Maoist Surrender vs Arrest Controversy: तेलंगाना पुलिस द्वारा हाल में किए गए माओवादी सरेंडर के दावे (Telangana Maoist Surrender Debate) को संगठन के वरिष्ठ नेता थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी ने खारिज कर दिया है. NDTV से विशेष बातचीत (Thippiri Tirupati Interview NDTV) में देवजी ने कहा कि यह “सरेंडर” नहीं बल्कि “गिरफ्तारी” थी, जिसे सरकार ने गलत तरीके से आत्मसमर्पण बताकर प्रस्तुत किया. देवजी ने कहा, “मैंने आत्मसमर्पण नहीं किया है. मुझे गिरफ्तार किया गया था. सरकार जिस सरेंडर कहानी को आगे बढ़ा रही है, वह सही नहीं है.” उनका यह बयान तेलंगाना के आधिकारिक दावों के विपरीत है.
6 करोड़ के इनामी और 135 जवानों के हत्यारे कुख्यात नक्सली देवजी के सरेंडर का वीडियो आया सामने#Chhattisgarh pic.twitter.com/IC2Sm2mJXR
— NDTV MP Chhattisgarh (@NDTVMPCG) February 24, 2026
44 साल तक भूमिगत रहे, माओवादी संगठन के शीर्ष नेताओं में शामिल
62 वर्षीय देवजी करीब 44 वर्ष तक भूमिगत रहे और देश में बचे हुए सबसे वरिष्ठ माओवादी कमांडरों में गिने जाते थे. वे मूल रूप से तेलंगाना के जगतियाल जिले के कोरुतला निवासी हैं. उन्होंने 1978 में रैडिकल स्टूडेंट्स यूनियन के माध्यम से संगठन में प्रवेश किया और धीरे‑धीरे विभिन्न जिम्मेदारियों को संभालते हुए शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचे. 1980 के दशक में उन्होंने सशस्त्र दस्ता सदस्य के रूप में शुरुआत की. बाद में वे सिरोंचा और पेरिमिला वन क्षेत्रों में कमांडर बने. वर्ष 2001 में वे सेंट्रल मिलिट्री कमीशन का हिस्सा बने और 2017 में पार्टी की सर्वोच्च इकाई पोलित ब्यूरो में शामिल हुए. “अभय” नाम से उनकी पहचान संगठन के प्रवक्ता के रूप में भी रही है.

Maoist Surrender vs Arrest Controversy: देवजी का बड़ा दावा
“प्रतिबंध हटे तो उग्रवाद खत्म हो सकता है”: देवजी
इंटरव्यू में जब उनसे केंद्र सरकार द्वारा लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज़्म समाप्त करने के लिए तय किए गए मार्च महीने की समय सीमा के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि समस्या का हल केवल राजनीतिक रास्ते से ही निकल सकता है. देवजी ने कहा: “अगर सरकार प्रतिबंध हटाकर CPI (Maoist) को एक राजनीतिक दल के रूप में काम करने दे, तो माओवाद का मुद्दा पूरी तरह समाप्त हो सकता है. राजनीतिक समस्या का समाधान भी राजनीतिक तरीके से ही होगा.”उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा निर्धारित समय सीमा या सरेंडर नीतियाँ वास्तविक जड़ को संबोधित नहीं करतीं. “डेडलाइन से समस्या हल नहीं होगी. सरकार को समय सीमा थोपने के बजाय राजनीतिक संवाद करना चाहिए.”
हिडमा की मौत पर बड़ा दावा;“सरकारी कहानी अधूरी”
साक्षात्कार के दौरान देवजी ने वरिष्ठ माओवादी कमांडर माडवी हिडमा की मौत को लेकर भी कई गंभीर दावे किए. हिडमा बस्तर क्षेत्र में तीन दशकों तक सक्रिय रहे और माओवादी संगठन के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य चेहरों में से एक माने जाते थे. नवंबर 2025 में आंध्र प्रदेश पुलिस के ऑपरेशन में हिडमा मारे गए थे. देवजी ने दावा किया कि हिडमा की मौत के पीछे केवल मुठभेड़ की सरकारी कहानी ही सच नहीं है. उन्होंने कहा: “हिडमा की हत्या कई जटिल परिस्थितियों का परिणाम थी. सरकारी कथा केवल आधा सच बताती है. संगठन में गहरी सेंधमारी और खुफिया तंत्र की गतिविधियों ने संरचना को कमजोर किया है.” देवजी ने यह भी कहा कि उन्होंने हिडमा को एक संभावित डबल‑क्रॉस की आशंका के बारे में पहले ही चेतावनी दी थी.
76 वर्षीय माओवादी नेता संग्राम NDTV पर ये बोले
देवजी के साथ इंटरव्यू में वरिष्ठ माओवादी नेता और केंद्रीय समिति के सदस्य मल्ला राजी रेड्डी, जिन्हें ‘संग्राम' के नाम से जाना जाता है, भी शामिल थे. संग्राम 46 वर्षों तक भूमिगत रहे और संगठन के कई प्रमुख हिस्सों का नेतृत्व किया. वे तेलंगाना के पेद्दापल्ली जिले के निवासी हैं और गोधावरीखनी कोल बेल्ट में मजदूरों के संगठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही. उन्होंने महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल में गतिविधियों की देखरेख की. 2007 में वे गिरफ्तार हुए थे, लेकिन 2009 में जमानत पर बाहर आने के बाद दोबारा भूमिगत हो गए. पिछले वर्षों में वे दंडकारण्य विशेष जोनल समिति के मार्गदर्शक के रूप में सक्रिय थे. संग्राम ने NDTV से कहा कि माओवादी आंदोलन अब वैचारिक और संगठनात्मक रूप से ढह चुका है. उनके अनुसार, “अब समय है कि लोग अपने अधिकारों के लिए संवैधानिक ढांचे के भीतर रहकर लड़ें.”
संगठन में टूट, नेतृत्व कमजोर; बड़े संकेत
देवजी और संग्राम की बातचीत से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि संगठन की आंतरिक संरचना पिछले कुछ वर्षों में काफी कमजोर हुई है. लगातार ऑपरेशनों, खुफिया नेटवर्क और आंतरिक दरारों ने माओवादी ढांचे को प्रभावित किया है. दोनों नेताओं के दावों ने सुरक्षा एजेंसियों की आधिकारिक कहानियों पर भी नए सवाल खड़े किए हैं.
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