- एलगार मामले की जांच एनआईए को सौंपी गई
- शरद पवार ने उद्धव ठाकरे की आलोचना की थी
- अगले दिन दोनों नेताओं ने साझा किया मंच
एलगार परिषद मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपने की अनुमति देने पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की आलोचना करने के अगले दिन राकांपा अध्यक्ष शरद पवार मुख्यमंत्री के साथ मंच साझा करते दिखे. जलगांव में शनिवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार के बड़े भाई अप्पासाहेब पवार के नाम पर कृषि पुरस्कार प्रदान करने के लिए आयोजित समारोह में दोनों साथ नजर आए. शुक्रवार को पवार ने कोल्हापुर में पत्रकारों से कहा था कि एलगार परिषद मामले की जांच का जिम्मा पुणे पुलिस से लेकर एनआईए को सौंपने का केंद्र का फैसला सही नहीं है.
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राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए पवार ने कहा, ‘‘जांच का जिम्मा पुणे पुलिस से लेकर एनआईए को सौंपने का केंद्र का फैसला सही नहीं है लेकिन राज्य सरकार द्वारा मामला हस्तांतरित किए जाने का समर्थन करना भी उतना ही गलत है.'' पवार की पार्टी महाराष्ट्र में सरकार में शामिल है. शनिवार के कार्यक्रम में हालांकि दोनों नेताओं के बीच सबकुछ ठीक नजर आया, जहां पवार ने पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को सम्मानित करने की बात कही तो वहीं ठाकरे ने कहा कि पहले पूर्व कृषि मंत्री को सम्मानित किया जाना चाहिए.
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आयोजकों ने पवार और ठाकरे दोनों को संयुक्त रूप से सम्मानित किया. इस अवसर पर ठाकरे ने कहा कि किसान महा विकास अघाडी (एमवीए) सरकार को जोड़ने वाली ताकत है. मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘किसानों को अब चिंता करने की जरूरत नहीं है. यह उनकी सरकार है. मुझे मालूम है कि किसानों को पानी, बिजली और उनकी फसल के लिए अच्छा पैसा चाहिए. इस संकट से स्थायी रूप से बाहर निकालने के लिए कर्जमाफी पहली सहायता है.'' ‘जैन इरिगेशन' के नाम पर रखे गए कृषि पुरस्कार को जालना जिले के नंदापुर निवासी किसान दत्तात्रेय चव्हाण को दिया गया.
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