प्रतीकात्मक फोटो.
- पुलिस ने 11 लोगों के गिरोह को धरदबोचा, दो एनसीपी के नेता
- पांच सौ और हजार के जाली नोटों को बदलने का गोरखधंधा
- स्कैनर, प्रिंटर के साथ कागज को काटने वाली मशीन बरामद
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नासिक:
नोटबंदी के दिनों में नोटबदली के तो यूं कई खुलासे हुए, लेकिन नासिक पुलिस का खुलासा सबसे ज्यादा चौंकाने वाला है. इस मामले में पुलिस ने 11 लोगों के गिरोह को धरदबोचा है जिसमें से दो लोग एनसीपी के नेता हैं. यह गिरोह पांच सौ और हजार के जाली नोटों के बदली के गोरखधंधे से जुड़ा है.
नासिक पुलिस ने इस मामले में आज भी जिले के कई हिस्सों में छापामारी की. इस छापामारी में स्कैनर, प्रिंटर के साथ कागज को सटीक तरीके से काटने वाली मशीन भी बरामद हुई है. अपनी कार्रवाई का खुलासा करते हुए नासिक के पुलिस कमिश्नर रवींद्र सिंघल ने मीडिया कर्मियों को बताया कि गिरोह से अब तक एक करोड़ 35 लाख रुपये मूल्य के नकली नोट बरामद हुए हैं. अंदेशा है कि यह लोग इन नकली 500 और हजार के नोटों को असली के साथ बदलने के काम में लगे थे.
पुलिस ने अपनी कार्रवाई में जिन 11 लोगों को धरदबोचा है उनमें एनसीपी के पूर्व उपाध्यक्ष रामराव पाटिल और पूर्व नासिक शहर युवा अध्यक्ष छबु नागरे प्रमुख हैं. पाटिल का इतिहास भी विवादास्पद रहा है. अनुसूचित जनजाति आयोग के प्रमुख बूटासिंह के बेटे को एक करोड़ रुपये की घूस देने के मामले में पाटिल को पकड़ा गया था. तो छबु नागरे विवादित एनसीपी नेता छगन भुजबल का समर्थक बताया जाता है. पुलिसिया सूत्र बताते हैं कि इनकी कोशिश थी कि 200 करोड़ रुपये मूल्य के बंद किए जा चुके नोटों के नकली सैम्पल असली के साथ इस्तेमाल में लाए जाएं.
पुलिस को शक है कि यह गिरोह अपने पास मौजूद नकली नोटों को असली नोटों के बंडल में घुसा देता था. मौका मिलने पर प्रति बंडल 10 नोट भी इन्होंने घुसा दिए हो सकते हैं, जिसका गड़बड़झाला लंबे समय से चलता आ रहा है.
पुलिस की कोशिश इन आरोपियों से उनके रैकेट से जुड़ी और जानकारी इकठ्ठी करने की है. साथ ही इस मामले में कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए प्रमुख आरोपियों के खिलाफ देशद्रोह की धाराएं लगाईं जा सकें.
नासिक पुलिस ने इस मामले में आज भी जिले के कई हिस्सों में छापामारी की. इस छापामारी में स्कैनर, प्रिंटर के साथ कागज को सटीक तरीके से काटने वाली मशीन भी बरामद हुई है. अपनी कार्रवाई का खुलासा करते हुए नासिक के पुलिस कमिश्नर रवींद्र सिंघल ने मीडिया कर्मियों को बताया कि गिरोह से अब तक एक करोड़ 35 लाख रुपये मूल्य के नकली नोट बरामद हुए हैं. अंदेशा है कि यह लोग इन नकली 500 और हजार के नोटों को असली के साथ बदलने के काम में लगे थे.
पुलिस ने अपनी कार्रवाई में जिन 11 लोगों को धरदबोचा है उनमें एनसीपी के पूर्व उपाध्यक्ष रामराव पाटिल और पूर्व नासिक शहर युवा अध्यक्ष छबु नागरे प्रमुख हैं. पाटिल का इतिहास भी विवादास्पद रहा है. अनुसूचित जनजाति आयोग के प्रमुख बूटासिंह के बेटे को एक करोड़ रुपये की घूस देने के मामले में पाटिल को पकड़ा गया था. तो छबु नागरे विवादित एनसीपी नेता छगन भुजबल का समर्थक बताया जाता है. पुलिसिया सूत्र बताते हैं कि इनकी कोशिश थी कि 200 करोड़ रुपये मूल्य के बंद किए जा चुके नोटों के नकली सैम्पल असली के साथ इस्तेमाल में लाए जाएं.
पुलिस को शक है कि यह गिरोह अपने पास मौजूद नकली नोटों को असली नोटों के बंडल में घुसा देता था. मौका मिलने पर प्रति बंडल 10 नोट भी इन्होंने घुसा दिए हो सकते हैं, जिसका गड़बड़झाला लंबे समय से चलता आ रहा है.
पुलिस की कोशिश इन आरोपियों से उनके रैकेट से जुड़ी और जानकारी इकठ्ठी करने की है. साथ ही इस मामले में कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए प्रमुख आरोपियों के खिलाफ देशद्रोह की धाराएं लगाईं जा सकें.
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