भारत में शादी हमेशा सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं मानी गई है. ये एक ऐसा पवित्र बंधन है, जिसमें दो लोग ही नहीं, बल्कि उनके परिवार भी एक-दूसरे से जुड़ते हैं. इसलिए हमारे समाज में जीवनसाथी चुनने के फैसले में परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. हालांकि, समय के साथ शादी और रिश्तों को लेकर लोगों की सोच भी बदल रही है. आज के दौर में GenZ अपने जीवनसाथी को चुनने में पहले से कहीं ज्यादा भूमिका निभाना चाहते हैं. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि उन्हें अपनी पसंद और परिवार की उम्मीदों में से किसी एक को चुनना पड़े. असली जरूरत दोनों के बीच संतुलन या कहें बैलेंस बनाने की है. आज हम आपको इसी के बारे में बताने जा रहे हैं.
जीवनसाथी चुनते समय ये बातें हैं जरूरी
रिलेशनशिप एक्सपर्ट और मैट्रिमोनी डॉट कॉम के सीईओ और फाउंडर मुरुगावेल जनकीरमन के अनुसार पहले माता-पिता जीवनसाथी चुनते समय परिवार, समाज, शिक्षा और आर्थिक स्थिति जैसी बातों पर सबसे ज्यादा जोर देते थे. आज भी ये बातें महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अब लोग कुछ और चीजों को भी उतना ही जरूरी मानते हैं. जैसे कि दोनों के विचार कितने मिलते हैं, जीवन जीने का तरीका कैसा है, भविष्य को लेकर उनकी सोच क्या है और क्या उनके बीच इमोशनल कनेक्शन कैसा है.
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अब पैरेंट्स की क्या है भूमिका?
अब अधिकतर लोग सोचते हैं कि जीवनसाथी चुनने के लिए परिवार की भूमिका खत्म हो गई है. एक्सपर्ट मुरुगावेल जनकीरमन के अनुसार ऐसा नहीं है. आज भी परिवार इस फैसले का अहम हिस्सा हैं. माता-पिता अपने एक्सपीरिएंस और अपने बच्चों की समझ के आधार पर सही सलाह दे सकते हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि अब पैरेंट्स की भूमिका दबाव बनाने की बजाय सही दिशा दिखाने की है. यही वजह है कि ऑनलाइन मैचमेकिंग प्लेटफॉर्म काफी फेमस हो रहे हैं. वे लोगों को अपनी पसंद के अनुसार जीवनसाथी तलाशने का अवसर देते हैं, साथ ही परिवार की उम्मीदों का भी ध्यान रखते हैं.
अरेंज मैरिज और लव मैरिज की तुलना
अक्सर लोग अरेंज मैरिज और लव मैरिज की तुलना करते हैं, लेकिन किसी रिश्ते की सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करती कि दोनों की मुलाकात कैसे हुई. असली बात ये है कि दोनों के सपने, विचार, और उम्मीदें कितनी मिलती हैं.
रिलेशनशिप एक्सपर्ट बताते हैं कि एक सफल शादी सिर्फ उम्मीदों को पूरा करना नहीं है. सक्सेसफुल मैरिज इस बात पर निर्भर करती है कि रिलेशन में जुड़े दोनों लोग कितने खुश और संतुष्ट हैं. जब परिवार का साथ और आपसी समझ दोनों मिल जाते हैं, तो रिश्ता मजबूत बनता है.
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