Indore's Namkeen Trade Crisis: देश में नमकीन की राजधानी के नाम से पहचान बनाने वाले इंदौर शहर के नमकीन उद्योग इस समय भारी चुनौतियों का सामना कर रहा है. ईरान-इजराइल युद्ध के असर ने इंदौर के नमकीन उद्योग पर बुरा असर डाला है, जिसके चलते न केवल नमकीन उत्पादन की लागत में बढ़ोत्तरी हुई है, बल्कि उसके राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर गहरा असर पड़ा है, जिससे नमकीन कारोबारी परेशान हैं.
बढ़ती लागत से नमकीन की कीमतों में 40 रुपए प्रति किलो की वृद्धि
रिपोर्ट के मुताबिक ईरान-इजराइल युद्ध संकट के बीच एलपीजी समेत विभिन्न सहायक सामग्रियों की कीमतों में हुई वृद्धि का असर नमकीन की कीमतों पड़ा है. यही कारण है कि नमकीनों में तेजी से उछाल देखने को मिला है. इंदौर में युद्ध संकट के बाद नमकीन की कीमतें 40 रुपए प्रति किलो तक बढ़ चुकी हैं, इससे लोकल कारोबार भी कम हुआ है, दूसरे युद्ध तनाव के बीच नमकीन के एक्सपोर्ट पर भी गहरा असर नजर आने लगा है.
हर दिन 100 टन नमकीन 80 अलग-अलग देशों में होता है निर्यात
गौरतलब है इंदौर से हर दिन 100 टन नमकीन बाहर भेजा जाता है, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों के साथ 80 अलग-अलग देश शामिल है, लेकिन बढ़ते युद्ध तनाव के बीच घरेलू के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय कारोबार में भी ठप पड़ गया है. इंदौर नमकीन मिठाई महासंघ के सचिव अनुराग बोथरा ने बताया युद्ध संकट से इंदौर नमकीन कारोबार पर विकट स्थिति बनी हुई है, युद्ध संकट से जहां महंगाई बढ़ी है, जिससे राष्ट्रीय- अंतर्राष्ट्रीय कारोबार प्रभावित हुआ है.
चीजों को सुचारू रूप से वापस आने में 2 से 3 महीना का समय लगेगा
इंदौर नमकीन मिठाई महासंघ सचिव ने बताया हर साल इसी समय रूटिंग रिवीजन के चलते महंगाई बढ़ती है, लेकिन इस बार युद्ध का ही असर देखने को मिला. अगर युद्ध खत्म होता भी है तो सब चीजों को सुचारू रूप से वापस आने में 2 से 3 महीना का समय लगेगा. उन्होंने बताया कि इंदौर के नमकीन कारोबार में मंदी के लिए घटा एक्सपोर्ट ज्यादा असर डाल रहा, क्योंकि खाड़ी इलाकों में किराया बढ़ने से एक्सपोर्ट ठप पड़ चुका है.
उपभोक्ताओं की प्राथमिकता लिस्ट से बाहर हुई नमकीन और मिठाई
उल्लेखनीय है नमकीन के ग्राहक ज्यादातर मिडिल क्लास या अपर लोअर क्लास सेगमेंट के लोग होते हैं. युद्ध संकट के बीच उनकी जेब का खर्च दूसरी जरूरतों के लिए अधिक बढ़ गया है, इनमें एलपीजी गैस, पेट्रोल-डीजल शामिल है. ऐसे समय में नमकीन और मिठाई उनके प्राथमिकता लिस्ट में नीचे चली गई है. इसके चलते भी नमकीन इंडस्ट्री पर असर डाला, जिससे कारोबार मंदा पड़ गया है.
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