नवी मुंबई हवाई अड्डे के निर्माण स्थल का दृश्य.
- विस्थापितों के पुनर्वास का सवाल अनसुलझा
- पिछले बुरे अनुभवों के कारण अड़ गए ग्रामीण
- बुनियादी सुविधाओं के साथ पुनर्वास चाहते हैं गांव वाले
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मुंबई:
नवी मुंबई एयरपोर्ट से पहली फ्लाइट शायद ही 2019 में उड़ान भर पाए. एयरपोर्ट के लिए बोली लगाने में चौथी भागीदार को सुरक्षा मंजूरी तो मिल गई है, लेकिन अब बोली प्रक्रिया जिसे सितंबर में होना था, की अवधि को और आगे बढ़ाया जाएगा. लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी विस्थापितों का पुनर्वास है जो अभी तक अपनी जमीन छोड़ने को पूरी तरह से तैयार नहीं हैं.
नवी मुंबई में उलवे के आस-पास का इलाका नए एयरपोर्ट के लिए तैयार हो रहा है. पहाड़ काटे जा रहे हैं. इलाके में बड़ी-बड़ी मशीनें और ट्रक नजर आ रहे हैं. चिंचपाड़ा जैसे गांव नवी मुंबई बसाने के लिए 40 साल पहले भी अपनी जमीन, खेत-खलिहान कुर्बान कर चुके हैं. इन गांवों के लोगों का आरोप है कि मुआवजे के नाम पर शहर के प्रशासक सिडको की बेरुखी से उनके जख्म हरे हो जाते हैं.
चिंचपाड़ा के मोहन परदेसी ने साफ कह दिया है वे अपनी जमीन बगैर बुनियादी सुविधाओं के नहीं छोड़ेंगे. वहीं संजय पाटिल का कहना है कि उनकी जमीन लीज़ पर ली जा रही है, ऊपर से स्कूल, ड्रेनेज, अस्पताल जैसी सुविधाएं नहीं दी गई हैं. ऐसे में वे अपनी जमीन कैसे दे सकते हैं. चिंचपाड़ा के सरपंच शशिकांत भोईर का कहना है हम चाहते हैं देश की प्रगति हो, हम उसमें अवरोध नहीं बनेंगे, लेकिन हम अपनी जमीन अपना घर छोड़ रहे हैं ऐसे में हमारी सारी मांगें मानी जानी चाहिए. 
दस गांवों के तकरीबन 3000 लोग पुनर्वास पैकेज को मान चुके हैं. अगस्त के बाद उन्हें जमीन खाली करनी थी. हवाई पट्टी और बुनियादी सुविधाओं के लिए ही 671 हैक्टेयर जमीन की जरूरत है. इसमें से 556 हैक्टेयर पर खेत हैं. परियोजना के लिए लोगों के घर, खेत सब अधिगृहीत किए जाएंगे लेकिन पुनर्वास के पुराने अनुभवों के आधार पर खुद सिडको भी मानती है कि लोगों के मन में शंका है. सिडको के जनसंपर्क अधिकारी मोहन निनावणे का कहना है कि ''90 के दशक में जिन लोगों से जमीन ली गई थी उनसे किए गए कई वादे पूरे नहीं हुए हैं. ऐसे में विस्थापितों के मन में संशय है. लेकिन विमानतल के लिए किया जा रहे जमीन अधिगृहण में विस्थापितों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है."
नवी मुंबई एयरपोर्ट का बुनियादी काम दिसंबर 2016 तक शुरू करने और दिसंबर 2019 में खत्म करने का लक्ष्य है. नए एयरपोर्ट से एक करोड़ मुसाफिर और 2.3 लाख टन माल ढुलाई करने की कोशिश है. कुछ दिनों पहले नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू के कल्याण एयरपोर्ट के हवाई दौरे से कयास लगे कि शायद नवी मुंबई एयरपोर्ट को शिफ्ट किया जा सकता है, लेकिन बाद में सफाई आई कि इस दौरे का मकसद सिर्फ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की संभावनाएं तलाशना था.
नवी मुंबई में उलवे के आस-पास का इलाका नए एयरपोर्ट के लिए तैयार हो रहा है. पहाड़ काटे जा रहे हैं. इलाके में बड़ी-बड़ी मशीनें और ट्रक नजर आ रहे हैं. चिंचपाड़ा जैसे गांव नवी मुंबई बसाने के लिए 40 साल पहले भी अपनी जमीन, खेत-खलिहान कुर्बान कर चुके हैं. इन गांवों के लोगों का आरोप है कि मुआवजे के नाम पर शहर के प्रशासक सिडको की बेरुखी से उनके जख्म हरे हो जाते हैं.
चिंचपाड़ा के मोहन परदेसी ने साफ कह दिया है वे अपनी जमीन बगैर बुनियादी सुविधाओं के नहीं छोड़ेंगे. वहीं संजय पाटिल का कहना है कि उनकी जमीन लीज़ पर ली जा रही है, ऊपर से स्कूल, ड्रेनेज, अस्पताल जैसी सुविधाएं नहीं दी गई हैं. ऐसे में वे अपनी जमीन कैसे दे सकते हैं. चिंचपाड़ा के सरपंच शशिकांत भोईर का कहना है हम चाहते हैं देश की प्रगति हो, हम उसमें अवरोध नहीं बनेंगे, लेकिन हम अपनी जमीन अपना घर छोड़ रहे हैं ऐसे में हमारी सारी मांगें मानी जानी चाहिए.

दस गांवों के तकरीबन 3000 लोग पुनर्वास पैकेज को मान चुके हैं. अगस्त के बाद उन्हें जमीन खाली करनी थी. हवाई पट्टी और बुनियादी सुविधाओं के लिए ही 671 हैक्टेयर जमीन की जरूरत है. इसमें से 556 हैक्टेयर पर खेत हैं. परियोजना के लिए लोगों के घर, खेत सब अधिगृहीत किए जाएंगे लेकिन पुनर्वास के पुराने अनुभवों के आधार पर खुद सिडको भी मानती है कि लोगों के मन में शंका है. सिडको के जनसंपर्क अधिकारी मोहन निनावणे का कहना है कि ''90 के दशक में जिन लोगों से जमीन ली गई थी उनसे किए गए कई वादे पूरे नहीं हुए हैं. ऐसे में विस्थापितों के मन में संशय है. लेकिन विमानतल के लिए किया जा रहे जमीन अधिगृहण में विस्थापितों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है."
नवी मुंबई एयरपोर्ट का बुनियादी काम दिसंबर 2016 तक शुरू करने और दिसंबर 2019 में खत्म करने का लक्ष्य है. नए एयरपोर्ट से एक करोड़ मुसाफिर और 2.3 लाख टन माल ढुलाई करने की कोशिश है. कुछ दिनों पहले नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू के कल्याण एयरपोर्ट के हवाई दौरे से कयास लगे कि शायद नवी मुंबई एयरपोर्ट को शिफ्ट किया जा सकता है, लेकिन बाद में सफाई आई कि इस दौरे का मकसद सिर्फ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की संभावनाएं तलाशना था.
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