Lat Sahib Meaning: 'ज्यादा लाट साहब न बनो...' ये डायलॉग आपने अपने मम्मी-पापा या दोस्तों या रिश्तेदारों से कभी न कभी तो सुना ही होगा. जब भी कोई बहुत ज्यादा ठाट-बाट दिखाता है या हुक्म चलाता है, तो हम उसे 'लाट साहब' कह देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये लाट साहब आखिर थे कौन. क्या ये कोई काल्पनिक कैरेक्टर हैं या वाकई इतिहास में इनका कोई वजूद था. चलिए आज इसकी पूरी कहानी जानते हैं.
असली लाट साहब कौन थे
लाट साहब शब्द अंग्रेजी शब्द 'लॉर्ड' (Lord) से निकला है. ब्रिटिश राज के दौरान भारत के सबसे बड़े अधिकारियों जैसे गवर्नर जनरल या वायसराय के नाम के आगे 'लॉर्ड' लगा होता था. जैसे लॉर्ड कर्जन या लॉर्ड माउंटबेटेन. भारतीय लोग 'लॉर्ड' को अपनी देसी भाषा में 'लाट' बोलने लगे. क्योंकि ये लोग उस वक्त के सबसे पावरफुल अफसर होते थे, इसलिए 'लाट साहब' शब्द पावर, रसूख और अमीरी का प्रतीक बन गया.
छोटे लाट और बड़े लाट का मतलब क्या है
उस समय दो तरह के लाट साहब होते थे. बड़े लाट साहब भारत के वायसराय (Viceroy) होते थे, जो पूरे देश के मालिक थे. छोटे लाट साहब राज्यों के गवर्नर (Governor) होते थे. उस दौर में दिल्ली के 'लुटियंस जोन' और शिमला की पहाड़ियों में इन लाट साहबों का ही राज चलता था. इनके एक इशारे पर कानून बदल जाते थे.
ये मुहावरा इतना मशहूर क्यों हुआ
पुराने जमाने में लाट साहब का मतलब होता था वह इंसान जिसके पास असीमित पावर हो, जो आलीशान बंगलों में रहता हो, जिसके आगे-पीछे नौकरों की फौज चलती हो. जब भारत आजाद हुआ, तो अंग्रेज तो चले गए, लेकिन ये शब्द यहीं रह गया. अब अगर कोई आम आदमी भी बहुत ज्यादा टौर (Attitude) दिखाता है या खुद को दूसरों से ऊपर समझता है, तो लोग मजाक में कह देते हैं, 'भैया, तुम कौन से लाट साहब के नाती हो.'
आज के 'लाट साहब' कौन हैं?
भले ही अब अंग्रेज नहीं हैं, लेकिन 'लाट साहब' वाला एटीट्यूड आज भी जिंदा है. बिना लाइन में लगे काम कराने वाले, दूसरों पर बेवजह हुक्म चलाने वाले, सड़क पर गलत गाड़ी चलाकर भी रौब दिखाने वाले जैसे लोगों को लोग लाट साहब ही कहकर कई बार बुला देते हैं.
यह भी पढ़ें- NCERT की बजाय महंगी प्राइवेट किताबें खरीदने पर मजबूर कर रहा है स्कूल? ऐसे कर सकते हैं शिकायत
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं