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कैंसर ने छीना बेटा तो ढाल-बने सास-ससुर, बहू का किया 'कन्यादान', भोपाल में भावुक करने देने वाली कहानी

बेटे को खोने के बाद भी परिवार ने बहू का भविष्य संवारने का फैसला लिया. उन्होंने अपने समधी से बात की और उसकी दूसरी शादी कराने का जिम्मा खुद उठाया.

कैंसर ने छीना बेटा तो ढाल-बने सास-ससुर, बहू का किया 'कन्यादान', भोपाल में भावुक करने देने वाली कहानी
शादी के दौरान प्रियंका.
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  • सास-ससुर ने बहू को बेटी बनाकर किया कन्यादान, दिल जीत लिया.
  • कैंसर से बेटे की मौत के बाद बहू प्रियंका का भविष्य संवारने का फैसला लिया.
  • सास-ससुर ने बहू के माता-पिता से बात की और उसकी दूसरी शादी कराने का जिम्मा उठाया.

कहते हैं कि रिश्ते सिर्फ खून के नहीं, बल्कि नीयत और आत्मीयता के होते हैं. कुछ इसी तरह का एक भावुक और प्रेरणादायक उदाहरण मध्य प्रदेश के भोपाल में देखने को मिला. सास-ससुर ने अपनी बहू को बेटी बनाकर अपने घर यानी उसकी ससुराल से विदा किया. दरअसल, इस दंपती ने अपने बेटे के असमय निधन के बाद यह फैसला लिया. उनके इस फैसले की अब हर तरफ सराहना हो रही है. बहु को बेटी बनाकर विदा करने का यह नजारा देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं.

संत हिरदाराम नगर के पास भौंरी गांव में यह विवाह समारोह हुआ. सभी वैवाहिक रस्में पारंपरिक रीति-रिवाजों से विवाह संपन्न हुआ. सबसे भावुक क्षण तब आया, जब किसान दिनेश बैरागी ने अपनी बहू प्रियंका का कन्यादान कर उसे बेटी की तरह आशीर्वाद देते हुए नए जीवन की शुभकामनाएं दीं.

सास-ससुर ने कराई बहू की शादी, फोटो- ANI

सास-ससुर ने कराई बहू की शादी, फोटो- ANI

2018 में हुई शादी, 2023 में पहली बार ससुराल आई

दरअसल, वर्ष 2018 में दिनेश बैरागी के पुत्र कपिल का विवाह कुलूखेड़ी गांव निवासी प्रियंका से हुआ था. उस समय प्रियंका की पढ़ाई चल रही थी, इसलिए उसकी विदाई नहीं हुई. वर्ष 2023 में वह ससुराल आई और कुछ ही दिनों में बहू सबकी लाडली बन गई. सास ससुर की सेवा ने कुछ ही दिनों में उसे सबका चहेता बना दिया.

कैंसर ने छीन लिया बेटा

इसी बीच प्रियंका के पति कपिल को कैंसर होने का पता चला. लंबे समय तक इलाज चला, लेकिन वर्ष 2024 में उनका निधन हो गया. इस दुख ने पूरे परिवार को तोड़ कर रख दिया, लेकिन बेटे को खोने के गहरे दुख के बावजूद परिवार ने प्रियंका का भविष्य संवारने का निर्णय लिया. सास ससुर ने बहू को बेटी बनाकर विदा करने का फैसला लिया, उन्होंने प्रियंका के माता पिता से भी बात की और उन्हें भी राजी कर लिया.

दिनेश बैरागी के परिवार ने निभाई हर रस्म

इसके बाद प्रियंका के लिए योग्य वर तलाशा गया और विदिशा जिले के अरारी खेजड़ा गांव निवासी गोबिंद बैरागी के साथ रिश्ता तय हुआ. फिर दोनों का विवाह संपन्न कराया गया. विवाह की सभी तैयारियों से लेकर हर रस्म तक का दायित्व दिनेश बैरागी और उनके परिवार ने निभाया.

क्या बोले दोनों के परिजन

विवाह के बाद दिनेश बैरागी ने कहा कि उन्होंने हमेशा प्रियंका को बहू नहीं, बेटी माना और उसका कन्यादान करना उनके लिए सौभाग्य की बात है. उनका मानना है कि जीवन कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ना चाहिए और परिवार का दायित्व है कि वह अपने सदस्यों का साथ निभाए. वहीं, प्रियंका के पिता रामबाबू बैरागी भी इस अवसर पर भावुक हो गए. उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि बेटी के ससुराल वाले ही उसके पुनर्विवाह की पूरी जिम्मेदारी उठाकर समाज के सामने इतनी बड़ी मिसाल पेश करेंगे.

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