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This Article is From Jan 25, 2019

NDTV की खबर का असर: कमलनाथ सरकार ने किसानों की मदद के लिए बनाया कंट्रोल रूम, शिकायत के बाद लिया फैसला

एनडीटीवी ने कुछ दिन पहले ही ऋण माफी में अनियमितता को लेकर खबर दिखाई थी. हमनें दिखाया था कि किस तरह से सरकार (MP Government) के तमाम वादों के बाद भी किसानों (Jai Kisan Loan Scheme) का पूरा कर्ज माफ नहीं किया जा रहा है.

NDTV की खबर का असर: कमलनाथ सरकार ने किसानों की मदद के लिए बनाया कंट्रोल रूम, शिकायत के बाद लिया फैसला
किसानों के लिए मध्य प्रदेश सरकार का ऐलान
भोपाल:

मध्य प्रदेश सरकार ने जय किसान ऋण (Jai Kisan Loan Scheme) माफी के तहत आने वाली शिकायतों को ध्यान में रखते हुए किसानों के लिए कंट्रोल रूम बनाने का फैसला किया है. सरकार (MP Government) के आदेश के बाद हर जिले में एक कंट्रोल रूम बनाया जाएगा जो किसानों की शिकायतों को दूर करेंगे. बता दें कि एनडीटीवी ने कुछ दिन पहले ही ऋण माफी में अनियमितता को लेकर खबर दिखाई थी. हमनें दिखाया था कि किस तरह से सरकार (MP Government) के तमाम वादों के बाद भी किसानों (Jai Kisan Loan Scheme) का पूरा कर्ज माफ नहीं किया जा रहा है. आलम यह है कि कुछ किसानों (Jai Kisan Loan Scheme) को महज 200 रुपये की कर्जमाफी हुई है और कुछ को तो महज 13 रुपये से ही संतोष करना पड़ा है. सरकार (MP Government) द्वारा ऋण माफ़ी की प्रकाशित सूची पर किसान आपत्ति जता रहे थे. इस खबर को दिखाए जाने के बाद ही सरकार (MP Government) ने कर्जमाफी से जुड़ी शिकायतों को दूर करने के लिए जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाने का फैसला किया है.

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इस खबर के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने किसानों की शिकायतों और ऋणी किसानों की आपत्तियों को गंभीरता से लिया है. बता दें कि इस कंट्रोल रूम में शिकायतों को दर्ज कर अधिकतम दो दिन में तथ्यों की पुष्टि या जांच कराकर शिकायतकर्ता को अवगत कराने को कहा गया है. एनडीटीवी ने अपनी खबर में यह भी दिखाया था कि किस तरह खरगौन, आगर-मालवा, छिंदवाड़ा जैसे कई ज़िलों में कर्जमाफी को लेकर किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं.

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गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में जय किसान ऋण मुक्ति योजना के तहत किसान कर्जमाफी को लेकर शिकायत की थी. किसानों का कहना था कि सरकारी दफ्तरों में चिपकाई जा रही है सूची सही नहीं है. उसमें किसी के नाम के आगे 30 रुपये की कर्जमाफी है तो किसी के सवा सौ रुपये. सबसे बड़ी दिक्कत सरकारी बैंकों में है जहां पर ये लिस्ट अंग्रेजी में आ रही है. किसानों का कहना था कि अंग्रेजी में पढ़ना किसी के वश की बात नहीं है और ऐसे में कोई नहीं जा पा रहा है कि किसका नाम है या नहीं है. ध्यान हो कि किसानों के कर्जमाफी के मुद्दे पर ही कांग्रेस सत्ता में आई है और पार्टी के नेता कमलनाथ ने सीएम की कुर्सी संभालते ही इस फाइल में दस्तखत किए थे. इस फैसले पर कांग्रेस की खूब वाहवाही हुई और लेकिन शुरू से ही इसको लेकर किसानों में ऊहापोह की स्थिति है. हालत यह है कि किसानों अब भटक रहे हैं. लेकिन निपानिया के शिवलाल, और शिवनारायण दोनों अपनी बैंक पासबुक के साथ सरकारी दफ्तर के चक्कर लगा रहे हैं. दोनों पर 20000 से ज्यादा का कर्ज है लेकिन माफी मिली है 13 रुपये की. शिवपाल का कहना है, 'सरकार कर्जा माफ कर रही है तो मेरा पूरा माफ होना चाहिये, 13 रुपये, 5 रुपये इतने की तो हम बीड़ी पी जाते हैं'.  

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लेकिन इस फॉर्म को भरने के बाद खरगौन के किसान भी हैरान थे, कई के नाम 25, 50, 150, 180 और 300 रुपये तक दर्ज हैं. किसान रतन लाल महाजन का कहना था कि उन्होंने 2 साल से कोई कर्ज नहीं लियाफिर भी उनके नाम के आगे 180 रु. कर्जमाफी लिखा है. हमीद खां जो मुख्यमंत्री कमलनाथ के क्षेत्र छिंदवाड़ा से हैं, उनके ऊपर 10000 रुपये का कर्ज है लेकिन माफ हुए हैं मात्र 232 रुपये. हमीद खां उम्मीद जताते हुए कहते हैं, 'माफ होना चाहिये पूरा पैसा, बड़े किसानों का 2 लाख माफ हो रहा है, यहां तो छोटे काश्तकार हैं. वहीं आगर मालवा के नारायण सिंह ने एक लाख रुपये का कर्ज लिया था लेकिन उनका नाम 2 लाख रुपये के कर्ज वाली लिस्ट में है. वहीं परसुखेड़ी के भगवान सिंह के पास 4 बीघा ज़मीन है और उनके ऊपर 2,63,000 का कर्ज है लेकिन उनका नाम किसी भी लिस्ट में नहीं है.

VIDEO: किसानों की मदद के लिए बनेगा कंट्रोल रूम.

 

 

 

 

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