केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह...
- गिरिराज सिंह के नसबंदी से जुड़े विवादित बयान का समर्थन
- शिवसेना ने कहा, उन्होंने जो कहा, सही कहा.
- देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की मांग करनी चाहिए .
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मुंबई:
भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के नसबंदी से जुड़े विवादित बयान का गुरुवार को समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने अपने विचारों को व्यक्त करके कुछ भी गलत नहीं किया है.
शिवसेना ने कहा, ‘‘उन्होंने जो कहा, सही कहा. हालांकि सिर्फ नसबंदी पर जोर देने के बजाय, उन्हें देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की मांग करनी चाहिए थी.’’ शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में लिखे संपादकीय में कहा, ‘‘जनसंख्या विस्फोट का दानव देश को निगल रहा है. इस जनसंख्या वृद्धि में मुस्लिमों की संख्या का अनुपात ज्यादा है.’’
(शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे)
सिंह ने हाल ही में कहा था कि ‘नोटबंदी’ के बाद अब देश में तत्काल ही ‘नसबंदी’ के लिए कानून बनाने की जरूरत है.
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग राज्यमंत्री सिंह ने कहा था, ‘विश्व की कुल जनसंख्या का 17 प्रतिशत हिस्सा भारत में निवास करता है और इसमें हर साल ऑस्ट्रेलिया की जनसंख्या जितना इजाफा होता है. देश के पास वैश्विक भूमि का महज 2.5 प्रतिशत और जलीय संसाधनों का महज 4.2 प्रतिशत हिस्सा है. इस स्थिति में, जनसंख्या विस्फोट विकास की दिशा में एक बड़ा रोड़ा साबित हो रहा है. इस समस्या से उबरने के लिए हमें जनसंख्या नियंत्रण कानून की जरूरत है.’
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
शिवसेना ने कहा, ‘‘उन्होंने जो कहा, सही कहा. हालांकि सिर्फ नसबंदी पर जोर देने के बजाय, उन्हें देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की मांग करनी चाहिए थी.’’ शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में लिखे संपादकीय में कहा, ‘‘जनसंख्या विस्फोट का दानव देश को निगल रहा है. इस जनसंख्या वृद्धि में मुस्लिमों की संख्या का अनुपात ज्यादा है.’’

सिंह ने हाल ही में कहा था कि ‘नोटबंदी’ के बाद अब देश में तत्काल ही ‘नसबंदी’ के लिए कानून बनाने की जरूरत है.
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग राज्यमंत्री सिंह ने कहा था, ‘विश्व की कुल जनसंख्या का 17 प्रतिशत हिस्सा भारत में निवास करता है और इसमें हर साल ऑस्ट्रेलिया की जनसंख्या जितना इजाफा होता है. देश के पास वैश्विक भूमि का महज 2.5 प्रतिशत और जलीय संसाधनों का महज 4.2 प्रतिशत हिस्सा है. इस स्थिति में, जनसंख्या विस्फोट विकास की दिशा में एक बड़ा रोड़ा साबित हो रहा है. इस समस्या से उबरने के लिए हमें जनसंख्या नियंत्रण कानून की जरूरत है.’
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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