मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित गजराराजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) में पीएचडी डिग्री को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. आरोप है कि कॉलेज के कुछ चिकित्सा शिक्षकों ने नौकरी पर रहते हुए नियमित छात्र के रूप में पीएचडी की पढ़ाई पूरी की, जबकि इसके लिए न तो विभाग से अनुमति ली गई और न ही उनके सेवा रिकॉर्ड में किसी तरह की एजुकेशन लीव दर्ज है. मामला सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन में हलचल मच गई है. अब मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने वर्ष 2006 से अब तक पीएचडी करने वाले सभी शिक्षकों का रिकॉर्ड खंगालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
डीन के एक पत्र से मचा हड़कंप
जीआरएमसी के डीन डॉ. आर.के.एस. धाकड़ ने जीवाजी विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर वर्ष 2006 से अब तक पीएचडी करने वाले डॉक्टरों और चिकित्सा शिक्षकों की जानकारी मांगी है. इस पत्र के सामने आते ही कॉलेज के कई विभागों में चर्चा तेज हो गई. मेडिकल कॉलेज प्रशासन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि जिन शिक्षकों ने पीएचडी की है, उन्होंने किस विश्वविद्यालय से पढ़ाई की, प्रवेश कब लिया और पढ़ाई के दौरान निर्धारित नियमों का पालन किया गया था या नहीं.
नौकरी के साथ नियमित पीएचडी पर उठे सवाल
जांच का मुख्य बिंदु यह है कि कुछ शिक्षक नौकरी करते हुए नियमित छात्र के रूप में पीएचडी करते पाए गए हैं. सामान्य तौर पर नियमित पाठ्यक्रम में अध्ययन करने के लिए संबंधित विभाग से अनुमति और आवश्यक अवकाश लेना जरूरी माना जाता है. आरोप है कि कई शिक्षकों ने बिना विभागीय स्वीकृति और बिना शैक्षणिक अवकाश के ही पीएचडी की डिग्री हासिल कर ली.
विश्वविद्यालयों से मांगा जाएगा पूरा रिकॉर्ड
कॉलेज प्रशासन केवल जीवाजी विश्वविद्यालय तक ही सीमित नहीं रहेगा. डीन के अनुसार यह जानकारी भी जुटाई जा रही है कि संबंधित शिक्षकों ने अन्य विश्वविद्यालयों से भी पीएचडी की है या नहीं. इसके बाद संबंधित विश्वविद्यालयों से प्रवेश, पंजीयन, उपस्थिति, शोध कार्य और डिग्री से जुड़े दस्तावेज तलब किए जाएंगे. जांच में मिलने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.
इन विभागों के शिक्षक जांच के दायरे में
जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेज के एनॉटॉमी, फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी और फार्माकोलॉजी जैसे नॉन-क्लिनिकल विभागों में पीएचडी महत्वपूर्ण योग्यता मानी जाती है. इन विभागों में पदोन्नति, शैक्षणिक पात्रता और सेवा में बने रहने के लिए कई मामलों में बीएससी, एमएससी के साथ पीएचडी की आवश्यकता होती है. ऐसे में जिन शिक्षकों ने सेवा के दौरान पीएचडी हासिल की है, उनकी शैक्षणिक प्रक्रिया अब जांच के दायरे में आ गई है.
सेवा रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे
जांच के दौरान केवल डिग्री की वैधता ही नहीं देखी जाएगी, बल्कि शिक्षकों के सर्विस रिकॉर्ड की भी जांच होगी. यह देखा जाएगा कि पीएचडी की पढ़ाई के दौरान किसी प्रकार की अध्ययन अवकाश (Education Leave) स्वीकृत हुई थी या नहीं. यदि रिकॉर्ड और विश्वविद्यालयों की जानकारी में किसी प्रकार का विरोधाभास सामने आता है तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है.
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