बीएसपी प्रमुख मायावती (फाइल फोटो)
- यूपी में फौरन चुनाव करा कर नई सरकार बनने का मौका दिया जाए
- यादव खानदान की नजर अब चुनाव पर है, लिहाजा डैमेज कंट्रोल में लगे हैं
- शिवपाल यादव ने कहा, हमारे परिवार में सब ठीक है, हम सब एक हैं
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लखनऊ:
यूपी में यादव खानदान की लड़ाई में अब मायावती कूद गई हैं. उनका कहना है कि चूंकि इस खानदान की लड़ाई से यूपी के बुरे दिन आने वाले हैं, इसलिए यहां फौरन चुनाव करा कर नई सरकार बनने का मौका दिया जाए. हालांकि यादव खानदान के लोग आज डैमेज कंट्रोल में लगे रहे.
दुश्मन को लड़ता देख लगता है कि मायावती की बाछें खिल आई हैं. उन्होंने इस पर बाकायदा एक बयान जारी किया है, जिसमें वो कहती हैं, यादव कुनबे की लड़ाई सड़क पर आ गई है. अखबार कुछ इस तरह की हेडलाइन लगा रहे हैं, जैसे...सपा सुप्रीमो बोले नोट गिन रहे हैं ज्यादातर मंत्री, शिवपाल की बगावत को मुलायम का समर्थन, कुनबा संभालने में जुटा समाजवादी परिवार... वगैरह वगैरह. इससे लगता है कि यूपी के बुरे दिन आने वाले हैं. लिहाजा फौरन चुनाव करा दिया जाय.''
उधर यादव खानदान अब डैमेज कंट्रोल में लगा है. कैबिनेट की ब्रीफिंग के दौरान मीडिया ने अखिलेश यादव से परिवार के झगड़े और मुख्तार आंसारी पर सवाल पूछे लेकिन इसके जवाब में अखिलेश यादव ने स्कूल बैग और लैपटॉप बांटने के बारे में जानकारी दी. यह बातचीत कुछ यूं हुई.
मीडिया : मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल से विलय के लिए क्या समाजवादी पार्टी तैयार है?
अखिलेश : देखिए आपको हम पहले ही बता चुके हैं कि कक्षा एक से लेकर आठ वाले बच्चों को स्कूल बैग हम मुफ्त देंगे. कैबिनेट ने ये फैसला किया
मीडिया : नेताजी कई बार खुले मंच से कह चुके हैं कि मंत्री नोट कमा रहे हैं. आप क्या कहेंगे?
अखिलेश : (हंसते हुए) अच्छा है... कगाज-वागज उठा लूं. अब हम जा रहे हैं.
यादव खानदान की नजर अब चुनाव पर है. लिहाजा डैमेज कंट्रोल में लगे हैं. एक तरफ वो मीडिया के मुश्किल सवालों को टाल रहे हैं, वहीं जिले जिले तोहफे बांट रहे हैं. 90 हजार छात्राओं को ग्रेजुएशन करने के लिए 30-30 हजार रुपये दिए जा रहे हैं. इस्तीफे की धमकी देने वाले शिवपाल यादव ने भी आज मुरादाबाद में कहा कि जो बातें आपलोग चला रहे हैं, हमारे परिवार में कहीं कुछ नहीं है. हम सब एक हैं.
लेकिन ये सारा विवाद पैदा हुआ है घर वालों के सड़क पर लड़ने से. अगर घर वाले घर में लड़ेंगे तो शायद किसी को फर्क न पड़े. लेकिन अगर घर वाले चौराहे पर लड़ेंगे तो कुछ लोग मजा लेंगे, कुछ लोग लड़ाई लगाएंगे और कुछ उस लड़ाई में अपना फायदा तलाशेंगे. और अगर ये घर कोई बड़ा सियासी घर हो तो फिर इसपर देशभर में सियासत भी होगी. लिहाजा मौका-मसलेहात देख कर लड़ें.
दुश्मन को लड़ता देख लगता है कि मायावती की बाछें खिल आई हैं. उन्होंने इस पर बाकायदा एक बयान जारी किया है, जिसमें वो कहती हैं, यादव कुनबे की लड़ाई सड़क पर आ गई है. अखबार कुछ इस तरह की हेडलाइन लगा रहे हैं, जैसे...सपा सुप्रीमो बोले नोट गिन रहे हैं ज्यादातर मंत्री, शिवपाल की बगावत को मुलायम का समर्थन, कुनबा संभालने में जुटा समाजवादी परिवार... वगैरह वगैरह. इससे लगता है कि यूपी के बुरे दिन आने वाले हैं. लिहाजा फौरन चुनाव करा दिया जाय.''
उधर यादव खानदान अब डैमेज कंट्रोल में लगा है. कैबिनेट की ब्रीफिंग के दौरान मीडिया ने अखिलेश यादव से परिवार के झगड़े और मुख्तार आंसारी पर सवाल पूछे लेकिन इसके जवाब में अखिलेश यादव ने स्कूल बैग और लैपटॉप बांटने के बारे में जानकारी दी. यह बातचीत कुछ यूं हुई.
मीडिया : मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल से विलय के लिए क्या समाजवादी पार्टी तैयार है?
अखिलेश : देखिए आपको हम पहले ही बता चुके हैं कि कक्षा एक से लेकर आठ वाले बच्चों को स्कूल बैग हम मुफ्त देंगे. कैबिनेट ने ये फैसला किया
मीडिया : नेताजी कई बार खुले मंच से कह चुके हैं कि मंत्री नोट कमा रहे हैं. आप क्या कहेंगे?
अखिलेश : (हंसते हुए) अच्छा है... कगाज-वागज उठा लूं. अब हम जा रहे हैं.
यादव खानदान की नजर अब चुनाव पर है. लिहाजा डैमेज कंट्रोल में लगे हैं. एक तरफ वो मीडिया के मुश्किल सवालों को टाल रहे हैं, वहीं जिले जिले तोहफे बांट रहे हैं. 90 हजार छात्राओं को ग्रेजुएशन करने के लिए 30-30 हजार रुपये दिए जा रहे हैं. इस्तीफे की धमकी देने वाले शिवपाल यादव ने भी आज मुरादाबाद में कहा कि जो बातें आपलोग चला रहे हैं, हमारे परिवार में कहीं कुछ नहीं है. हम सब एक हैं.
लेकिन ये सारा विवाद पैदा हुआ है घर वालों के सड़क पर लड़ने से. अगर घर वाले घर में लड़ेंगे तो शायद किसी को फर्क न पड़े. लेकिन अगर घर वाले चौराहे पर लड़ेंगे तो कुछ लोग मजा लेंगे, कुछ लोग लड़ाई लगाएंगे और कुछ उस लड़ाई में अपना फायदा तलाशेंगे. और अगर ये घर कोई बड़ा सियासी घर हो तो फिर इसपर देशभर में सियासत भी होगी. लिहाजा मौका-मसलेहात देख कर लड़ें.
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