भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा.
- महाराष्ट्र के अकोला में प्रदर्शन कर रहे हैं पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्
- यशवंत सिन्हा ने कहा, मांगें पूरी होने तक प्रदर्शन स्थल नहीं छोड़ेंगे
- उन्होंने कहा, किसानों के प्रति सरकार का रुख गंभीर नहीं है
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अकोला:
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा का अपनी ही पार्टी के खिलाफ प्रदर्शन जारी है. यशवंत सिन्हा ने महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में किसानों की मांगों के समर्थन में धरना कर रहे हैं. सिन्हा का कहना है कि जब तक मांगे नहीं मानीं जाती तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा, हालांकि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनसे फोन पर बात की.
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किसानों के एक प्रदर्शन का नेतृत्व करने के दौरान सिन्हा को सोमवार की शाम को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था. उस समय वह विदर्भ के किसानों के प्रति राज्य सरकार की 'उदासीनता' के खिलाफ जिला कलेक्टर के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे. पूर्व केंद्रीय मंत्री का भाजपा के मौजूदा नेतृत्व से टकराव चल रहा है. उन्हें जिला पुलिस मुख्यालय ले जाया गया और बाद में उन्हें छोड़ दिया गया था. हालांकि 80 वर्षीय नेता ने वहां से जाने से इनकार कर दिया था और पुलिस मैदान में ही धरने पर बैठ गए थे. उन्होंने कहा था कि वह किसानों की सभी मांगों को माने जाने तक अपनी जगह से नहीं हटेंगे.
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सिन्हा ने तब कहा था कि सरकार किसानों की समस्याओं के हल के प्रति गंभीर नजर नहीं आती है. एक अधिकारी ने कहा, 'मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और यशवंत सिन्हा ने बुधवार सुबह फोन पर बात की और किसानों की मांगों पर चर्चा की.' शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने एक दिन पहले ही सिन्हा से फोन पर बात की थी और किसानों के मुद्दों पर चर्चा की थी.
VIDEO : अपनी ही पार्टी के खिलाफ यशवंत सिन्हा
जिला प्रशासन ने दावा किया कि कीड़ों की वजह से कपास किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए उन्हें मुआवजा देने, आनुवंशिक रूप से रूपांतरित नकली बीजों का निर्माण करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई, मूंग, उड़द और सोयाबीन के किसानों को फसल नुकसान पर 100 फीसदी की अदायगी समेत अधिकतर मांगों को मान लिया गया है. किसनों की मांग है कि बैंक अधिकारी और प्रशासन निजी तौर पर ग्राम पंचायत जा कर कर्ज माफी को अमल में लाए.
कलेक्टर आस्तिक कुमार पांडे ने कल कहा था कि अधिकतम समर्थन मूल्य से संबंधित मांग को छोड़ सभी छह मांगों को मान लिया गया है. अधिकतम समर्थन मूल्य पर केंद्र सरकार को फैसला करना है. हमने सिन्हा की अगुवाई वाले प्रदर्शनकारियों से आंदोलन वापस लेने का आग्रह किया है.
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किसानों के एक प्रदर्शन का नेतृत्व करने के दौरान सिन्हा को सोमवार की शाम को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था. उस समय वह विदर्भ के किसानों के प्रति राज्य सरकार की 'उदासीनता' के खिलाफ जिला कलेक्टर के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे. पूर्व केंद्रीय मंत्री का भाजपा के मौजूदा नेतृत्व से टकराव चल रहा है. उन्हें जिला पुलिस मुख्यालय ले जाया गया और बाद में उन्हें छोड़ दिया गया था. हालांकि 80 वर्षीय नेता ने वहां से जाने से इनकार कर दिया था और पुलिस मैदान में ही धरने पर बैठ गए थे. उन्होंने कहा था कि वह किसानों की सभी मांगों को माने जाने तक अपनी जगह से नहीं हटेंगे.
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सिन्हा ने तब कहा था कि सरकार किसानों की समस्याओं के हल के प्रति गंभीर नजर नहीं आती है. एक अधिकारी ने कहा, 'मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और यशवंत सिन्हा ने बुधवार सुबह फोन पर बात की और किसानों की मांगों पर चर्चा की.' शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने एक दिन पहले ही सिन्हा से फोन पर बात की थी और किसानों के मुद्दों पर चर्चा की थी.
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जिला प्रशासन ने दावा किया कि कीड़ों की वजह से कपास किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए उन्हें मुआवजा देने, आनुवंशिक रूप से रूपांतरित नकली बीजों का निर्माण करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई, मूंग, उड़द और सोयाबीन के किसानों को फसल नुकसान पर 100 फीसदी की अदायगी समेत अधिकतर मांगों को मान लिया गया है. किसनों की मांग है कि बैंक अधिकारी और प्रशासन निजी तौर पर ग्राम पंचायत जा कर कर्ज माफी को अमल में लाए.
कलेक्टर आस्तिक कुमार पांडे ने कल कहा था कि अधिकतम समर्थन मूल्य से संबंधित मांग को छोड़ सभी छह मांगों को मान लिया गया है. अधिकतम समर्थन मूल्य पर केंद्र सरकार को फैसला करना है. हमने सिन्हा की अगुवाई वाले प्रदर्शनकारियों से आंदोलन वापस लेने का आग्रह किया है.
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