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This Article is From Apr 20, 2017

Exclusive : लाउडस्पीकर की अजान के खिलाफ लड़ता मुसलमान, सात मस्जिदों से उतारे भोंपू

Exclusive : लाउडस्पीकर की अजान के खिलाफ लड़ता मुसलमान,  सात मस्जिदों से उतारे भोंपू
मोहम्मद अली उर्फ बाबू भाई मस्जिदों में लाउडस्पीकर से अजान के खिलाफ मुहिम चला रहे हैं.
  • लाउडस्पीकर से दी हुई अजान को गैर इस्लामिक मानते हैं
  • धर्म 1400 साल पुराना और लाउडस्पीकर कुछ सौ साल पहले आया
  • कहा, लाउडस्पीकर को हटाने से धर्म को कोई खतरा नहीं
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मुंबई: जब देश में धर्मस्थलों पर बजते लाउडस्पीकर को लेकर बवाल मचा है तब मुंबई में एक ऐसी मुस्लिम शख्सियत सामने आई है जिसने मुसलमान होकर भी लाउडस्पीकर पर चलती अजान का खुलकर और लगातार विरोध किया है. मुम्बई के मोहम्मद अली उर्फ बाबूभाई 66 साल के नमाजी मुसलमान हैं और लाउडस्पीकर से दी हुई अजान को गैर इस्लामिक मानते हैं. अपनी बात को मनवाने के लिए ढलती उम्र में उन्होंने हाईकोर्ट में पिटीशन लगाई. पैसे कम थे इसलिए मामले में पैरवी खुद की और साबित किया कि कुरान को लाउडस्पीकर की अज़ान गंवारा नहीं.

NDTV से एक्सलूसिव बातचीत में याचिकाकर्ता मोहम्मद अली उर्फ बाबूभाई ने कहा कि लाउडस्पीकर का इस्तेमाल धर्म का हिस्सा नहीं है. न ही यह बुनियादी है. क्योंकि धर्म 1400 साल पुराना है और लाउडस्पीकर अभी कुछ सौ साल पहले आया है. लाउडस्पीकर को हटाना धर्म को कोई खतरा नहीं है. धर्म अपने आप में मुकम्मल है. वो लंगड़ा नहीं है कि उसे लाउडस्पीकर की बैसाखी देकर ताकतवर बनाओ.

बाबू भाई की कानूनी जीत अब एक मुहिम में तब्दील हो गई है. उन्होंने अपने दावे को मजबूत बनाने के लिए धर्मग्रंथ के साथ मौलवियों के 64 फतवे भी ढूंढ निकाले हैं. वे लगतार बताते हैं कि उनकी लड़ाई धर्म के खिलाफ नहीं बल्कि धर्म के नाम पर रोजमर्रा के आचरण में जोड़ी गई अतिरिक्त और गैरजरूरी बातों के खिलाफ है.

कुरान के हवाले से उन्होंने मुंबई में बेहराम पाड़ा और भारत नगर जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों की सात मस्जिदों पर से सारे भोंपू उतरवा दिए हैं. उनकी लड़ाई में साथ देने वालों को हिम्मत जुटाने में भी वक्त लगा. स्थानीय मदनी मस्जिद के ट्रस्टी मोहम्मद नज़र ने NDTV इंडिया को बताया कि उनकी मस्जिद में तीन स्पीकर लगे हुए थे. इन्हें एक साथ नहीं बल्कि धीरे-धीरे हटाया. पहले अज़ान में फिर नमाज में और जुम्मे में इसे हटा दिया.

धर्मस्थलों पर बजते लाउडस्पीकर को लेकर संतोष पाचलग, डॉ बेडेकर और मोहम्मद अली तीनों की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए बाम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस ओक और जस्टिस सैय्यद अमजद ने अगस्त 2016 में फैसला सुनाते हुए कहा कि देश मे कहीं भी लाउडस्पीकर का इस्तेमाल रात दस से सुबह 6 के बीच करने वालों पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना और पांच साल तक की जेल होगी.

गौरतलब है कि बाबूभाई ने अपनी बात रखने के लिए सोशल मीडिया पर बोलने के बजाए संवैधानिक हक का इस्तेमाल किया. इस वजह से आया फैसला अब पूरे देश पर लागू हो चुका है.

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