों की लिस्ट में एशियन जूनियर चैंपियनशिप अंडर-15 की ट्रॉफी के साथ-साथ जर्मन और डच जूनियर ओपन के खिताब भी शामिल कर लिए.

2025 में, अनाहत को पीएसए अवार्ड्स में यंग प्लेयर ऑफ द ईयर और चैलेंजर प्लेयर ऑफ द ईयर नामित किया गया था. इसके बाद उन्होंने विश्व कप में स्वर्ण पदक, एशियाई चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक और विश्व जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता. जबकि रविवार को खिताब जीतने के बाद उन्होंने मिस्र के 15 साल के प्रभुत्व को समाप्त कर दिया.

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