- अनोयारा ख़ातून, पं. बंगाल में सुंदरबन जंगलों में तस्करी की शिकार हुई थी
- ख़ातून को संयुक्त राष्ट्र से दो बार बोलने के लिए न्यौता मिल चुका है
- बिल गेट्स और मेलिंडा गेट्स तक से मिल चुकी है खातून
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कोलकाता:
18 साल की अनोयारा ख़ातून, पश्चिम बंगाल में सुंदरबन के जंगलों में तस्करी की शिकार हो गई थी लेकिन अब यही लड़की अंतरराष्ट्रीय बाल अधिकारों की अगुवाई कर रही है. यही नहीं, ख़ातून को संयुक्त राष्ट्र से दो बार बोलने के लिए न्यौता मिल चुका है. उत्तर 24 परगनास जिले के संदेशखाली गांव में ख़ातून किसी हीरो से कम नहीं है जो संयुक्त राष्ट्र प्रमुख बान की मून से लेकर बिल गेट्स और मेलिंडा गेट्स तक से मिल चुकी है.
गरीबी की वजह से घरों में बाल मजदूरी करने के लिए ख़ातून की तस्करी की गई थी. वह बताती हैं 'अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने अपने गांव की कहानियां बताना और दुनिया भर के लोगों की आपबीती सुनना, इसने मुझे बतौर कार्यकर्ता मज़बूत बना दिया है.'
अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन 'सेव द चिल्ड्रन' की युवा नेता के रूप में ख़ातून अब बच्चों के 80 समूहों का नेतृत्व करती हैं. हर समूह में 10-20 सदस्य हैं जो बाल विवाह, तस्करी, बाल मजदूरी के अलावा स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों के लिए भी लड़ते हैं. वह बताती हैं कि जब उन्होंने शुरूआत की तब गांववालों ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया था - 'मैंने बहुत आलोचना झेली है लेकिन अब बदलाव हो रहा है. लोग मेरी बात सुन रहे हैं.'
पिछले साल उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के संधारणीय विकास लक्ष्य से जुड़े शिखर सम्मेलन में भाग लिया था और इस साल उन्होंने भारतीय बच्चों का संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रतिनिधित्व किया. इन बड़ी हस्तियों के अलावा ख़ातून ने अलग अलग देशों के कई और बाल कार्यकर्ताओं से मुलाकात की जिन्होंने उससे भी ज्यादा पीड़ा झेली है लेकिन अब वह समाज को बदलने के लिए अपनी लड़ाई ज़ोरों से लड़ रहे हैं.
उन्होंने बताया कि इराक़ से आई 23 साल की यज़ीदी महिला नादिया मुराद की कहानी सुनकर वह अपने आंसू नहीं रोक पाईं. नादिया को संयुक्त राष्ट्र द्वारा मानव तस्करी का शिकार हुए लोगों की गुडविल एम्बैसेडर हैं. ख़ातून कहती हैं 'मुराद ने अपनी जिदंगी में बहुत कुछ खोया है. पता नहीं उसने इन सबका सामना कैसे किया. वह मेरे लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है. देश अलग अलग हो सकते हैं लेकिन हमारी समस्याएं एक ही हैं.'
गरीबी की वजह से घरों में बाल मजदूरी करने के लिए ख़ातून की तस्करी की गई थी. वह बताती हैं 'अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने अपने गांव की कहानियां बताना और दुनिया भर के लोगों की आपबीती सुनना, इसने मुझे बतौर कार्यकर्ता मज़बूत बना दिया है.'
अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन 'सेव द चिल्ड्रन' की युवा नेता के रूप में ख़ातून अब बच्चों के 80 समूहों का नेतृत्व करती हैं. हर समूह में 10-20 सदस्य हैं जो बाल विवाह, तस्करी, बाल मजदूरी के अलावा स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों के लिए भी लड़ते हैं. वह बताती हैं कि जब उन्होंने शुरूआत की तब गांववालों ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया था - 'मैंने बहुत आलोचना झेली है लेकिन अब बदलाव हो रहा है. लोग मेरी बात सुन रहे हैं.'
पिछले साल उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के संधारणीय विकास लक्ष्य से जुड़े शिखर सम्मेलन में भाग लिया था और इस साल उन्होंने भारतीय बच्चों का संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रतिनिधित्व किया. इन बड़ी हस्तियों के अलावा ख़ातून ने अलग अलग देशों के कई और बाल कार्यकर्ताओं से मुलाकात की जिन्होंने उससे भी ज्यादा पीड़ा झेली है लेकिन अब वह समाज को बदलने के लिए अपनी लड़ाई ज़ोरों से लड़ रहे हैं.
उन्होंने बताया कि इराक़ से आई 23 साल की यज़ीदी महिला नादिया मुराद की कहानी सुनकर वह अपने आंसू नहीं रोक पाईं. नादिया को संयुक्त राष्ट्र द्वारा मानव तस्करी का शिकार हुए लोगों की गुडविल एम्बैसेडर हैं. ख़ातून कहती हैं 'मुराद ने अपनी जिदंगी में बहुत कुछ खोया है. पता नहीं उसने इन सबका सामना कैसे किया. वह मेरे लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है. देश अलग अलग हो सकते हैं लेकिन हमारी समस्याएं एक ही हैं.'
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