- उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश के आदिवासी समुदाय के लिए अलग धर्म कोड की मांग करते हुए अपनी पहचान बचाने की अपील की
- सिंघार ने कहा कि जनगणना में आदिवासियों को अलग धर्म कोड न मिलने पर उनकी सांस्कृतिक पहचान खतरे में पड़ सकती है
- नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी दी कि पहचान खत्म होने पर आदिवासियों के आरक्षण और वन अधिकार भी प्रभावित हो सकते हैं
MP Tribal Religion Code: मध्यप्रदेश की राजनीति में आदिवासी पहचान और अधिकारों को लेकर एक नया और बड़ा विवाद छिड़ गया है. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आदिवासियों के लिए एक अलग 'धर्म कोड' की मांग उठाकर सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है. अनूपपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सिंघार ने आदिवासी समाज से अपील की कि वे अपनी पहचान बचाने के लिए एकजुट हों और देश के सर्वोच्च पदों तक अपनी आवाज पहुंचाएं.
सिंघार बोले- अलग पहचान के लिए राष्ट्रपति को भेजें 50 लाख आवेदन
उमंग सिंघार ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अगर आदिवासी समुदाय को अन्य धर्मों के अंतर्गत गिना जाता रहा, तो उनकी विशिष्ट पहचान हमेशा के लिए खतरे में पड़ जाएगी. उन्होंने तर्क दिया कि आदिवासियों की अपनी अलग परंपराएं और संस्कृति हैं, जिन्हें सुरक्षित रखने के लिए जनगणना में अलग धर्म कोड मिलना अनिवार्य है. सिंघार ने प्रदेश भर के आदिवासियों से आह्वान किया कि मध्यप्रदेश से कम से कम 50 लाख आवेदन राष्ट्रपति को भेजे जाने चाहिए ताकि यह संदेश स्पष्ट रूप से केंद्र तक पहुंचे.

'पहचान खत्म हुई तो आरक्षण भी खतरे में पड़ जाएगा'
नेता प्रतिपक्ष ने इस मुद्दे को सीधे तौर पर आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों से जोड़ते हुए चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि यदि आदिवासी अपनी अलग पहचान खो देंगे या दूसरे धर्मों में विलीन हो जाएंगे, तो भविष्य में आरक्षण, वन अधिकार और अन्य कानूनी संरक्षण भी खतरे में पड़ सकते हैं. सिंघार के मुताबिक, यदि समाज आज अपनी आवाज नहीं उठाएगा, तो आने वाली पीढ़ियों के पास अपनी बात कहने का कोई मंच नहीं बचेगा. उन्होंने पूरे प्रदेश के आदिवासी अंचलों में इस मांग को लेकर एक व्यापक अभियान चलाने की घोषणा भी की.
मंत्री सारंग का पलटवार- सिंघार के खिलाफ दर्ज हो केस
सिंघार के इस बयान पर सत्ताधारी दल भाजपा ने बेहद सख्त प्रतिक्रिया दी है. प्रदेश सरकार में मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस पर 'बांटो और राज करो' की राजनीति करने का आरोप लगाया है. सारंग ने सिंघार के बयान को न केवल आपत्तिजनक बल्कि गैरकानूनी भी करार दिया. उन्होंने कहा कि जनगणना जैसी संवैधानिक प्रक्रिया में बाधा डालना और आदिवासियों को गुमराह करना एक गंभीर अपराध है. सारंग ने मांग की है कि संवैधानिक संस्थाओं को भ्रमित करने के प्रयास में नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए.
भाजपा का आरोप- कांग्रेस बांटने की साजिश कर रही है
मंत्री विश्वास सारंग ने इस विवाद में कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को भी घसीटा है. उन्होंने सवाल किया कि संविधान की दुहाई देने वाले राहुल गांधी क्या अपने नेता के इस विवादित बयान पर कोई कार्रवाई करेंगे? भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस राजनीतिक लाभ के लिए भोली-भाली आदिवासी जनता के बीच भ्रम फैला रही है और जनगणना की राष्ट्रीय प्रक्रिया के खिलाफ एक गहरी साजिश रच रही है. भाजपा के अनुसार, यह आदिवासियों को मुख्यधारा से अलग करने की एक राजनीतिक चाल है.
मध्यप्रदेश की सत्ता का 'आदिवासी' गणित
यह पूरा विवाद मध्यप्रदेश के चुनावी और सामाजिक समीकरणों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है. राज्य की कुल आबादी में करीब 21 से 22 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला आदिवासी समुदाय सत्ता की चाबी माना जाता है. विधानसभा की 230 सीटों में से 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं, जबकि 80 से अधिक सीटों पर यह समुदाय निर्णायक भूमिका निभाता है. ऐतिहासिक रूप से जिस भी दल को आदिवासी क्षेत्रों में बढ़त मिली है, प्रदेश की सत्ता उसी के पास रही है. ऐसे में 'धर्म कोड' का यह मुद्दा आने वाले समय में राज्य की राजनीति को एक नई दिशा दे सकता है.
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