पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फाइल फोटो)
- राजनीतिक दलों को धमका रहे हैं प्रधानमंत्री'
- 'नोटबंदी के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ूंगी'
- 'जब तक लोगों को इंसाफ नहीं मिल जाता, लड़ाई जारी रहेगी'
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कोलकाता:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कथित रूप से 'राजनातिक दलों को धमकाने' को लेकर उन पर जोरदार हमला करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा कि वह उन्हें जेल भेज सकते हैं, लेकिन डरा नहीं सकते. नोटबंदी का विरोध करने को लेकर पीएम मोदी द्वारा ममता बनर्जी पर हमले के लिए बंगाल में चिटफंड का मुद्दा उठाने के एक दिन बाद उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को गंभीरता बरतने की जरूरत है.
ममता ने कोलकाता में कहा, 'प्रधानमंत्री राजनीतिक दलों को धमका रहे हैं. इस तरह की चीजें मैंने पहले कभी नहीं देखीं. प्रधानमंत्री को गंभीरता बरतने की जरूरत है.' उन्होंने आरोप लगाया कि नोटबंदी के मुद्दे पर कुछ राजनीतिक दल चुप्पी साधे हुए हैं, क्योंकि पीएम मोदी प्रतिदिन उन्हें धमका रहे हैं.
ममता ने कहा, 'लेकिन मैं नहीं डरती. वह मुझे जेल भेज सकते हैं, क्योंकि वह सत्ता में हैं. लेकिन मुझे डरा नहीं सकते.' उन्होंने को कहा कि नोटबंदी के खिलाफ वह बुधवार को दिल्ली की सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन करेंगी.
ममता ने संवाददाताओं से कहा, 'मैं दिल्ली जा रही हूं. मैं बुधवार को सड़क पर विरोध-प्रदर्शन करने उतरूंगी. अगर हमें आमंत्रण मिलता है, तो मैं 23 नवंबर को अन्य दलों के विरोध कार्यक्रम में शामिल होऊंगी, क्योंकि यह एक बड़ी लड़ाई है.' तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने कहा कि वह 29 नवंबर को लखनऊ में एक रैली को संबोधित करेंगी. उन्होंने कहा, '1 और 2 दिसंबर को मैं बिहार में भी एक या दो बैठकों को संबोधित करूंगी. आम लोगों की तरफ से मैं पंजाब में भी जाकर बोलूंगी.' ममता ने कहा, 'जब तक लोगों को इंसाफ नहीं मिल जाता, मेरी लड़ाई जारी रहेगी.'
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल,त्रिपुरा, मणिपुर, असम तथा कुछ अन्य भागों में तृणमूल कांग्रेस अलग से विरोध प्रदर्शन करेगी. उल्लेखनीय है कि नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले के खिलाफ ममता बनर्जी सबसे आगे हैं. उन्होंने पिछले बुधवार को तीन अन्य पार्टियों-आम आदमी पार्टी (आप), शिव सेना तथा नेशनल कांफ्रेस (नेकां) के नेताओं के साथ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की थी. इसके एक दिन बाद उन्होंने दिल्ली के आजादपुर मंडी में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ संयुक्त रूप से एक बैठक को संबोधित किया था और केंद्र सरकार को नोटबंदी वापस लेने के लिए 72 घंटे की समय सीमा दी थी.
शनिवार को ममता ने यहां भारतीय रिजर्व बैंक कार्यालय के अधिकारियों से मुलाकात की और राज्य में करेंसी के हालात पर सूचनाएं मांगीं. ममता ने कहा कि तीन पार्टियां पहले ही उनके विरोध-प्रदर्शन में शामिल हो चुकी हैं. यह पूछे जाने पर कि क्या उनके विरोध-प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के भी शामिल होने की संभावना है, उन्होंने कहा, 'अगर वह शामिल होते हैं, तो अच्छी बात होगी.'
यह पूछे जाने पर कि उनका बिहार का कार्यक्रम कैसे सफल होगा, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नोटबंदी का समर्थन किया है, उन्होंने कहा, 'तो क्या? वहां और कोई नहीं है?'
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
ममता ने कोलकाता में कहा, 'प्रधानमंत्री राजनीतिक दलों को धमका रहे हैं. इस तरह की चीजें मैंने पहले कभी नहीं देखीं. प्रधानमंत्री को गंभीरता बरतने की जरूरत है.' उन्होंने आरोप लगाया कि नोटबंदी के मुद्दे पर कुछ राजनीतिक दल चुप्पी साधे हुए हैं, क्योंकि पीएम मोदी प्रतिदिन उन्हें धमका रहे हैं.
ममता ने कहा, 'लेकिन मैं नहीं डरती. वह मुझे जेल भेज सकते हैं, क्योंकि वह सत्ता में हैं. लेकिन मुझे डरा नहीं सकते.' उन्होंने को कहा कि नोटबंदी के खिलाफ वह बुधवार को दिल्ली की सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन करेंगी.
ममता ने संवाददाताओं से कहा, 'मैं दिल्ली जा रही हूं. मैं बुधवार को सड़क पर विरोध-प्रदर्शन करने उतरूंगी. अगर हमें आमंत्रण मिलता है, तो मैं 23 नवंबर को अन्य दलों के विरोध कार्यक्रम में शामिल होऊंगी, क्योंकि यह एक बड़ी लड़ाई है.' तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने कहा कि वह 29 नवंबर को लखनऊ में एक रैली को संबोधित करेंगी. उन्होंने कहा, '1 और 2 दिसंबर को मैं बिहार में भी एक या दो बैठकों को संबोधित करूंगी. आम लोगों की तरफ से मैं पंजाब में भी जाकर बोलूंगी.' ममता ने कहा, 'जब तक लोगों को इंसाफ नहीं मिल जाता, मेरी लड़ाई जारी रहेगी.'
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल,त्रिपुरा, मणिपुर, असम तथा कुछ अन्य भागों में तृणमूल कांग्रेस अलग से विरोध प्रदर्शन करेगी. उल्लेखनीय है कि नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले के खिलाफ ममता बनर्जी सबसे आगे हैं. उन्होंने पिछले बुधवार को तीन अन्य पार्टियों-आम आदमी पार्टी (आप), शिव सेना तथा नेशनल कांफ्रेस (नेकां) के नेताओं के साथ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की थी. इसके एक दिन बाद उन्होंने दिल्ली के आजादपुर मंडी में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ संयुक्त रूप से एक बैठक को संबोधित किया था और केंद्र सरकार को नोटबंदी वापस लेने के लिए 72 घंटे की समय सीमा दी थी.
शनिवार को ममता ने यहां भारतीय रिजर्व बैंक कार्यालय के अधिकारियों से मुलाकात की और राज्य में करेंसी के हालात पर सूचनाएं मांगीं. ममता ने कहा कि तीन पार्टियां पहले ही उनके विरोध-प्रदर्शन में शामिल हो चुकी हैं. यह पूछे जाने पर कि क्या उनके विरोध-प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के भी शामिल होने की संभावना है, उन्होंने कहा, 'अगर वह शामिल होते हैं, तो अच्छी बात होगी.'
यह पूछे जाने पर कि उनका बिहार का कार्यक्रम कैसे सफल होगा, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नोटबंदी का समर्थन किया है, उन्होंने कहा, 'तो क्या? वहां और कोई नहीं है?'
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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