एमपी के भिंड में कोतवाली थाने से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक भैंस व्यापारी ने पुलिसकर्मियों पर मारपीट, रिश्वत मांगने और 3.50 लाख रुपये गायब करने के आरोप लगाए हैं. शिकायत के बाद पुलिस विभाग हरकत में आया और प्रारंभिक जांच में लापरवाही पाए जाने पर दो आरक्षकों को निलंबित कर दिया. हालांकि व्यापारी द्वारा लगाए गए अन्य गंभीर आरोपों की जांच अभी जारी है.
भैंस व्यापारी ने लगाए गंभीर आरोप
यह मामला गोहद के किथोली गांव निवासी भैंस व्यापारी कासिम खान का है. कासिम खान अपने रिश्तेदार गुलाम खान के साथ उत्तर प्रदेश में भैंस बेचकर सोमवार देर रात पिकअप वाहन से घर लौट रहे थे. आरोप है कि रात करीब एक बजे जिला अस्पताल के सामने गश्त कर रहे पुलिसकर्मियों ने उनकी पिकअप रोककर उन्हें कोतवाली थाने पहुंचा दिया.
थाने ले जाकर प्रताड़ित करने का आरोप
व्यापारी का आरोप है कि थाने में उसे और उसके चालक को हवालात में बंद कर मारपीट की गई. साथ ही गाली-गलौज करते हुए मानसिक रूप से भी प्रताड़ित किया गया. उनका कहना है कि बिना किसी वैधानिक कार्रवाई के उन्हें रातभर थाने में रोके रखा गया.
पिकअप से 3.50 लाख रुपये गायब होने का दावा
पीड़ित का आरोप है कि जिस पिकअप वाहन से वे लौट रहे थे, उसे थाने के सीसीटीवी कैमरों की निगरानी से दूर खड़ा किया. बाद में जब उन्हें छोड़ा और उन्होंने वाहन की जांच की तो भैंस बिक्री से मिले 3 लाख 50 हजार रुपये गायब थे. व्यापारी का कहना है कि यह रकम वाहन में सुरक्षित रखी थी.
रिश्वत मांगने के भी आरोप
कासिम खान ने आरोप लगाया है कि थाने से छोड़ने के बदले पुलिसकर्मियों ने पहले 10 हजार रुपये की मांग की थी. बाद में 6 हजार रुपये लेकर मामला निपटाने की बात कही. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी जेब में रखे 2700 रुपये भी निकाल लिए.
शिकायत के बाद विभागीय कार्रवाई
मामले की शिकायत कासिम खान, उनकी मां और पिकअप चालक ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) प्रदीप पटेल से की. शिकायत को गंभीर मानते हुए एएसपी ने जांच सीएसपी निरंजन राजपूत को सौंपी. प्रारंभिक जांच में पाया गया कि आरक्षक गौरव तोमर और आनंद त्रिपाठी ने व्यापारी को रात में थाने बुलाया, लेकिन उसके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की और वरिष्ठ अधिकारियों को भी इसकी जानकारी नहीं दी.
दो आरक्षक निलंबित
प्रथम दृष्टया विभागीय नियमों के उल्लंघन और लापरवाही सामने आने पर एएसपी प्रदीप पांडेय ने कोतवाली थाने में पदस्थ आरक्षक गौरव तोमर और आनंद त्रिपाठी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. पुलिस विभाग ने इसे अनुशासनहीनता का मामला मानते हुए कार्रवाई की. हालांकि व्यापारी द्वारा लगाए गए मारपीट, रिश्वतखोरी, नकदी गायब होने और राजीनामे के नाम पर रकम लौटाने जैसे आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है.
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