मध्य प्रदेश के कटनी में रेलवे कालोनी में दुर्लभ प्रजाति का सांप रेड सैंड बोआ मिलने से लोगों में दहशत का माहौल बन गया. डरे सहमे लोगों ने तत्काल इसकी सूचना सर्प मित्र अमिता श्रीवास को दी. अमिता ने मौके पर पहुंकर सांप का रेस्क्यू कर वन विभाग के अधिकारियों को सौंप दिया.
इसके बाद वन विभाग की टीम ने सांप का स्वास्थ्य परीक्षण कर उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया. तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली. यह दुर्लभ प्रजाति का सर्प दोमुंहा सांप कहलाता है, जिसकी संख्या बहुत कम हो चुकी है. लिहाजा, इसे दुर्लभ श्रेणी में शुमार किया जाता है.
'रेड सैंड बोआ ' की खासियत
- दो मुंहा होने का भ्रम: इस सांप की पूंछ सिर जैसी मोटी और गोल होने के कारण लोग इसे दो मुंहा समझते हैं, और खतरा होने पर यह पूंछ को सिर की तरह उठाकर शिकारियों को भ्रमित करता है.
- जहर मुक्त (Non-Venomous): यह सांप पूरी तरह जहरीला नहीं होता है और खेतों में चूहों को खाकर उनकी आबादी नियंत्रित करने के कारण इसे 'किसानों का मित्र' कहा जाता है.
- आवास और आदतें: यह सांप शुष्क, रेतीले और पथरीले इलाकों में बिल बनाकर जमीन के अंदर अपना अधिकांश जीवन बिताना पसंद करता है.
- अवैध तस्करी और अंधविश्वास: रातोंरात अमीर बनाने जैसी अंधविश्वास और तांत्रिक क्रियाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस सांप की भारी मांग है और इसकी अवैध तस्करी होती है.
- वैधानिक संरक्षण: रेड सैंड बोआ को 'भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम' के तहत सर्वोच्च कानूनी सुरक्षा प्राप्त है, इसलिए इसे मारना या बेचना एक गंभीर और दंडनीय अपराध है.
वन विभाग ने सांप को जंगल में छोड़ा
पशु सेविका और सर्प मित्र अमिता श्रीवास ने बताया कि दुर्लभ प्रजाति का रेड सैंड बोआ जिसको हिंदी में दोमुंहा सांप भी कहते है. उन्होंने बताया कि यह सांप यहां करीब तीन साल बाद दिखा है. उन्होंने बताया कि लोगों की सूचना के बाद सांप का रेस्क्यू कर वन विभाग को इसकी जानकारी दी गई, जिसके बाद डिप्टी रेंजर शिव कुमार तिवारी मौके पर पहुंचे, जिन्हें सांप सौंप दिया गया. उन्होंने सांप का स्वास्थ्य परीक्षण कराने के बाद उसे जंगल में छोड़ा दिया.
इस सांप को लेकर है कई अंधविश्वास
सर्प मित्र अमिता श्रीवास ने बताया कि इस सांप के बारे में भारत में बहुत सारे अंधविश्वास पाए जाते हैं. कुछ लोग कहते है कि इससे कॉस्मेटिक की दवाइयां बनाई जाती है. कुछ लोग कहते हैं कि इसका इस्तेमाल कैंसर की दवाइयां बताने में किया जाता है. कुछ लोग कहते है कि इसके पेट में थैली पाई जाती है, जिसकी वजह से इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय मार्केट में दो से ढाई करोड़ तक बताई जाती है. अलग-अलग क्षेत्र में अलग अलग धारणाएं पाई जाती है.इसी वजह से इस सांप की तस्करी की जाती है. हालांकि, इस तरह के सभी तर्क फिजूल हैं.
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वन विभाग के डिप्टी रेंजर शिव कुमार तिवारी ने बताया कि वन्य प्राणियों को सुरक्षित पकड़ने और छोड़ने का कार्य करने वाली अमिता श्रीवास ने सांप को सौंपा था, जिसका स्वास्थ्य परीक्षण करवाया गया, तो पूरी तरह स्वस्थ मिला. इसके बाद उसे शहर से 15 किमी दूर सुरक्षित जंगल में छोड़ गया है.
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