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हमें भी जेल में डाल दीजिए; पुलिस की तैनाती के बाद अभिजीत दीपके बोले- देशभर में खड़े हो जाएंगे जंतर-मंतर

महाराष्ट्र में अभिजीत दीपके के घर के बाहर 50 से अधिक सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है. यह कार्रवाई उनकी प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले हुई है. पुलिस तैनाती की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं की गई है.

हमें भी जेल में डाल दीजिए; पुलिस की तैनाती के बाद अभिजीत दीपके बोले- देशभर में खड़े हो जाएंगे जंतर-मंतर
अभिजीत दीपके के घर के बाहर सुरक्षा घेरा, पुलिस ने बढ़ाई निगरानी
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  • “अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं, तो देशभर में जंतर-मंतर खड़े हो जाएंगे" : अभिजीत दीपके
  • छात्र 500 रुपये के लिए धरने पर नहीं बैठते, हमारे साथ Gen-Z पीढ़ी है
  • प्रेस कॉन्फ्रेंस के पहले भारी पुलिस तैनात
मुंबई:

महाराष्ट्र में अभिजीत दीपके के आवास के बाहर भारी पुलिस बंदोबस्त किए जाने से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है. जानकारी के अनुसार, सादे कपड़ों में 50 से अधिक पुलिसकर्मियों को उनके घर के बाहर तैनात किया गया है और पूरे परिसर को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है. यह कार्रवाई उनकी प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले की गई है. हालांकि पुलिस की इस अचानक बढ़ी मौजूदगी के पीछे क्या कारण हैं, इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.

प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले बढ़ाई गई सुरक्षा

महाराष्ट्र में अभिजीत दीपके के घर के बाहर अचानक सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. सूत्रों के अनुसार, बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को इलाके में तैनात किया गया है. इनमें 50 से अधिक कर्मी सिविल ड्रेस में मौजूद हैं और पूरे क्षेत्र पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. पुलिस बल ने दीपके के घर को चारों ओर से घेर लिया है. आसपास की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है. यह घटनाक्रम उनकी प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले सामने आया है, जिसके कारण इस कार्रवाई को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं.

घर के बाहर पुलिस तैनात

घर के बाहर पुलिस तैनात

'जंतर-मंतर जाने रोक रही पुलिस'

अभिजीत दीपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ‘हमारे कुछ कार्यकर्ताओं को महाराष्ट्र पुलिस की तरफ से नोटिस भेजे गए हैं. पुलिस हमसे कह रही है कि जंतर-मंतर पर होने वाले आंदोलन में मत जाइए. चंद्रपुर की पुलिस हमें जंतर-मंतर जाने से रोकने वाली कौन होती है? जंतर-मंतर उनके अधिकार क्षेत्र में कब से आने लगा? मुंबई पुलिस ने आंदोलन कर रहे आदिवासी छात्रों के खिलाफ दमनकारी कार्रवाई करते हुए उनके साथ मारपीट की है.'

'महाराष्ट्र पुलिस ने मेरा दिल तोड़ दिया'

अभिजीत दीपके ने पुलिस पर सवाल उठाते हुए कहा कि 'मैं देशभर में महाराष्ट्र पुलिस की तारीफ करता हूं, लेकिन आज महाराष्ट्र पुलिस ने मेरा दिल तोड़ दिया है. हमें चंद्रपुर पुलिस ने नोटिस दिया है, जिसमें पूछा गया है कि पैसा कहां से आता है? उसमें कहा गया है कि आंदोलन हिंसक होगा, इसलिए सोशल मीडिया पर पोस्ट न डालें. चंद्रपुर पुलिस को पहले से कैसे पता कि हिंसा होने वाली है? आप नागरिकों से कह रहे हैं कि जंतर-मंतर मत जाओ... चंद्रपुर पुलिस हमें नोटिस क्यों दे रही है? क्या जंतर-मंतर चंद्रपुर में आता है? अपना स्वाभिमान बचाकर रखिए, दिल्ली पुलिस जैसा बर्ताव मत कीजिए. पुलिस की ऐसी हरकतों से महाराष्ट्र पुलिस की बदनामी हो रही है.' एक मराठी होने के नाते मुझे नोटिस मिलने का बहुत बुरा लगा. मुझे नहीं लगता कि मुझ पर दबाव डालने के लिए पुलिस बढ़ाई गई है, लेकिन अगर अमित शाह का आदेश आ जाए तो ये बेचारी पुलिस भी क्या करेगी.

