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पैरेंट्स के ये 5 रेड फ्लैग्स बिगाड़ देते हैं बच्चे का बचपन, साइकोलॉजिस्ट ने कहा कभी ना करें ये गलतियां 

Parenting Red Flags: ऐसे कई काम हैं जो पैरेंट्स जाने या अनजाने में कर देते हैं. ऐसे में यहां जानिए कौनसी हैं वो गलतियां जिनसे पैरेंट्स को खासा परहेज करना चाहिए नहीं तो बच्चे पर मानसिक तौर पर प्रभाव पड़ने लगता है. 

पैरेंट्स के ये 5 रेड फ्लैग्स बिगाड़ देते हैं बच्चे का बचपन, साइकोलॉजिस्ट ने कहा कभी ना करें ये गलतियां 
Parenting Tips: माता-पिता की कुछ गलतियां बच्चे पर डालती हैं बुरा असर. 

Parenting: बच्चे की परवरिश में समय के साथ-साथ कई बदलाव आ गए हैं. पैरेंट्स की यह कोशिश रहती है कि उनका बच्चा हमेशा आगे बढ़ता रहे, जीवन में प्रगति पर रहे, अच्छा इंसान बने और उसका व्यवहार भी अच्छा हो. जब बात किसी और के बच्चे को लेकर हो तो व्यक्ति कई तरह की सलाह देने लगता है लेकिन अगर अपने बच्चे की परवरिश हो तो कई बार चीजों को समझने में और किस तरह की पैरेंटिंग अप्रोच अपनानी चाहिए यह समझने में दिक्कत होती है. इसी उलझन में कई बार पैरेंट्स ऐसी गलतियां (Parenting Mistakes) कर देते हैं जिनसे बच्चे पर मानसिक तौर पर बुरा असर पड़ता है और उसकी आदतों, व्यक्तित्व और जीवन पर भी बुरा प्रभाव नजर आता है. चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट श्वेता गांधी ने पैरेंट्स की इन्हीं गलतियों का जिक्र किया है और कहा है कि ये मिस्टेक्स पैरेंटिंग रेड फ्लैग्स (Red Flags) हैं. इस वीडियो को श्वेता ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है. जानिए किन गलतियों को ना करने की सलाह दे रही हैं साइकोलॉजिस्ट. 

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पैरेंटिंग के रेड फ्लैग्स कौन से हैं | Parenting Red Flags

मादक पदार्थों का सेवन 

अगर पैरेंट्स एल्कोहल या ड्रग्स का सेवन करते हैं या फिर धूम्रपान वगैरह बच्चों के सामने भी करते हैं तो इससे बच्चे की मानसिक स्थिति पर असर पड़ने लगता है. 

झगड़ा करना 

घर में अगर झगड़े का माहौल रहता है, नेगेटिविटी है या स्ट्रेस का माहौल रहता है या बहुत शांति है तो ऐसे माहौल में जब बच्चा बड़ा होता है तो उसकी इमोशनल हेल्थ डैमेज होने लगती है. 

बार-बार बच्चे को टोकना 

पैरैंट्स अक्सर ही खुद के व्यवहार को इग्नोर करते हैं लेकिन बच्चे को उसका व्यवहार ठीक करने के लिए टोकते रहते हैं. आप खुद चिल्लाते रहते हैं मगर बच्चा जब आवाज ऊंची करता है तो आप उसे चिल्लाकर कहते हैं कि चिल्लाओ मत. यह एक बड़ा रेड फ्लैग है. 

बच्चे के इमोशंस को नकारना 

एक बड़ा पैरेंटिंग रेड फ्लैग यह भी है कि आप बच्चे के इमोशंस को समझने के बजय उन भावनाओं को नकार देते हो. साइकोलॉजिस्ट बताती हैं कि बच्चे की ये डीप फीलिंग्स खत्म नहीं होंगी बल्कि उसके दिमाग के किसी कोने में जाकर दब जाएंगी. बड़े होने के बाद यही फीलिंग्स एंजाइटी और गुस्से के फॉर्म में बाहर आएंगी. 

फिट लाइफस्टाइल फॉलो ना करना 

माता-पिता अगर फिट लाइफस्टाइल फॉलो नहीं करते हैं, पैकेट वाली चीजें खाते हैं या फिर जंक खाते हैं और वर्कआउट नहीं करते तो आप बच्चे के सामने नेगेटिव रोल मॉडल बन रहे हैं. 

पैरेंट्स को इस तरह करना चाहिए व्यवहार 
  • बच्चे की किसी भी बात पर रिएक्ट करने से पहले गहरी सांस लें और फिर रिस्पोंस दें. 
  • बच्चे के साथ जब होते हैं तो अपने फोन में लगने के बजाय बच्चे को समय दें. 
  • छोटे-छोटे मूमेंट्स को नॉटिस करें. बच्चे की हंसी, मुस्कुराहट और सवालों के जबाव दें. 
  • बच्चों को अपने लिए चुनने का मौका दें. छोटी-छोटी चीजें ही आपके बच्चे में आत्मविश्वास भर देती हैं. 
  • बच्चे की फीलिंग्स को समझें. यह कहने के बजाय कि मत रो, कहें कि मुझे पता है तुम नाराज हो, मैं यही हूं तुम्हारे लिए.  


 

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