Success Story: लंबे समय तक माओवाद समस्या का दंश झेलने वाले छत्तीगढ़ के नारायणपुर जिले के सुदूर ग्राम सहपाल की एक आदिवासी महिला का गांव वालों के लिए रोल मॉडल बन गई हैं. एक समय ऐसा भी था, जब सुनीता नरवास (Sunita Narwas) का जीवन चुनौतियों भरा था, लेकिन आज सुनीता मुर्गी पालन कर 75000 तक का मुनाफा कमा रही है. छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत संचालित 'बिहान' (BIHAN) योजना का लाभ लेकर मुर्गी पालन से जुड़ा व्यवसाय में नहीं शुरू किया था.
बस्तर संभाग के नारायणपुर विकासखंड के सुदूर ग्राम सहपाल की रहने वाली सुनीता नरवास कभी सीमित आय और आर्थिक तंगहाली से जूझती थीं, लेकिन अब सुनीता आज न केवल अपने परिवार की रीढ़ बन चुकी हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचल की सैकड़ों महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल बनकर उभरी हैं.

Success Story
चुनौतियों भरा सफर
बता दों कि कुछ समय पहले तक सुनीता के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक थी. आजीविका का पूरा दारोमदार सीमित खेती और अनिश्चित मजदूरी पर टिका हुआ था. दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करना भी एक बड़ी चुनौती थी और भविष्य को लेकर हमेशा एक असुरक्षा की भावना बनी रहती थी, लेकिन सुनीता ने हार नहीं मानी. वह लगातार अपने परिवार को एक बेहतर जिंदगी देने के लिए आजीविका के मजबूत साधनों की तलाश में जुटी रहीं.
मुर्गी पालन से बदल गई महिला की किस्मत
सुनीता ने विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में पारंपरिक तौर-तरीकों को छोड़कर वैज्ञानिक पद्धति को अपनाने का फैसला किया. सुनीता ने अपने घर के पिछड़े हिस्से (बैकयार्ड) में उन्नत मुर्गीपालन की शुरुआत की. उन्होंने पारंपरिक ढर्रे से हटकर काम किया. मुर्गियों के लिए संतुलित आहार, समय पर टीकाकरण और बेहतर रख-रखाव पर विशेष ध्यान दिया. इस वैज्ञानिक प्रबंधन का असर जल्द ही दिखाई दिया. शुरुआती चरण में ही उन्हें 15 हजार 75 रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ. इस पहली कमाई ने सुनीता के हौसलों को पंख दे दिए और उन्होंने इसे ही अपनी स्थायी आजीविका का मुख्य जरिया बना लिया.
गांव की महिलाओं के लिए बनीं 'रोल मॉडल'
सुनीता की यह सफलता केवल उनके घर तक सीमित नहीं है. आज उन्हें देखकर सहपाल और आस-पास के गाँवों की कई अन्य महिलाएँ भी स्व-सहायता समूहों से जुड़ रही हैं और वैज्ञानिक पद्धतियों से आजीविका के साधन अपना रही हैं. सुनीता नरवास कहती है कि बिहान योजना और एकीकृत कृषि क्लस्टर (IFC) ने मुझे सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत नहीं किया, बल्कि समाज में सम्मान से जीने का हौसला भी दिया है.
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