'मेरे साथियों को परेशान न करें, सीधे मुझे गिरफ्तार करो'

दीपके ने आगे कहा कि पुलिस ने आदिवासी छात्रों की बेरहमी से पिटाई की है. क्या आपके पास अपराधियों की कमी हो गई है जो आप छात्रों को पीट रहे हैं? मुंबई पुलिस की तुलना स्कॉटलैंड यार्ड से की जाती है, फिर आप दिल्ली पुलिस जैसा व्यवहार क्यों कर रहे हैं? महाराष्ट्र की एक गौरवशाली विरासत है. एक-दो पुलिसवालों की वजह से राज्य बदनाम नहीं होना चाहिए.

मुझे बताया गया है कि पुलिस मुझे हिरासत में भी ले सकती है. देवेंद्र फडणवीस, आप योगी आदित्यनाथ बनने की कोशिश क्यों कर रहे हैं? याद रखिए, यह महाराष्ट्र है. मेरे साथियों को परेशान करने के बजाय सीधे मुझे गिरफ्तार कर लो. मैं यहीं बैठा हूं, आपको जो कानून लगाना है, लगा लीजिए. महाराष्ट्र और राजस्थान, इन दो राज्यों में मेरे साथियों को नोटिस भेजे गए हैं.

नंदुरबार में राहुल पवार आदिवासी छात्रों के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें बेवजह परेशान किया जा रहा है. गवर्नर एक कठपुतली हैं. राज्यपाल सिर्फ सरकार के हाथों की कठपुतली बने हुए हैं, वे सिर्फ तकनीकी बातों में उलझाए रखने की कोशिश कर रहे हैं.

'अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं, तो देशभर में जंतर-मंतर खड़े हो जाएंगे'

अभिजीत दीपके ने कहा कि मैं पूरे राज्य में घूमा हूं, छात्रों में भारी आक्रोश है. जिन लोगों की वजह से परीक्षाएं रद्द हो रही हैं, उन्हें बाहर निकालो. हमारे साथ जेन-ज़ी पीढ़ी है. नेहा जिस निडरता से लड़ रही है, उससे पुलिस और सरकार डरी हुई है. बीजेपी की रैलियों में लोग पैसे लेकर आते हैं, इसलिए उन्हें ऐसा लगता होगा. क्या ये छात्र 500 रुपये के लिए धरने पर बैठेंगे?

ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा होना चाहिए और उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए. आप हमसे पूछते हैं कि क्या हमने आंदोलन की अनुमति ली है? ज्ञानेश कुमार पहले यह बताएं कि क्या उन्होंने 13 करोड़ वोट रद्द करने से पहले किसी की अनुमति ली थी?

दीपके ने आगे कहा कि 'क्या फडणवीस यह कहना चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट भी फेक नरेटिव सेट कर रहा है? जैसे अंग्रेज लोगों को जेल में डालते थे, वैसे ही आप हमें भी जेल में डाल दीजिए. अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो देशभर में जंतर-मंतर खड़े हो जाएंगे. अगर पुलिस आक्रामक होती है या बीजेपी अपने गुंडे भेजती है, तो गांधीजी को याद कीजिए, वहीं बैठकर 'रघुपति राघव राजाराम' का जाप शुरू कर दीजिए और उसी जगह को अपना जंतर-मंतर बना दीजिए.'

अभिजीत दीपके के घर बाहर सिविल ड्रेस में पुलिस

अभिजीत दीपके के घर बाहर सिविल ड्रेस में पुलिस

तैनाती के कारणों पर बना हुआ है सस्पेंस

अब तक पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा बढ़ाने की वजह को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. फिलहाल सुरक्षा इंतजामों के पीछे के कारण स्पष्ट नहीं हो पाए हैं. स्थानीय स्तर पर पुलिस की मौजूदगी को लेकर चर्चाएं जरूर तेज हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से किसी विशेष खतरे या सुरक्षा कारण की पुष्टि नहीं की गई है.

सीजेपी ने किया विरोध प्रदर्शनों का समर्थन

इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘इंडिया' गठबंधन के विरोध प्रदर्शन का स्वागत किया है. कॉजपा के सह-संयोजक सौरव दास ने कहा, 'हम सभी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का स्वागत करते हैं. चाहे ‘इंडिया' गठबंधन हो, छात्र संगठन हो, कार्यकर्ता हो या आम लोग, सभी को कोशिश करनी चाहिए. हर किसी को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए.' उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है और विभिन्न संगठनों द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों को इसी दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए.

10 अक्टूबर को प्रदर्शन

सीजेपी द्वारा 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सौरव दास ने कहा, 'आपको 10 अक्टूबर को विरोध-प्रदर्शन के आह्वान को हमारा या किसी और का आह्वान नहीं समझना चाहिए. यह युवाओं और जेन-जी का आह्वान है. हम उसका एक हिस्सा हैं.' उन्होंने संकेत दिया कि प्रस्तावित प्रदर्शन को किसी एक संगठन के कार्यक्रम के बजाय व्यापक जनभागीदारी वाले अभियान के रूप में देखा जाना चाहिए.

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